दिल्ली में कम होगी यूपी की हनक
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जनता दल (यूनाइटेड) यूपीए में शामिल हुआ तो दिल्ली में यूपी की हनक कम होगी और बिहार का दबदबा बढ़ जाएगा। मुलायम सिंह और मायावती के बजाए नीतीश कुमार और शरद यादव का पलड़ा भारी हो जाएगा।
ऐसा हुआ तो पांच राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा उलटफेर होगा।
यूपी की सियासत में मजबूत दखल रखने वाली सपा और बसपा यूपीए में शामिल नहीं है लेकिन केंद्र सरकार उनकी बैसाखियों पर निर्भर है।
कई ऐसे मौके आए जब इन दोनों दलों ने केंद्र सरकार को संकट से उबारा। यही वजह है कि दिल्ली के दरबार में मुलायम सिंह यादव और मायावती का काफी वजनदार बने हुए हैं।
कई मुद्दों पर वे सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब रहे हैं। बदले हालात में दिल्ली के सियासी समीकरणों में बदलाव आ सकता है।
राहुल गांधी और मनमोहन सिंह ने जिस तरह नीतीश कुमार की तारीफ की है और जद (यू) ने कांग्रेस के प्रति जिस तरह का रुख दिखाया है, उससे साफ है कि यूपीए का कुनबा बढ़ने जा रहा है।
जद (यू) को इंतजार सिर्फ बिहार को विशेष दर्जा देने के ऐलान या ठोस आश्वासन का है। जद (यू) के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने संकेत दिए हैं कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर जद (यू) यूपीए में शामिल हो सकता है। यदि जद (यू) यूपीए का हिस्सा बना तो दिल्ली में मायावती और मुलायम सिंह की तवज्जो घटेगी।
यानी दिल्ली में यूपी की हनक कम होगी। इसके उलट बिहार का दबदबा बढ़ेगा। जद (यू) के 20 सांसद है। कांग्रेस से दोस्ती हुई तो कांग्रेस को दोहरा लाभ मिलेगा।
संसद के समीकरण साधने में आसानी होगी और हमलावर घटेंगे। ऐसे में हो सकता है कि उत्तरप्रदेश की सपा सरकार केंद्र पर दबाव बनाकर विशेष मदद लेने से वंचित रह सकती है।