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शिक्षको की मांग को लेकर आ सकती है आंदोलनों की बाढ़
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:03 PM IST
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। महाराष्ट्र के एक स्कूल के बच्चे अपनी समस्याओं को लेकर प्रेस क्लब पहुंच गए थे तो वहां की सरकार को उस पर कार्रवाई करनी पड़ी थी। जीआईसी मासी के बच्चों द्वारा मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने के बाद अब वहां दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश देकर इतिश्री कर ली गई। इस तरह के फरमानों से समस्या का स्थायी हल निकलता नहीं दिख रहा है। शिक्षकों की कमी के चलते ब्लॉक के अधिकांश स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है। क्षेत्र के चार स्कूल आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं, जबकि पांच अन्य विद्यालयों में आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। ऐसी स्थिति में निकट भविष्य में शिक्षकों की मांग को लेकर आंदोलन की बाढ़ आनी तय है।
पिछले साल की बात है जब स्कूली बैग में किताबों का भार कम न होने से परेशान महाराष्ट्र के एक स्कूल के बच्चे कहीं सुनवाई नही होने पर सीधे मुंबई प्रेस क्लब पहुंच गए थे। बच्चों ने क्लब में पहुंचकर प्रेस वार्ता कर बस्ते के बोझ से शरीर पर पड़ रहे कुप्रभावों पर खुलकर बात रखी थी। यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रही इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने स्कूली बस्तों का भार कम करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया।
इधर अपने प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी से आंदोलनों की बाढ़ आनी तय है। जीआईसी मासी के परेशान छात्रों ने चारों ओर से निराश होने के बाद हाइकोर्ट के मुख्य न्याधीश को पत्र लिखकर प्रवक्ताओं की नियुक्ति की मांग की। इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और तुरंत ही दो विद्यालयों से दो शिक्षिकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। बताया गया है कि जिन विद्यालयों से शिक्षक भेजे गए हैं वहां भी अभिभावक नाराज हो गए हैं। देर सबेर वहां भी आंदोलन शुरू हो जाए तो आश्चर्य नहीं।
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इधर जीआईसी जौरासी, जीआईसी महाकालश्ेवर, जीआईसी गैरखेत और जीजीआईसी मासी में बच्चों के अभिभावक आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं जबकि जीआईसी चौखुटिया, जीजीआईसी मासी, जीआईसी कलरौं, जीआईसी तड़ागताल और योगसैंण आदि में भी आंदोलन की स्थिति बन रही है। असल में सरकारों की गलत नीतियों के चलते प्रदेश में स्वास्थ्य की तरह शिक्षा व्यवस्था भी बदहाली के कगार पर है।
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पिछले साल की बात है जब स्कूली बैग में किताबों का भार कम न होने से परेशान महाराष्ट्र के एक स्कूल के बच्चे कहीं सुनवाई नही होने पर सीधे मुंबई प्रेस क्लब पहुंच गए थे। बच्चों ने क्लब में पहुंचकर प्रेस वार्ता कर बस्ते के बोझ से शरीर पर पड़ रहे कुप्रभावों पर खुलकर बात रखी थी। यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रही इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने स्कूली बस्तों का भार कम करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया।
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इधर अपने प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी से आंदोलनों की बाढ़ आनी तय है। जीआईसी मासी के परेशान छात्रों ने चारों ओर से निराश होने के बाद हाइकोर्ट के मुख्य न्याधीश को पत्र लिखकर प्रवक्ताओं की नियुक्ति की मांग की। इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और तुरंत ही दो विद्यालयों से दो शिक्षिकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। बताया गया है कि जिन विद्यालयों से शिक्षक भेजे गए हैं वहां भी अभिभावक नाराज हो गए हैं। देर सबेर वहां भी आंदोलन शुरू हो जाए तो आश्चर्य नहीं।
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इधर जीआईसी जौरासी, जीआईसी महाकालश्ेवर, जीआईसी गैरखेत और जीजीआईसी मासी में बच्चों के अभिभावक आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं जबकि जीआईसी चौखुटिया, जीजीआईसी मासी, जीआईसी कलरौं, जीआईसी तड़ागताल और योगसैंण आदि में भी आंदोलन की स्थिति बन रही है। असल में सरकारों की गलत नीतियों के चलते प्रदेश में स्वास्थ्य की तरह शिक्षा व्यवस्था भी बदहाली के कगार पर है।