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जरूरत पड़ने पर टुंडा करता था महिलाओं का यह खास इस्तेमाल

Wed, 28 Aug 2013 12:01 AM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Wed, 28 Aug 2013 12:01 AM IST
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tunda used woman squad

आतंकी टुंडा ने महिलाओं का दस्ता भी बना रखा था। यह महिलाएं जरूरत पड़ने पर उसका कवच बनती थीं तो ‘आपरेशन’ में उसकी मददगार के रूप में खड़ी होती थीं।

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जब भी पुलिस ने उसे घेरा तो यही महिलाएं कभी उसकी बेटी बनकर तो कभी खाला बनकर मदद करतीं। यह खुलासा किया है पूर्व डीजीपी और एसटीएफ के प्रभारी रह चुके विक्रम सिंह ने।
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उन्होंने बताया कि कई बार सटीक जानकारी होने के बावजूद पुलिस देखती रह जाती थी और वह धोखा देकर निकल भागा।

एसटीएफ के निशाने पर जो टाप फाइव क्रिमिनल थे उनमें टुंडा चौथे नंबर पर था। उस समय विक्रम सिंह एसटीएफ के इंचार्ज थे। उन्होंने जो मुखबिरों से सूचना जुटाई थी उसके अनुसार टुंडा के साथ महिलाओं का भी एक बड़ा घेरा काम करता था।
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बताते हैं: एक बार जब वह फंसा तो एक महिला उसे लेकर बाहर निकली...टुंडा खांसते हुए बीमार बनकर निकला और महिला ने कहा मेरे अब्बू की तबियत खराब है दिखाने जा रही हूं। नाटक इतना जबर्दस्त होता कि शक न होने देते।

इन्हीं महिलाओं के पास बम और हथियार छुपा देता था जिससे उनकी चेकिंग उतनी गहराई से नहीं होती। वर्ष 1998 से 2001 तक एसटीएफ के आईजी रहे पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बताते हैं कि एक बार खुफिया जानकारी मिली थी कि बांग्लादेश के दुर्दांत आतंकी संगठन हूजी से टुंडा के संपर्क हैं।


वह बंगलादेश जा भी चुका है। हूजी के जरिए ही जाली करेंसी भारत में पहुंचाई जाती थी। टुंडा का नेटवर्क भी फेक करेंसी को मार्केट में सप्लाई करता था।

इस नेटवर्क ने कुछ स्थानीय अपराधियों को भी अपने साथ जोड़ लिया था। वैसे तो टुंडा की तीन पत्नियां थीं। लेकिन दिल्ली और गुजरात में भी कई महिलाओं का संपर्क सामने आया था।

सुरक्षा में चूक न की जाए
मुरादाबाद। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं कि टुंडा बहुत ही शातिर है। वह भागने की कोशिश भी कर सकता है। लिहाजा उसकी सुरक्षा मजबूत रहनी चाहिए। पेशी पर लाने व ले जाने के लिए स्पेशल दस्ता लगाया जाए। जेल की जिस भी बैरक में उसे रखा जाए वहां खास निगहबानी होनी चाहिए।

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