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बीस दिन बाद मिली स्वास्थ्य सेवाएं

Tue, 16 Jul 2013 11:06 AM IST
अरुणेश पठानिया
अरुणेश पठानिया Updated Tue, 16 Jul 2013 11:06 AM IST
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after 20 days health services reached

आपदा प्रभावित सैंकड़ों गांवों तक स्वास्थ्य सहूलियतें नहीं पहुंच पाई हैं। आपदा के बीस दिन के बाद स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बनाने के लिए मोबाइल हेल्थ टीमों का गठन याद आया है। संक्रामक रोगों का संकट बरकरार है।

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डायरिया ने तीन को लील लिया है। शिविर भी अपने डाक्टरों से अधिक केंद्र के विशेषज्ञों के भरोसे चल रहे हैं।  केंद्र से स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में दवाएं, क्लोरीन गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर मिला है। लेकिन प्रभावित क्षेत्रों तक उसे पहुंचाने की रफ्तार बेहद धीमी है।
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8 जुलाई को मोबाइल टीमें गठित की
17 जून को आई आपदा के बाद 8 जुलाई को मोबाइल टीमें गठित की गई। स्वास्थ्य महकमे ने पहले पेयजल और ग्राम्य विकास विभाग के साथ मिलकर संयुक्त योजना बनाने में देरी की। अब तालमेल नहीं बैठ रहा है। गर्भवती महिलाओं की ट्रेकिंग कर उनके सुरक्षित प्रसव में 108 आपदा केंद्र का सहयोग लिया जा रहा है।

आपदा के दौरान लगभग 15 करोड़ के ढांचागत नुकसान और प्रभावित योजनाओं के लिए 116 करोड़ का प्लान केंद्र को एनआरएचएम में भेजा गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रभावित जनपदों में 30 हजार आपदा प्रभावितों की ओपीडी हुई है, जिसमें 1171 गंभीर हालत में होने के कारण भर्ती हैं।


कब देते रहेंगे डाक्टरों की कमी की दुहाई
डाक्टरों की कमी की बात महकमे के अधिकारी से लेकर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी दे रहे हैं। इस तथ्य को नाकारा भी नहीं जा सकता है कि 50 फीसदी डाक्टरों के पद रिक्त हैं। इसके लिए भी सरकार ही दोषी है। मैदानों के साथ पहाड़ों में भी डाक्टरों को तैनात करने की ठोस स्थानांतरण नीति मंत्री स्तर पर लटकी है।

विभाग में डाक्टरों के 50 फीसदी पद खाली हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में हमने विभाग और केंद्र सहित अन्य संस्थाओं के ढ़ाई सौ डाक्टर अतिरिक्त तैनात किये हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को हर गांव तक पहुंचाने की प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, स्वास्थ्य मंत्री

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