{"_id":"5dbedf8d8ebc3e93a9534589","slug":"sachin-pandey-shot-co-city-gunner-in-azamgarh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीओ सिटी के गनर को गोली मारकर सुर्खियों में आया था आजमगढ़ का सचिन पांडेय, अब ऐसे मिली मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीओ सिटी के गनर को गोली मारकर सुर्खियों में आया था आजमगढ़ का सचिन पांडेय, अब ऐसे मिली मौत
Sun, 03 Nov 2019 07:39 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sun, 03 Nov 2019 07:39 PM IST
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लखनऊ में एसटीएफ से मुठभेड़ में मारे गए बदमाश सचिन पांडे की फाइल फोटो और जांच करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में हुई मुठभेड़ में ढेर निजामाबाद कस्बा निवासी सचिन पांडेय 18 सितंबर 2013 की रात शहर के हर्रा की चुंगी मुहल्ले में तत्कालीन सीओ सिटी रहे शैलेष पांडेय के गनर रजनीश सिंह को गोली मारने के बाद सुर्खियों में आया। इसके नाम का सिक्का चलने लगा था। गोली से घायल सिपाही का छह साल बाद भी इलाज चल रहा है, हालत में पूरी तरह सुधार नहीं है।
इस मामले की कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गवाहों के मुकर जाने से सचिन मुकदमे से बरी हो गया था। निजामाबाद कस्बा निवासी सचिन पांडेय एक बहन और तीन भाईयों में बड़ा था। उसके पिता दिनेश पांडेय आर्मी से रिटायर हैं। साल 2011, 12 में सचिन छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देते हुए अपनी अच्छीखासी गैंग खड़ा कर लिया था।
वर्तमान समय में उसके गिरोह में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। जरायम की दुनिया में कदम रखते ही सचिन ने कोहराम मचा दिया था। गिरोह के सदस्य घटनाओं में पल्सर और अपाचे बाइक का प्रयोग कर रहे थे। जबकि पुलिस आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए थे।
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इसीक्रम में तत्कालीन सीओसिटी शैलेष पांडेय 18 सितंबर 2013 की रात शहर में गश्त कर रहे थे। हर्रा की चुंगी मुहल्ले में पल्सर सवार दो युवक खड़े थे। देर रात को पल्सर सवार युवकों को खड़ा देख सीओसिटी ने हमराही रजनीश सिंह से पूछने को कहे। जैसे ही सिपाही बदमाशों के पास पहुंचा कि दोनों भागने लगे।
इस दौरान सचिन पैदल भागा, जबकि उसका साथी शहर के बागेश्वर नगर मुहल्ला निवासी वैभव यादव उर्फ छोटू पल्सर से। सचिन के भागने पर सिपाही ने उसे दौड़ा लिया। इस दौरान सचिन ने सिपाही रजनीश पर गोली चला दी और पेट में गोली लगने से वह घायल हो गया। इस घटना के बाद सचिन का नाम चर्चा में आया।
27 जनवरी 2015 को पुलिस सचिन पांडेय का गैंग रिकार्ड में दर्ज की। उसके गैंग का नंबर डी- 16 थी। इसमें सचिन सरगना और शेष उसके एक दर्जन से अधिक सदस्यों का नाम शामिल है। सीओ के हमराही को गोली मारने के मामले में गवाहों के मुकर जाने पर वह केस से बरी हो गया था, लेकिन अन्य मामले में जेल में निरुद्ध था।
वह 15 जुलाई 2019 को कानपुर देहात जेल से जमानत पर छूटा था। काफी दिनों तक जेल में रहने की वजह से उसे रुपयों की आवश्यकता थी। अधिक से अधिक रुपये इकट्ठा करने के लिए पुन: अपराध में सक्रिय हो गया था, लेकिन रविवार को लखनऊ में उसके पाप का अंत हो गया।
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इस मामले की कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गवाहों के मुकर जाने से सचिन मुकदमे से बरी हो गया था। निजामाबाद कस्बा निवासी सचिन पांडेय एक बहन और तीन भाईयों में बड़ा था। उसके पिता दिनेश पांडेय आर्मी से रिटायर हैं। साल 2011, 12 में सचिन छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देते हुए अपनी अच्छीखासी गैंग खड़ा कर लिया था।
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वर्तमान समय में उसके गिरोह में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। जरायम की दुनिया में कदम रखते ही सचिन ने कोहराम मचा दिया था। गिरोह के सदस्य घटनाओं में पल्सर और अपाचे बाइक का प्रयोग कर रहे थे। जबकि पुलिस आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए थे।
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इसीक्रम में तत्कालीन सीओसिटी शैलेष पांडेय 18 सितंबर 2013 की रात शहर में गश्त कर रहे थे। हर्रा की चुंगी मुहल्ले में पल्सर सवार दो युवक खड़े थे। देर रात को पल्सर सवार युवकों को खड़ा देख सीओसिटी ने हमराही रजनीश सिंह से पूछने को कहे। जैसे ही सिपाही बदमाशों के पास पहुंचा कि दोनों भागने लगे।
इस दौरान सचिन पैदल भागा, जबकि उसका साथी शहर के बागेश्वर नगर मुहल्ला निवासी वैभव यादव उर्फ छोटू पल्सर से। सचिन के भागने पर सिपाही ने उसे दौड़ा लिया। इस दौरान सचिन ने सिपाही रजनीश पर गोली चला दी और पेट में गोली लगने से वह घायल हो गया। इस घटना के बाद सचिन का नाम चर्चा में आया।
27 जनवरी 2015 को पुलिस सचिन पांडेय का गैंग रिकार्ड में दर्ज की। उसके गैंग का नंबर डी- 16 थी। इसमें सचिन सरगना और शेष उसके एक दर्जन से अधिक सदस्यों का नाम शामिल है। सीओ के हमराही को गोली मारने के मामले में गवाहों के मुकर जाने पर वह केस से बरी हो गया था, लेकिन अन्य मामले में जेल में निरुद्ध था।
वह 15 जुलाई 2019 को कानपुर देहात जेल से जमानत पर छूटा था। काफी दिनों तक जेल में रहने की वजह से उसे रुपयों की आवश्यकता थी। अधिक से अधिक रुपये इकट्ठा करने के लिए पुन: अपराध में सक्रिय हो गया था, लेकिन रविवार को लखनऊ में उसके पाप का अंत हो गया।
वाट्सएप ग्रुप के जरिए जेल से करता था वसुली
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लखनऊ में ढेर हुआ एक लाख का इनामी बदमाश सचिन पांडेय और उसके गिरोह के ज्यादातर सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजवा दी। साथ ही इनकी जल्द जमानत न होने के लिए सक्रिय पैरवी करने लगे। ऐसे में सचिन पांडेय जेल के भीतर रहते हुए अपने मोबाइल से वाट्सएप का एक ग्रुप बनाया। जिसमें जिले के कई धनाड्य, व्यापारी, नेता आदि शामिल थे।
वह इस ग्रुप के जरिए लोगों से रुपये वसूल रहा था। अमर उजाला अखबार ने अपने 11 नवंबर 2018 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। बावजूद इसके पुलिस कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साध ली।
पुलिस की निष्क्रियता और जेल प्रशासन की लीपापोती का परिणाम रहा कि बदमाश खुलेआम ना केवल जेल के भीतर से गतिविधियां संचालित करने लगे।
अप्रैल 2019 में डीआईजी मनोज तिवारी और एसपी त्रिवेणी सिंह खबर को संज्ञान में लेते हुए सर्विलांस की मदद से सचिन के वाट्सएप ग्रुप से जुड़े लोगों के नंबर का रिकार्ड खंगाला। 16 अप्रैल को एडीएम और एसपीसिटी के नेतृत्व में जेल की तलाशी लेने पर 35 से अधिक मोबाइलें जब्त हुई।
इसमें सचिन पांडेय की भी मोबाइल शामिल थे। पुलिस के इस कार्रवाई से नाराज सचिन आदि ने जेल में बवाल शुरू करा दिया। प्रशासन के हालात नियंत्रण में करने के लिए करीब पांच से छह घंटे का वक्त लगा। साथ ही जेल की दुव्र्यवस्था की भी पोल खुल गई।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती के चलते ज्यादातर बंदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट करा दिया गया। इसमें सचिन पांडेय भी शामिल था। सचिन आजमगढ़ जेल से अपना ट्रांसफर कराकर कानपुर देहात जेल चला गया। वहां से जमानत होने पर 15 जुलाई 2019 को जेल से बाहर निकला था।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सचिन के जेल से बाहर निकलने पर मुठभेड़ में ढेर हुआ लक्ष्मण यादव और जेल में निरुद्ध श्रीकांत यादव उसे काले रंग की सफाई से रिसिव किए। साथ ही उसे दो पिस्टल दिया। तभी से सचिन पुन: जरायम की दुनिया में सक्रिय हो गया था।
वह इस ग्रुप के जरिए लोगों से रुपये वसूल रहा था। अमर उजाला अखबार ने अपने 11 नवंबर 2018 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। बावजूद इसके पुलिस कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साध ली।
पुलिस की निष्क्रियता और जेल प्रशासन की लीपापोती का परिणाम रहा कि बदमाश खुलेआम ना केवल जेल के भीतर से गतिविधियां संचालित करने लगे।
अप्रैल 2019 में डीआईजी मनोज तिवारी और एसपी त्रिवेणी सिंह खबर को संज्ञान में लेते हुए सर्विलांस की मदद से सचिन के वाट्सएप ग्रुप से जुड़े लोगों के नंबर का रिकार्ड खंगाला। 16 अप्रैल को एडीएम और एसपीसिटी के नेतृत्व में जेल की तलाशी लेने पर 35 से अधिक मोबाइलें जब्त हुई।
इसमें सचिन पांडेय की भी मोबाइल शामिल थे। पुलिस के इस कार्रवाई से नाराज सचिन आदि ने जेल में बवाल शुरू करा दिया। प्रशासन के हालात नियंत्रण में करने के लिए करीब पांच से छह घंटे का वक्त लगा। साथ ही जेल की दुव्र्यवस्था की भी पोल खुल गई।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती के चलते ज्यादातर बंदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट करा दिया गया। इसमें सचिन पांडेय भी शामिल था। सचिन आजमगढ़ जेल से अपना ट्रांसफर कराकर कानपुर देहात जेल चला गया। वहां से जमानत होने पर 15 जुलाई 2019 को जेल से बाहर निकला था।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सचिन के जेल से बाहर निकलने पर मुठभेड़ में ढेर हुआ लक्ष्मण यादव और जेल में निरुद्ध श्रीकांत यादव उसे काले रंग की सफाई से रिसिव किए। साथ ही उसे दो पिस्टल दिया। तभी से सचिन पुन: जरायम की दुनिया में सक्रिय हो गया था।