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टाइगर रिजर्व पर्यटकों को खींचने में नाकाम
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:42 PM IST
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tiger
- फोटो : daily mail
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टाइगर रिजर्व बनने के बाद वृहद प्रचार प्रसार के चलते माना जा रहा था कि पर्यटकों के लिए यह महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बनेगा, लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां लंबा समय बीतने के बाद भी कुछ नया नहीं हो सका। टाइगर रिजर्व के अफसरों ने पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रोजेक्ट बनाकर जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को भेजे तो जरूर, लेकिन उन्हें तबज्जो नहीं मिली।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद जोरशोर से पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रचार-प्रसार वास्ते मीडिया का भी खूब सहारा लिया गया था। मसलन, कौन-कौन से वन्यजीव यहां पाए जाते हैं? पर्यटकों के लिए क्या सुविधाएं हैं? आदि पर उस दौरान खासी चर्चा हुई थी, लेकिन एक लंबा अरसा बीतने के बाद भी यहां पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों की सुविधा के लिए ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता। हां, इतना अवश्य हुआ कि दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर पर्यटकों के लिए धूमने की दरें अवश्य बढ़ा दी गईं। टाइगर रिजर्व के अफसरों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोजेक्ट बनाकर पर्यटन विभाग को भेजे, लेकिन वहां से भी कुछ हाथ नहीं लग सका। प्रदेश सरकार ने भी इस ओर फिलहाल अभी तक कुछ नहीं किया, जबकि प्रदेश के दो-दो मंत्री और आला अफसर चूका बीच में नई हटें और सुविधाएं देने का आश्वासन दे गए थे। इसके बाद डीएम मासूम अली सरवर ने भी जंगल का भ्रमण कर वनाधिकारियों के साथ बैठक कर चूका बीच, सप्त सरोवर और कुछ ग्रास लैंडों को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट मांगें थे, जो जिला प्रशासन को भेज दिए गए थे, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि एनटीसीए से लेकर किसी भी योजना से यहां विकसित करने के लिए कुछ नहीं मिल सका, जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है।
टाइगर रिजर्व में जो भी वर्तमान समय में है वह सब पुराना है। पर्यटकों को इंट्रीगेट नंबर चार देखकर लगता है कि यह टाइगर रिजर्व है, लेकिन भीतर जाने पर वन्यजीव देखने को नहीं मिलते, जिसके चलते पर्यटकों की संख्या भी घटती जा रही है। यदि टाइगर रिजर्व के चूका बीच में सुविधाएं बढ़ा दी जाएं और बढ़ी दरें आधी कर दी जाएं तो पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है।
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टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को लुभाने के लिए सप्त सरोवर और चूका बीच को विकसित करने के लिए वनाधिकारी द्वारा प्रोजेक्ट भेजे गए हैं। बजट मिलते ही उस पर कार्य शुरू कराया जाएगा।
- केपी सिंह, वनाधिकारी
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टाइगर रिजर्व बनने के बाद जोरशोर से पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रचार-प्रसार वास्ते मीडिया का भी खूब सहारा लिया गया था। मसलन, कौन-कौन से वन्यजीव यहां पाए जाते हैं? पर्यटकों के लिए क्या सुविधाएं हैं? आदि पर उस दौरान खासी चर्चा हुई थी, लेकिन एक लंबा अरसा बीतने के बाद भी यहां पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों की सुविधा के लिए ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता। हां, इतना अवश्य हुआ कि दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर पर्यटकों के लिए धूमने की दरें अवश्य बढ़ा दी गईं। टाइगर रिजर्व के अफसरों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोजेक्ट बनाकर पर्यटन विभाग को भेजे, लेकिन वहां से भी कुछ हाथ नहीं लग सका। प्रदेश सरकार ने भी इस ओर फिलहाल अभी तक कुछ नहीं किया, जबकि प्रदेश के दो-दो मंत्री और आला अफसर चूका बीच में नई हटें और सुविधाएं देने का आश्वासन दे गए थे। इसके बाद डीएम मासूम अली सरवर ने भी जंगल का भ्रमण कर वनाधिकारियों के साथ बैठक कर चूका बीच, सप्त सरोवर और कुछ ग्रास लैंडों को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट मांगें थे, जो जिला प्रशासन को भेज दिए गए थे, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि एनटीसीए से लेकर किसी भी योजना से यहां विकसित करने के लिए कुछ नहीं मिल सका, जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है।
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टाइगर रिजर्व में जो भी वर्तमान समय में है वह सब पुराना है। पर्यटकों को इंट्रीगेट नंबर चार देखकर लगता है कि यह टाइगर रिजर्व है, लेकिन भीतर जाने पर वन्यजीव देखने को नहीं मिलते, जिसके चलते पर्यटकों की संख्या भी घटती जा रही है। यदि टाइगर रिजर्व के चूका बीच में सुविधाएं बढ़ा दी जाएं और बढ़ी दरें आधी कर दी जाएं तो पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है।
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टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को लुभाने के लिए सप्त सरोवर और चूका बीच को विकसित करने के लिए वनाधिकारी द्वारा प्रोजेक्ट भेजे गए हैं। बजट मिलते ही उस पर कार्य शुरू कराया जाएगा।
- केपी सिंह, वनाधिकारी