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कहीं उत्तराखंड में भाजपा की सरकार न बनवा दे केंद्र, कांग्रेस में हड़कंप

Thu, 21 Apr 2016 09:15 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 21 Apr 2016 09:15 AM IST
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after president rule bjp can be rule in uttarakhand
पीएम मोदी - फोटो : pti

नैनीताल हाईकोर्ट के राष्ट्रपति शासन पर रुख को देखते हुए अब कांग्रेस को यह चिंता भी सताने लगी है कि केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन हटाकर भाजपा को उत्तराखंड में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकती है।

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इसी मुद्दे पर देर शाम कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने पीडीएफ नेता मंत्री प्रसाद नैथानी को साथ में लेकर राज्यपाल डा. कृष्णकांत पाल से मुलाकात की। कांग्रेस का मानना है कि राष्ट्रपति शासन को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट के रुख और केंद्र में राष्ट्रपति शासन के औचित्य को सिद्ध करने के लिए जरूरी बहुमत नहीं होने से केंद्र की भाजपा सरकार दबाव में है।
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ऐसे में इस बात की भी तैयारी की जा रही है कि विधानसभा को भंग कर प्रदेश में भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। इस तरह की चर्चा बुधवार को शाम होते-होते तेजी से उठी तो कांग्रेस के भी कान खड़े हो गए। आनन फानन में बुलाई गई प्रेस वार्ता में किशोर ने कहा कि ऐसे किसी भी कदम का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी।

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उत्तराखंड को अशांत करने की जिम्मेदारी केंद्र पर

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संबोधित करते किशोर उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला

किशोर ने कहा कि यह उत्तराखंड के साथ खिलवाड़ होगा। पहले केंद्र ने प्रदेश की निर्वाचित सरकार के बहुमत साबित करने से ठीक पहले ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। अब राष्ट्रपति शासन हटाकर भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है।

यह तब है जबकि कांग्रेस पहले ही बहुमत साबित करने का मौका देने का आग्रह कर चुकी है। किशोर के मुताबिक अगर केंद्र की ओर से इस तरह का कोई कदम उठाया गया तो पूरे उत्तराखंड को अशांत करने की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार और भाजपा पर होगी।

नौ कांग्रेसी विधायकों की सदस्यता समाप्त होने के बाद भी कांग्रेस इस समय सबसे बड़ा दल है। राज्यपाल से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में विधायक दिनेश अग्रवाल, सरिता आर्य और पीडीएफ के मंत्री प्रसाद नैथानी शामिल ने थे। इन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का हस्ताक्षर युक्त पत्र राज्यपाल को सौंपा।

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