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तीन माह से बारिश नहीं होने से खेती पर संकट
Updated Fri, 12 Jan 2018 10:53 PM IST
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अल्मोड़ा। पिछले तीन महीने से बारिश नहीं होने से खेती पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। खासकर गेहूं, जौ, मटर, आलू समेत दलहनी और तिलहनी फसलों की उत्पादन पर अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। कृषि विभाग ने नुकसान के आकलन के लिए तहसील और जिला स्तर पर टीमें गठित करके जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
जिले में 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाती है। जिले के सोमेश्वर, धौलादेवी, भैंसियाछाना ब्लॉक के अलावा रानीखेत, चौखुटिया, सल्ट, भिकियासैंण आदि क्षेत्रों में गेहूं, मटर, आलू, सरसों आदि फसलों की काफी अच्छी पैदावार होती है।
गेहूं, जौ, मटर, आलू, दलहनी मसूर, तिलहनी फसल राई, सरसों की जिले के विभिन्न स्थानों में प्रचुर मात्रा में उत्पादित होती है, लेकिन काफी समय से बारिश नहीं होने की वजह से इन फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
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खास तौर पर उपराऊ इलाके में जहां फसलें पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं, वहां फसलों का बढ़ना रुक गया है। कृषि विभाग का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हालात और खराब हो सकते हैं।
इधर मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेती पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नुकसान के आकलन के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि भूमि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी के अलावा तहसील स्तर पर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।
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जिले में 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाती है। जिले के सोमेश्वर, धौलादेवी, भैंसियाछाना ब्लॉक के अलावा रानीखेत, चौखुटिया, सल्ट, भिकियासैंण आदि क्षेत्रों में गेहूं, मटर, आलू, सरसों आदि फसलों की काफी अच्छी पैदावार होती है।
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गेहूं, जौ, मटर, आलू, दलहनी मसूर, तिलहनी फसल राई, सरसों की जिले के विभिन्न स्थानों में प्रचुर मात्रा में उत्पादित होती है, लेकिन काफी समय से बारिश नहीं होने की वजह से इन फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
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खास तौर पर उपराऊ इलाके में जहां फसलें पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं, वहां फसलों का बढ़ना रुक गया है। कृषि विभाग का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हालात और खराब हो सकते हैं।
इधर मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेती पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। नुकसान के आकलन के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि भूमि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी के अलावा तहसील स्तर पर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।