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जब भाजपा उम्मीदवार का स्वागत गोबर से हुआ!

Mon, 21 Apr 2014 11:38 AM IST
रोहित घोष/बीबीसी संवाददाता, कानपुर
रोहित घोष/बीबीसी संवाददाता, कानपुर Updated Mon, 21 Apr 2014 11:38 AM IST
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When cowdung thrown kanpur bjp cadidate

इस लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कुछ प्रत्याशियों पर स्याही और अंडे कई बार फेंके गए हैं, जबकि चुनाव प्रचार अभी ख़त्म नहीं हुआ है। लेकिन 1999 में कानपुर में आम चुनाव में प्रचार के दौरान गोबर चला था।

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1999 में कानपुर के सांसद और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जगत वीर सिंह द्रोण पर गोबर फेंका गया था। वर्तमान में द्रोण कानपुर के मेयर हैं।

कानपुर की संसदीय सीट के लिए उन्होंने पहला चुनाव 1989 में लड़ा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की प्रत्याशी सुभाषिनी अली से हार गए। 1991 के चुनाव में वह फिर खड़े हुए और कानपुर से सांसद चुने गए। उसके बाद 1996 और 1998 के चुनावों में भी द्रोण कानपुर से विजयी हुए।

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राष्ट्रीय बनाम स्थानीय मुद्दे

When cowdung thrown kanpur bjp cadidate

हर चुनाव में द्रोण को मिलने वाले वोटों की संख्या में भारी वृद्धि हुई और जीत का अंतर भी बढ़ा। पर 1999 के चुनाव में साफ़ छवि वाले द्रोण कांग्रेस के प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल से हार गए।

1999 में कानपुर के एक प्रमुख हिंदी दैनिक के मुख्य संवाददाता के पद पर कार्यरत रहे डॉ रमेश वर्मा कहते हैं, "1999 के चुनाव में द्रोण के ऊपर गोबर फेंका गया था।" उन्होंने बताया, "द्रोण सघन जनसंपर्क अभियान के दौरान घर-घर जा कर वोट मांग रहे थे। इस दौरान उन पर कई जगह गोबर फेंका गया था।"

आखिर क्यों फेंका गया गोबर?

When cowdung thrown kanpur bjp cadidate

कानपुर में कभी भी चुनाव के दौरान किसी प्रत्याशी को अपमानित नहीं किया गया था। ऐसे में क्या कारण था कि द्रोण के ऊपर गोबर फेंका जा रहा था?

डॉ वर्मा कहते हैं, "द्रोण 1999 में कानपुर के सांसद थे। पर उनकी सोच राष्ट्रीय थी। वह राष्ट्रीय मुद्दों पर ज़्यादा बात करते थे। उन्होंने जब मोहल्लों में जाना शुरू किया तो लोगों ने उनके सामने स्थानीय मुद्दे रखे- जैसे बंद नाली, कूड़े के ढेर, टूटी सड़कें। द्रोण ने कहा ये सब स्थानीय मुद्दे हैं- अपने सभासद या विधायक से बात करिए। लोगों का गुस्सा फूट गया। लोगों ने द्रोण के ऊपर गोबर फेंकना शुरू कर दिया।"

वह कहते हैं, "द्रोण चाहे न मानें पर मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि उन पर गोबर फेंका गया था। इस चुनाव में स्याही और अंडे प्रत्याशियों के मुँह पर फेंका जा रहा है। हालांकि द्रोण के मुँह पर कभी गोबर नहीं फेंका गया लेकिन हां उनके कुर्ते पर गोबर के छींटे मैंने देखे हैं।"

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'मेरी ही पार्टी ने की मुझे हराने की कोशिश'

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गोबर फेंकने की बात को द्रोण पूरी तरह से नकारते हैं। द्रोण ने बीबीसी को बताया, "1999 के चुनाव में मेरे ऊपर एक बार भी गोबर नहीं फेंका गया।

मेरी ही पार्टी के कुछ लोग मुझे हराना चाहते थे। इसलिए मेरे खिलाफ इस तरह का दुष्प्रचार किया गया और अखबारों में गलत खबरें छपवाई गईं।"

कानपुर में भाजपा के जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र मैथानी कहते हैं, "मुझे यह बात कहने में कोई संकोच नहीं है कि 1999 का चुनाव हम आपसी मतभेद और भितरघात की वजह से हार गए।"

द्रोण इस बात को भी नकारते हैं कि उन्होंने स्थानीय मुद्दों को अनदेखा किया। उन्होंने कहा, "मैं जब तक सांसद रहा, हफ्ते में तीन दिन तीन अलग-अलग जगहों पर लोगों से मिलता था। चाहे कितनी भी रात हो जाए मैं हर आदमी की बात सुनकर ही कुर्सी से खड़ा होता था।"

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