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'हाईकोर्ट की दोनों पीठों को लड़वाना चाहती है सरकार'
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Tue, 28 May 2013 01:51 AM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खनन संबंधी एक मामले में लखनऊ बेंच के आदेश को स्पष्ट करने की अर्जी इलाहाबाद बेंच में दायर किए जाने पर राज्य सरकार के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ऐसी अर्जियां दायर कर हाईकोर्ट की पीठों (बेंचेज) के बीच सद्भावपूर्ण संबंधों को खत्म कर दोनों को लड़वाना चाहती है।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने यह तल्ख टिप्पणी मेसर्स सैंड एण्ड स्टोन 13 प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से दायर रिट पर दिए गए आदेश में की।
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याची की तरफ से अदालत को बताया गया कि एक मामले में पिछले 12 दिसंबर को दिए गए लखनऊ बेंच के आदेश के स्पष्टीकरण की अर्जी राज्य सरकार ने इलाहाबाद बेंच के समक्ष पेश की है।
कोर्ट ने इस तरह की अर्जी दायर किए जाने को अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग कर न्याय प्रशासन में दखल देने के समान करार दिया है।
कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत स्पष्टीकरण अर्जी सिर्फ उसी बेंच के समक्ष दायर की जा सकती है जिसने आदेश पारित किया हो या फिर उच्च अदालत में इसे चुनौती दी जा सकती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती दी जा सकती थी।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने के बजाए इस तरह की अर्जी दायर किए जाने से ऐसा लगता है कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय की पीठों के बीच मधुर रिश्तों को बिगाड़ना चाहती है।
अदालत ने मामले में पक्षकार, अफसरों-भूविज्ञान व खनन के सचिव, निदेशक समेत सहारनपुर के डीएम/जिला खनन अधिकारी को नोटिस जारी कर कारण बताने को कहा कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
51 अवमानना मामलों में गैर जमानती वारंट
कोर्ट ने आदेश में राज्य सरकार की कार्य प्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की कि संभवत: अनुचित राय दिए जाने पर हाल ही में अवमानना के 51 मामलों में अदालत को गैर जमानती वारंट जारी करने पड़े और कई अफसरों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश भी हुए।
सीएम के समक्ष रखें आदेश
कोर्ट ने कहा कि इसके मद्देनजर राज्य सरकार की संबंधित सचिव अनीता सिंह को यह निर्देश दिया जाना उपयुक्त होगा कि वह इस आदेश को मुख्यमंत्री के समक्ष परिशीलन एवं ऐसी अर्जियां दाखिल किए जाने के चलन को रोकने को समुचित कार्रवाई किए जाने के लिए पेश करें।
सहारनपुर के खनन अफसर को नोटिस
अदालत ने सहारनपुर के खनन अफसर एसके दास को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने खनन अफसर को 29 मई को कोर्ट में पेशी सुनिश्चित कराने के निर्देश सहारनपुर के एसपी को दिए है। इसी अफसर ने स्पष्टीकरण की अर्जी के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया है।
प्रमुख सचिव विधि कहां, सरकार को नहीं पता
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खनन संबंधी एक मामले में राज्य सरकार द्वारा लखनऊ बेंच के एक आदेश के स्पष्टीकरण की अर्जी इलाहाबाद बेंच के समक्ष दाखिल किए जाने केमामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।
कोर्ट ने सूबे के प्रमुख सचिव खनन व प्रमुख सचिव विधि को सोमवार को दोपहर 12 बजे अदालत में पेश होने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य सरकार व सरकारी अमले की कार्यशैली के प्रति तल्ख टिप्पणियां कीं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ के इस आदेश के तहत प्रमुख सचिव खनन जीवेश नंदन तो कोर्ट में पेश हुए लेकिन प्रमुख सचिव (विधि) एसके पांडेय न तो पेश हुए और न ही उनकी तरफ से हाजिरी माफी की अर्जी दाखिल की गई।
सिर्फ अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने अदालत से मौखिक अनुरोध किया कि वह सूचना के लिए प्रमुख सचिव विधि कहां है, यह पता करने की कोशिश करेंगी।
अदालत ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि प्रमुख सचिव विधि कहां है, इसकी बाबत राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं है। इससे लगता है कि वह (प्रमुख सचिव विधि) स्पष्टीकरण अर्जी दाखिल किए जाने वाले प्रस्ताव पर कानूनी राय वाली फाइल की पेशी ‘अवॉइड’ कर रहे हैं।
कोर्ट ने इस आदेश को प्रमुख सचिव विधि पर तामील कराने समेत उन्हें 29 मई को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही ताकीद की है कि इसकी अवज्ञा होने पर कोर्ट गैरजमानती वारंटी जारी कर सकती है।