{"_id":"6a91b86ae6007140f400d3ac","slug":"nepal-rejects-foreign-rescue-help-after-flood-south-korea-india-2026-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"अचानक आई बाढ़ से त्रासदी: 500 से ज्यादा मौतें, फिर भी नेपाल ने विदेशी बचाव दलों को मंजूरी नहीं दी; ऐसा क्यों?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अचानक आई बाढ़ से त्रासदी: 500 से ज्यादा मौतें, फिर भी नेपाल ने विदेशी बचाव दलों को मंजूरी नहीं दी; ऐसा क्यों?
Fri, 28 Aug 2026 10:03 PM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 28 Aug 2026 10:03 PM IST
सार
नेपाल में भीषण बाढ़ से करीब 500 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद नहीं ले रही है। भारत समेत कई देशों ने बचाव दल भेजने की पेशकश की है। दक्षिण कोरिया नेपाल से बातचीत जारी रखे हुए है। रसुवा जिले के चीन सीमा और तिब्बत से लगे होने के कारण फैसले पर सवाल उठे, लेकिन नेपाल ने चीन कनेक्शन से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल बचाव अभियान संभाल रही हैं।
विज्ञापन
नेपाल त्रासदी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल में भीषण बाढ़ से करीब 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कई विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। इसके बावजूद नेपाल ने फिलहाल दूसरे देशों की खोज और बचाव टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां खुद बचाव अभियान चला रही हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह अपनी रेस्क्यू टीम को लेकर नेपाल से बातचीत जारी रखेगा।
विदेशी बचाव दलों को मंजूरी नहीं
बुधवार को आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में भी इसका बड़ा असर पड़ा। कई कस्बे तबाह हो गए और जलविद्युत संयंत्रों को नुकसान पहुंचा। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने शुक्रवार को साफ किया कि फिलहाल विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की मदद की पेशकश स्वाभाविक है। लेकिन नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां खुद खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
भारत समेत कई देशों ने की थी पेशकश
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने नेपाल सरकार से अपने खोज और बचाव दल भेजने की अनुमति मांगी थी। इन देशों के नागरिक भी इस आपदा में प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों विदेशी नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं।
विज्ञापन
दक्षिण कोरिया के नौ नागरिक लापता
दक्षिण कोरिया ने कहा है कि उसने नेपाल को एक प्रतिक्रिया दल भेज दिया है। साथ ही, आपदा राहत टीम भी भेजने की तैयारी है। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल ने संकेत दिया है कि वह अभी विदेशी बचाव दलों को स्वीकार करने की योजना नहीं बना रहा है। मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया इस मुद्दे पर नेपाल के साथ बातचीत जारी रखेगा। एक जलविद्युत संयंत्र में काम कर रहे नौ दक्षिण कोरियाई नागरिक लापता हैं। वहीं, 10 अन्य लोग वहां फंसे हुए हैं। दक्षिण कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए 10 लाख डॉलर की मानवीय सहायता देने का भी वादा किया है।
चीन सीमा वाले इलाके पर उठे सवाल
नेपाल के इस फैसले को लेकर रसुवा जिले की स्थिति पर भी सवाल उठे हैं। यह जिला चीन के तिब्बत क्षेत्र से लगा है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय, जिनेवा में नेपाल के पूर्व राजदूत दिनेश भट्टराई ने कहा कि विदेशी बचाव दलों को अनुमति न देने के पीछे इलाके की संवेदनशीलता एक वजह हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संभवतः इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए विदेशी टीमों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया।
हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है। प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने साफ किया कि इस फैसले का चीन की संवेदनशीलता से कोई संबंध नहीं है। नेपाल की अपनी टीमें अभियान संभाल रही हैं, इसलिए फिलहाल विदेशी बचाव दलों की जरूरत नहीं है।
यह भी पढ़ें: नेपाल में फिर आएगा जलप्रलय?: भीषण बाढ़ की दूसरी लहर का खतरा, जानें चीन की चेतावनी में क्या-क्या
ली च्यांग ने किया आपदा क्षेत्र का दौरा
चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग ने गुरुवार को ग्यिरोंग के आपदा प्रभावित इलाके का दौरा किया। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ली ने बचाव अभियान में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने विदेशी नागरिकों और विदेशी पक्षों से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय और संपर्क पर भी जोर दिया। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी शुक्रवार को नेपाल के राष्ट्रपति के प्रति संवेदना जताई।
नेपाल में भीषण बाढ़ से करीब 500 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद नहीं ले रही है। भारत समेत कई देशों ने बचाव दल भेजने की पेशकश की है। दक्षिण कोरिया नेपाल से बातचीत जारी रखे हुए है। रसुवा जिले के चीन सीमा और तिब्बत से लगे होने के कारण फैसले पर सवाल उठे, लेकिन नेपाल ने चीन कनेक्शन से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल बचाव अभियान संभाल रही हैं।
विज्ञापन
विदेशी बचाव दलों को मंजूरी नहीं
बुधवार को आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में भी इसका बड़ा असर पड़ा। कई कस्बे तबाह हो गए और जलविद्युत संयंत्रों को नुकसान पहुंचा। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने शुक्रवार को साफ किया कि फिलहाल विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की मदद की पेशकश स्वाभाविक है। लेकिन नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां खुद खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
विज्ञापन
भारत समेत कई देशों ने की थी पेशकश
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने नेपाल सरकार से अपने खोज और बचाव दल भेजने की अनुमति मांगी थी। इन देशों के नागरिक भी इस आपदा में प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों विदेशी नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं।
विज्ञापन
दक्षिण कोरिया के नौ नागरिक लापता
दक्षिण कोरिया ने कहा है कि उसने नेपाल को एक प्रतिक्रिया दल भेज दिया है। साथ ही, आपदा राहत टीम भी भेजने की तैयारी है। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल ने संकेत दिया है कि वह अभी विदेशी बचाव दलों को स्वीकार करने की योजना नहीं बना रहा है। मंत्रालय ने कहा कि दक्षिण कोरिया इस मुद्दे पर नेपाल के साथ बातचीत जारी रखेगा। एक जलविद्युत संयंत्र में काम कर रहे नौ दक्षिण कोरियाई नागरिक लापता हैं। वहीं, 10 अन्य लोग वहां फंसे हुए हैं। दक्षिण कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए 10 लाख डॉलर की मानवीय सहायता देने का भी वादा किया है।
चीन सीमा वाले इलाके पर उठे सवाल
नेपाल के इस फैसले को लेकर रसुवा जिले की स्थिति पर भी सवाल उठे हैं। यह जिला चीन के तिब्बत क्षेत्र से लगा है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय, जिनेवा में नेपाल के पूर्व राजदूत दिनेश भट्टराई ने कहा कि विदेशी बचाव दलों को अनुमति न देने के पीछे इलाके की संवेदनशीलता एक वजह हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संभवतः इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए विदेशी टीमों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया।
हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है। प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने साफ किया कि इस फैसले का चीन की संवेदनशीलता से कोई संबंध नहीं है। नेपाल की अपनी टीमें अभियान संभाल रही हैं, इसलिए फिलहाल विदेशी बचाव दलों की जरूरत नहीं है।
यह भी पढ़ें: नेपाल में फिर आएगा जलप्रलय?: भीषण बाढ़ की दूसरी लहर का खतरा, जानें चीन की चेतावनी में क्या-क्या
ली च्यांग ने किया आपदा क्षेत्र का दौरा
चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग ने गुरुवार को ग्यिरोंग के आपदा प्रभावित इलाके का दौरा किया। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ली ने बचाव अभियान में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने विदेशी नागरिकों और विदेशी पक्षों से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय और संपर्क पर भी जोर दिया। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी शुक्रवार को नेपाल के राष्ट्रपति के प्रति संवेदना जताई।
नेपाल में भीषण बाढ़ से करीब 500 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद नहीं ले रही है। भारत समेत कई देशों ने बचाव दल भेजने की पेशकश की है। दक्षिण कोरिया नेपाल से बातचीत जारी रखे हुए है। रसुवा जिले के चीन सीमा और तिब्बत से लगे होने के कारण फैसले पर सवाल उठे, लेकिन नेपाल ने चीन कनेक्शन से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल बचाव अभियान संभाल रही हैं।