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चीन में नहीं, मुरादाबाद में है सबसे छोटी ‘भगवत गीता’
तरुण पाराशर/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sun, 09 Feb 2014 08:16 AM IST
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यूपी में मुरादाबाद के राजकीय पुस्तकालय में रखी है दो इंच की गीता। दावा है कि यह भारत की सबसे छोटी गीता है। 58 साल पुराना यह धार्मिक ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित और पठनीय स्थिति में है।
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चाइना ने पिछले दिनों सबसे छोटी गीता के दावे के साथ पुस्तक निकाली थी। लेकिन भारत में 1956 में ही उससे आधे आकार की पुस्तक प्रकाशित हो चुकी थी। सबसे बड़ी खास बात कि इसमें छपे श्लोक को पढ़ने में किसी प्रकार दिक्कत नहीं होती।
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भारतीय प्रेस मुंबई ने 1956 में यह छोटी भगवत गीता प्रकाशित की थी। दो इंच की पुस्तक में 100 पेजों में संपूर्ण गीता समाई हुई है। प्रेस का दावा था कि यह भारत की सबसे छोटी श्रीमद भगवत गीता है। इसकी केवल 100 ही प्रतियां प्रकाशित की गई थीं। जिन्हें भारत के अलग अलग पुस्तकालयों में रखा गया।
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इसके बाद कोई संस्करण प्रकाशित नहीं किया। राजकीय पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष कालका प्रसाद ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार ये पुस्तकें उत्तर प्रदेश में दो या तीन ही प्रतियां हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भी इसकी एक प्रति है। इनमें से एक मुरादाबाद राजकीय पुस्तकालय में है।
उन्होंने बताया कि इसे सुरक्षित रखना अपने आप में चुनौती है। इसका आकार वैक्स माचिस से भी छोटा है। ऐतिहासिक पुस्तक होने के कारण इसका ख्याल विशेष तौर पर रखना पड़ता है।
अभी कुछ दिन पहले बाजार में सबसे छोटी गीता के दावे के साथ पुस्तक आई थी। लेकिन यह पुस्तक आकार में उससे भी आधी है। कालका प्रसाद ने बताया कि राजकीय पुस्तकालय में ढेरों पुस्तकें हैं जिनका ऐतिहासिक महत्व है। महाकवि जयशंकर प्रसाद की कामायनी की पांडुलिपि भी उपलब्ध है।