{"_id":"5c06b060bdec2241c17131a4","slug":"111543942240-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर के अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराना चुनौतीपूर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर के अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराना चुनौतीपूर्ण
Updated Tue, 04 Dec 2018 10:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। निकाय चुनाव के बाद नया नगर पालिका बोर्ड गठित हो गया है, लेकिन पालिका की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से नए बोर्ड के समक्ष शहर में अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा कराना चुनौतीपूर्ण है। करीब सोलह साल से सीवर लाइन अधूरी है। ट्रक स्टैंड, टाउन हाल, अंडर ग्राउंड कूड़ेदान, नए पार्किंग स्थल बनाने, ट्रंचिंग ग्राउंड जैसे विकास कार्य शहर की प्रमुख जरूरत है।
शहर से निकलने वाले कूड़े निस्तारण के लिए अब तक ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं बन सका है। शहर का कूड़ा पिथौरागढ़ मार्ग पर मृग बिहार से कुछ दूरी पर सड़क किनारे डाला जाता है। पालिका ने यहां पर ट्रंचिंग ग्राउंड प्रस्तावित किया है, लेकिन अब तक वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिलने से ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं बन सका है।
मालरोड में टम्टा धर्मशाला के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक करोड़ और तत्कालीन पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने पचास लाख रुपये देने की घोषणा की थी, यह पैसा भी पालिका को नहीं मिला है। पंचधारा में ट्रक स्टैंड और बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण भी लंबे समय बाद नहीं हो सका है। शहर में कूड़ेदान भी जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। कूड़ेदान क्षतिग्रस्त होने से मार्गों में कूड़ा फैला रहता है एक करोड़ रुपये की लागत से पालिका परिषद ने शहर में 15 स्थानों पर अंडर ग्राउंड कूड़ेदान बनाने की योजना बनाई थी, यह प्रस्ताव भी शासन स्तर पर लटका हुआ है।
विज्ञापन
सीवर लाइन शहर की प्रमुख समस्या है। 16 साल से अल्मोड़ा नगर में सीवर लाइन अधूरी है। एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन डाली जा सकी है। पिछले तेरह साल से शेष कार्य के लिए बजट नहीं मिला है और काम पूरा नहीं हुआ है। वहीं शहर में वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन पर्याप्त पार्किंग स्थल नहीं हैं। शहर में नए पार्किंग स्थल बनाने की जरुरत है।
विज्ञापन
शहर से निकलने वाले कूड़े निस्तारण के लिए अब तक ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं बन सका है। शहर का कूड़ा पिथौरागढ़ मार्ग पर मृग बिहार से कुछ दूरी पर सड़क किनारे डाला जाता है। पालिका ने यहां पर ट्रंचिंग ग्राउंड प्रस्तावित किया है, लेकिन अब तक वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिलने से ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं बन सका है।
विज्ञापन
मालरोड में टम्टा धर्मशाला के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक करोड़ और तत्कालीन पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने पचास लाख रुपये देने की घोषणा की थी, यह पैसा भी पालिका को नहीं मिला है। पंचधारा में ट्रक स्टैंड और बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण भी लंबे समय बाद नहीं हो सका है। शहर में कूड़ेदान भी जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। कूड़ेदान क्षतिग्रस्त होने से मार्गों में कूड़ा फैला रहता है एक करोड़ रुपये की लागत से पालिका परिषद ने शहर में 15 स्थानों पर अंडर ग्राउंड कूड़ेदान बनाने की योजना बनाई थी, यह प्रस्ताव भी शासन स्तर पर लटका हुआ है।
विज्ञापन
सीवर लाइन शहर की प्रमुख समस्या है। 16 साल से अल्मोड़ा नगर में सीवर लाइन अधूरी है। एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन डाली जा सकी है। पिछले तेरह साल से शेष कार्य के लिए बजट नहीं मिला है और काम पूरा नहीं हुआ है। वहीं शहर में वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन पर्याप्त पार्किंग स्थल नहीं हैं। शहर में नए पार्किंग स्थल बनाने की जरुरत है।