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नए साल से घर सा अहसास कराएगी शताब्दी एक्सप्रेस, कमरे जैसे होंगे कोच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Updated Mon, 29 Oct 2018 09:25 AM IST
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फाइल फोटो
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जावेद असलम। अगले साल से शताब्दी एक्सप्रेस का हुलिया पूरी तरह बदला नजर आएगा। शताब्दी एक्सप्रेस के कोच की अंदरूनी बनावट अंदर से घर के कमरे जैसी होगी। कोच के गेट अपने आप खुलेंगे और बंद होंगे। मनोरंजन के लिए सभी कोचों में एलईडी टीवी भी लगी होंगी। सुविधाओं से लैस देश का पहला स्वदेशी रैक जनवरी में शताब्दी एक्सप्रेस में लग जाएगा। कई कोच बनकर भी तैयार हो चुके हैं।
नई दिल्ली से हबीबगंज के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस सुपर लग्जरी कोचों से तैयार होगी। शताब्दी में अभी एचएचबी कोच (जर्मन कंपनी के लिंक हॉफमैन बुश की सहयोग से तैयार कोच) लगे हैं। जनवरी से यह कोच हट जाएंगे और शताब्दी को मेक इन इंडिया योजना के तहत इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में तैयार हो रहे पहले स्वदेशी रैक मिलेंगे। कोच आपस में जुड़े (इंटरकनेक्टेड) होंगे। सीटों के बीच अधिक गैप होगा, ताकि सफर में थकान व परेशानी महसूस न हो। साथ ही, कोच में बड़े कांच लगे होंगे।
पूरे कोच जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली सिस्टम से लैस होंगे। स्टेशनों की जानकारी भी डिस्पले होती रहेगी। इसके अलावा, पूरे कोच मुफ्त वाई-फाई से भी लैस होंगे। वहीं, कोचों में वैक्यूम बायो टॉयलेट होंगे। कोच के भीतर ही दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर रखी होंगी। यात्री जरूरत के हिसाब से सामान लेकर चल सकेंगे। देश की यह पहली शताब्दी एक्सप्रेस होगी, जिसका हुलिया पूरी तरह बदल जाएगा। इसके बाद देश में चलने वाली अन्य शताब्दी एक्सप्रेसों को यह कोच मिलेंगे।
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'रेलवे-18 के तहत शताब्दी एक्सप्रेस का हुलिया बदला जा रहा है। देखने व बैठने में यह ट्रेन पूरी तरह बदली नजर आएगी। सुविधाओं से लैस इस ट्रेन के सभी कोचों में बदलाव किया जा रहा है। जनवरी तक शताब्दी के रैक बदल जाएंगे।'
विपिन कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम, झांसी मंडल
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नई दिल्ली से हबीबगंज के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस सुपर लग्जरी कोचों से तैयार होगी। शताब्दी में अभी एचएचबी कोच (जर्मन कंपनी के लिंक हॉफमैन बुश की सहयोग से तैयार कोच) लगे हैं। जनवरी से यह कोच हट जाएंगे और शताब्दी को मेक इन इंडिया योजना के तहत इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में तैयार हो रहे पहले स्वदेशी रैक मिलेंगे। कोच आपस में जुड़े (इंटरकनेक्टेड) होंगे। सीटों के बीच अधिक गैप होगा, ताकि सफर में थकान व परेशानी महसूस न हो। साथ ही, कोच में बड़े कांच लगे होंगे।
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पूरे कोच जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली सिस्टम से लैस होंगे। स्टेशनों की जानकारी भी डिस्पले होती रहेगी। इसके अलावा, पूरे कोच मुफ्त वाई-फाई से भी लैस होंगे। वहीं, कोचों में वैक्यूम बायो टॉयलेट होंगे। कोच के भीतर ही दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर रखी होंगी। यात्री जरूरत के हिसाब से सामान लेकर चल सकेंगे। देश की यह पहली शताब्दी एक्सप्रेस होगी, जिसका हुलिया पूरी तरह बदल जाएगा। इसके बाद देश में चलने वाली अन्य शताब्दी एक्सप्रेसों को यह कोच मिलेंगे।
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'रेलवे-18 के तहत शताब्दी एक्सप्रेस का हुलिया बदला जा रहा है। देखने व बैठने में यह ट्रेन पूरी तरह बदली नजर आएगी। सुविधाओं से लैस इस ट्रेन के सभी कोचों में बदलाव किया जा रहा है। जनवरी तक शताब्दी के रैक बदल जाएंगे।'
विपिन कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम, झांसी मंडल