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विभागीय अधिकारियों के ढुल मुल रवैये से परवान नहीं चढ़ पा रही योजनाएं
Updated Thu, 05 Oct 2017 12:08 AM IST
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अल्मोड़ा। विभाग या फिर शासन के ढीले रवैये के कारण वन विभाग की अधिकांश योजनाएं सालों से लंबित पड़ी हैं। इन योजनाओं के संबंध में पूछे जाने पर विभागीय अधिकारी भी ज्यादा कुछ नहीं बोल पाते हैं और शासन स्तर से स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। इन योजना में एक नगर के एनटीडी स्थित मृग विहार को मिनी जू का बनाए जाने का प्रस्ताव कई सालों से लंबित पड़ा है। पिछले साल वन विभाग को कुछ पैसा स्वीकृत भी हुआ था, लेकिन आज तक बजट नहीं मिल पाया।
शहर के बीचों बीच एनटीडी स्थित मृग विहार में मिनी जू बनाने की तैयारी पिछले कई सालों से चल रही है। पांच करोड़ 40 लाख की लागत से बनने वाले मिनी जू के लिए सिविल सोयम विभाग ने केंद्रीय जू अथारिटी को कई बार पत्र व्यवहार भी किया। कई बार आपत्तियों के बाद भी विभाग लगातार योजना को शुरू करने के कार्य में लगा है, लेकिन यह योजना सरकारी फाइलों में ही उलझ कर रह गई है। 38 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मृग विहार में प्रस्तावित मिनी जू के लिए चारदीवारी करने के अलावा सीमेंट की ऊंची दीवार का निर्माण किया जाना, मिनी जू में सेनिटेशन आदि उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी हैं, लेकिन विभाग को इन कार्यों को पूरा करने के लिए पैसा ही नहीं मिल पा रहा है। मृग विहार में सांभर, चीतल, सफेद बंदर, तेंदुए, भालू, काकड़ समेत करीब 94 से अधिक जानवर हैं। मिनी जू बन जाने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन मिनी जू कब तक बनकर तैयार होगा अधिकारी इस पर कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
इधर डीएफओ, सिविल सोयम आरसी शर्मा ने बताया कि पांच करोड़ 40 लाख रुपये की मिनी जू योजना में नाइट शल्टर के लिए पिछली बार करीब 60 लाख रुपये मंजूर हुए थे, लेकिन वह पैसा विभाग को नहीं मिल पाया है। इसके अलावा अन्य कई योजनाएं स्वीकृति और पैसे के बगैर लटकी पड़ी हैं।
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शहर के बीचों बीच एनटीडी स्थित मृग विहार में मिनी जू बनाने की तैयारी पिछले कई सालों से चल रही है। पांच करोड़ 40 लाख की लागत से बनने वाले मिनी जू के लिए सिविल सोयम विभाग ने केंद्रीय जू अथारिटी को कई बार पत्र व्यवहार भी किया। कई बार आपत्तियों के बाद भी विभाग लगातार योजना को शुरू करने के कार्य में लगा है, लेकिन यह योजना सरकारी फाइलों में ही उलझ कर रह गई है। 38 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मृग विहार में प्रस्तावित मिनी जू के लिए चारदीवारी करने के अलावा सीमेंट की ऊंची दीवार का निर्माण किया जाना, मिनी जू में सेनिटेशन आदि उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी हैं, लेकिन विभाग को इन कार्यों को पूरा करने के लिए पैसा ही नहीं मिल पा रहा है। मृग विहार में सांभर, चीतल, सफेद बंदर, तेंदुए, भालू, काकड़ समेत करीब 94 से अधिक जानवर हैं। मिनी जू बन जाने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन मिनी जू कब तक बनकर तैयार होगा अधिकारी इस पर कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
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इधर डीएफओ, सिविल सोयम आरसी शर्मा ने बताया कि पांच करोड़ 40 लाख रुपये की मिनी जू योजना में नाइट शल्टर के लिए पिछली बार करीब 60 लाख रुपये मंजूर हुए थे, लेकिन वह पैसा विभाग को नहीं मिल पाया है। इसके अलावा अन्य कई योजनाएं स्वीकृति और पैसे के बगैर लटकी पड़ी हैं।
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