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फ्रांस से लौटी भारत की एक बेशकीमती चीज
अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 21 Sep 2013 12:12 AM IST
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उत्तर प्रदेश में तीन दशक पूर्व बांदा जनपद से चोरी गई तृष्णा योगिनी की अति प्राचीन मूर्ति अब दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय की शोभा बन गई है।
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बेशकीमती और आकर्षक मूर्ति को न सिर्फ देश बल्कि विदेशी भी दिलचस्पी से देख रहे हैं। हाल ही में भारत सरकार इस मूर्ति को पेरिस (फ्रांस) से यहां लाई है।
गौरतलब है कि 6 फरवरी 1982 को तस्करों ने तत्कालीन बांदा (वर्तमान में चित्रकूट) जिले के लुखरी गांव की पहाड़ी पर स्थित मंदिर से बेहद प्राचीन और दुर्लभ तृष्णा योगिनी की मूर्ति चोरी कर ली थी। तमाम तलाश के बाद भी इसका कुछ पता नहीं चला।
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1996 में इसे लंदन में देखा गया। बाद में यह मूर्ति किसी तरह मुंबई आ गई। वर्ष 2010 में मुंबई की एक एंटिक शाप से इसे फ्रांस (पेरिस) के संग्रहकर्ता रोबर्ट ने खरीद लिया और पेरिस ले गया।
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मूर्ति का वजन लगभग 4 क्विंटल बताया गया है। यह 64 योगनियों में से एक है।
इंटैक चैप्टर बांदा के हारिस जमां खां ने बताया कि रोबर्ट के मरने के बाद उसकी पत्नी मार्टिन ने यह मूर्ति भारत को वापस लौटा देने की इच्छा जताई।
पिछले वर्ष फ्रांस गईं भारत सरकार में संस्कृति मंत्रालय सचिव को इस बात की जानकारी पेरिस में भारतीय राजदूत ने दी।
सचिव और मौजूदा विदेश मंत्री के प्रयासों से इस मूर्ति को पिछले माह दिल्ली ले आया गया है। वहां इसे राष्ट्रीय संग्रहालय (नेशनल म्यूजियम) में रखा गया है।
छह अक्तूबर तक यह मूर्ति संग्रहालय में लोगों के अवलोकनार्थ उपलब्ध रहेगी। श्री जमां ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मूर्ति की कीमत 25-30 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
उन्होंने बताया कि ऐसी मूर्तियां तत्कालीन तांत्रिक पहाड़ों पर चोरी-छिपे बनाते थे और सिद्ध किया करते थे। योगिनी देवी को ऊंच-नीच का विरोधी माना जाता है।