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जलता रहा नोएडा, देखती रही पुलिस
नोएडा/राकेश भट्ट
Updated Wed, 20 Feb 2013 10:39 PM IST
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हड़ताल के दौरान नोएडा में हिंसा का नंगा नाच देखकर इस बात का यकीन नहीं हो रहा था कि कानून-व्यवस्था नाम की भी कोई चीज होती है।
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शहर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से फेल था और पूरे पांच घंटे औद्योगिक क्षेत्र अराजक तत्वों के हाथों में रहा। इस दौरान सड़कों पर लूटपाट के दौरान बिखरे सामान, तोड़े गए कंप्यूटर, हर फैक्ट्री का टूटे कांच और बिखरे पत्थर और जलते वाहन भयानक तस्वीर दिखा रहे थे।
ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर भारत बंद के दौरान जिले के श्रमिकों के असंतोष व उनके बीच असामाजिक तत्वों के शामिल होने के बाद उपद्रव की सूचना जुटाने में खुफिया तंत्र पूरी तरह से नाकाम रहा।
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ट्रेड यूनियनों के साथ अधिकारियों ने मंगलवार को बैठक की औपचारिकता निभाई और उस आश्वासन को मान लिया गया, जिसमें सब कुछ शांति से होने की बात कही गई थी। फेस टू के पास स्थित भंगेल क्षेत्र में ये लोग सुबह सात बजे जुटने शुरू हुए तो पुलिस वहां तैनात नहीं दिखी। इसके बाद ये आगे बढ़े और एक-एक करके कंपनियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
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सुबह करीब 9 बजे उद्योगों पर शुरू हुए इस हमले के बाद पुलिस कंट्रोल रूम को कई उद्यमियों ने सूचना दी, लेकिन पुलिस का कहीं अता-पता नहीं था। यहां के दो सौ से अधिक उद्योगों में नामी कंपनियों मदरसन, शाही एक्सपोर्ट, हैलोनिक्स, आईपीपी, रिबॉक, फिनिश, निशा, रेट्रोपैक, अजय मेरु इलेक्ट्रिकल्स में जमकर तोड़फोड़, आगजनी व लूटपाट हुई।
करीब साढ़े दस बजे कुछ पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, पर उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। आला अधिकारियों के बीच चर्चा तो खूब हुई पर दंगा तक रुका जब दंगाइयों ने अपने मन की कर ली।
इस बीच, नोएडा इंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) ने श्रमिक संगठनों पर रासुका लगाने की मांग की है। उन्होंने न सिर्फ बृहस्पतिवार को सभी इकाइयां खोलने का फैसला लिया, बल्कि हिंसा की शिकार हुई इकाइयों को मुआवजा देने की मांग भी रखी।