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राजनीतिक विरासत की पांच कहानियां: दो के पति विधायक रहते मारे गए, तीन ने मुजरिम पतियों की विरासत संभाली 

Sun, 27 Feb 2022 07:16 AM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sun, 27 Feb 2022 07:16 AM IST
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सार
उत्तर प्रदेश में आज पांचवें चरण के लिए मतदान चल रहा है। 12 जिलों की 61 सीटों पर कुल 693 प्रत्याशी मैदान में हैं। सबसे ज्यादा प्रयागराज की प्रतापपुर सीट से 25 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। कौशांबी की सिराथू सीट पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समेत 18 उम्मीदवार हैं। 
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UP Polls Phase 5 Five Candidate Contesting to Secure the Legacy Handling Criminal Husbands Politics
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं राजनीति में अपराध और परिवारवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। कई नेताओं की छवि आपराधिक होती है। यूपी विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में 693 प्रत्याशी दावेदारी कर रहे हैं, इनमें 27% पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसी राजनीति के चलते कई नेताओं ने अपनी जान तक गंवाई है। किसी ने अपने पूरे परिवार को खो दिया, तो किसी का पति जेल में सजा काट रहा है। आज हम आपको ऐसे ही पांच प्रत्याशियों की कहानी बता रहे हैं... 

पहली और दूसरी कहानी आपस में जुड़ी : उस विधायक की कहानी जिसे बीच सड़क गोलियों से भून दिया गया

सपा प्रत्याशी विजमा यादव अपनी पत्नी जवाहर पंडित की फोटो और नीलम करवरिया अपने पति उदयभान करवरिया के साथ।
सपा प्रत्याशी विजमा यादव अपनी पत्नी जवाहर पंडित की फोटो और नीलम करवरिया अपने पति उदयभान करवरिया के साथ। - फोटो : अमर उजाला
पहली कहानी में दो कहानियां आपस में जुड़ी हैं। एक प्रतापपुर सीट से जुड़ी है तो दूसरी मेजा सीट की प्रत्याशी से जुड़ी। प्रयागराज की प्रतापपुर सीट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी विजमा यादव हैं। विजमा के पति जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित 1993 में सपा के टिकट पर झूंसी सीट से विधायक बने थे। उन दिनों प्रयागराज और आसपास बालू खनन का काम जगत नारायण करवरिया के परिवार के पास था। उनके बेटे कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया, सूरजभान करवरिया बालू के ठेके के साथ कालीन, फर्नीचर और रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े थे। बालू के ठेके को लेकर जवाहर और करवरिया परिवार में अनबन हो गई। देखते ही देखते ये अनबन दुश्मनी में बदल गई।

13 अगस्त 1996 को जवाहर अपनी कार से पार्टी दफ्तर से अपने घर लौट रहे थे। इसी बीच, प्रयागराज के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस में एक गाड़ी ने ओवरटेक करके जवाहर की कार रोकी। गाड़ी से निकले लोग एके-47, राइफल और रिवॉल्वर लिए हुए थे। सभी ने जवाहर पर हमला कर दिया। ये पहली बार था, जब प्रयागराज में किसी  पर एके-47 से हमला हुआ था। इस हत्या का आरोप कपिलमुनि करवारिया, उदयभान करवारिया, सूरजभान करवारिया और दो अन्य लोगों पर लगा। एक आरोपी की घटना के कुछ समय बाद मौत हो गई। मामला लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 23 साल तक चला। 4 नवंबर 2019 को अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए IPC की धारा 302, 307, 147, 148, 149 और क्रिमिनल लॉ अमेंमेंट ऐक्ट की धारा 7 के तहत आजीवन कैद की सजा सुनाई। सभी भाई अभी जेल में बंद हैं। 

जवाहर पंडित के हत्या के आरोपों के बीच, करवरिया परिवार ने राजनीति में पैर जमा लिया। सबसे बड़े कपिल मुनि करवरिया बसपा से सांसद रहे हैं। वहीं, उदयभान करवरिया दो बार भाजपा से विधायक चुने गए। सूरजभान करवारिया मायावती के कार्यकाल में एमएलसी रहे। अब, उदयभान की पत्नी  नीलम करवरिया परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाल रही हैं। नीलम मेजा से इस बार भी भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। 

दूसरी तरफ जवाहर पंडित की हत्या के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी विजमा ने संभाली। वह 1996, 2002 और 2012 के चुनाव में विधायक चुनी गईं। इस बार भी विजमा प्रतापपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनकी बेटी ज्योति 2016 में फूलपुर से ब्लॉक प्रमुख बनी थीं। हालांकि एक साल बाद ही अविश्वास प्रस्ताव की वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। 

3. फिल्मी अंदाज में विधायक को मार डाला, आरोप सांसद पर लगा

शादी के दस दिन बाद ही पूजा पाल के विधायक पति राजू पाल को बदमाशों ने गोलियों से भूल डाला था।
शादी के दस दिन बाद ही पूजा पाल के विधायक पति राजू पाल को बदमाशों ने गोलियों से भूल डाला था। - फोटो : अमर उजाला
ये कहानी भी प्रयागराज से ही है। यहां 25 जनवरी 2005 को इलाहाबाद पश्चिमी के बसपा विधायक राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ये हत्या फिल्मी अंदाज में की गई थी। राजू उस वक्त अपनी कार से प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल से अपने घर की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान एक गाड़ी ने राजू पाल की गाड़ी को ओवरटेक करके बीच में खड़ा कर दिया। जैसे ही राजू पाल की गाड़ी रुकी, सामने से बदमाशों ने फायर झोंक दिए। विधायक और उनके साथ गाड़ी में बैठे दो और लोगों की मौत हो गई। 

घटना से 10 दिन पहले ही राजू पाल की पूजा पाल से शादी हुई थी। पूजा ने पति की हत्या के मामले में तत्कालीन सांसद और बाहुबली अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ और तीन अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। विधायक की हत्या के बाद पूरे प्रयागराज में बवाल शुरू हो गया। इसे शांत करने के लिए पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया। 10 दिन तक प्रयागराज में कर्फ्यू लगा रहा। 

दूसरी ओर पति की हत्या के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने पूजा को टिकट दिया। उपचुनाव में पूजा को हार मिली, लेकिन इसके बाद 2007 और फिर 2012 में वह जीत गईं। इस बार पूजा समाजवादी पार्टी के टिकट पर कौशांबी जिले की चायल सीट से चुनाव लड़ रही हैं। 
 

4. पूर्व मंत्री को दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद, पत्नी चुनाव मैदान में

दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा गायत्री प्रजापति और उनकी पत्नी
दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा गायत्री प्रजापति और उनकी पत्नी - फोटो : अमर उजाला
गायत्री प्रसाद प्रजापति। ये नाम काफी चर्चित है। गायत्री प्रजापति अखिलेश सरकार में मंत्री रहे हैं। मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं। गायत्री और उसके साथियों पर एक नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप का आरोप लगा था। 12 नवंबर 2021 को गैंग रेप के इस मामले में गायत्री प्रजापति को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। सपा ने इस बार उनकी पत्नी महराजी को अमेठी सीट से मैदान में उतारा है। गायत्री प्रजापति की पत्नी महराजी प्रतापति के खिलाफ भाजपा से राजघराने परिवार से डॉ. संजय सिंह मैदान में हैं।  

5. फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में दोषी पति सजा काट रहा, पत्नी को भाजपा ने दिया टिकट

आरती तिवारी और उनके पति खब्बू तिवारी।
आरती तिवारी और उनके पति खब्बू तिवारी। - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या के गोसाईंगंज सीट से इस बार मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। यहां से भाजपा ने 2017 में पार्टी को जीत दिलाने वाले खब्बृ तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को टिकट दिया है। आरती अपने पति की विरासत संभाल रही हैं। खब्बू को फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में विशेष अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई है। खब्बू की विधायकी भी चली गई और वह इस वक्त सजा काट रहे हैं। आरती के खिलाफ बाहुबली अभय सिंह को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है।
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