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मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु ।
मिर्जापुर/ अमरउजाला, ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2016 01:29 AM IST
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मां विंध्यवासिनी देवी का फूलों से किया गया भव्य शृंगार।
- फोटो : mirzapur
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फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि पर विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। मंदिर पहुंचे आस्थावानों ने बड़े ही श्रद्धाभाव से जगत जननी मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में शीश नवाकर मंगलकामना की। मंदिर में मुंडन संस्कार का दौर चलता रहा, वहीं मंदिर के गुंबद और हवन कुंड का परिक्रमा करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी के दरबार में भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालु डलिया में नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, लाचीदाना-कपूर एवं प्रसाद लिए श्रद्धालु विंध्यधाम में पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
विंध्य की गलियों में कतार में प्रसाद लिए कतार में खड़े आस्थावान मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां का दर्शन-पूजन करने के उपरांत भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर मत्था टेक कर सुख समृद्धि के लिए कामना किया।
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इस अवसर पर मंदिर के छत पर जहां एक ओर मुंडन संस्कार कराने वालों का तांता लगा रहा, वहीं जगह जगह आसन पर बैठकर साधक वैदिक मंत्रोच्चार बीच साधना करने में तल्लीन दिखाई दिए। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्त अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी देवी के पावन दरबार में जाकर दर्शन-पूजन किया।
विंध्यधाम में उमड़ी श्रद्धालुआें की भारी भीड़ के चलते प्रमुख मार्गों पर घंटो जाम की स्थिति बनी रही, जिससे भक्तों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ा। भक्तजनों की भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
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आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी के दरबार में भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालु डलिया में नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा, लाचीदाना-कपूर एवं प्रसाद लिए श्रद्धालु विंध्यधाम में पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था।
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विंध्य की गलियों में कतार में प्रसाद लिए कतार में खड़े आस्थावान मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां का दर्शन-पूजन करने के उपरांत भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर मत्था टेक कर सुख समृद्धि के लिए कामना किया।
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इस अवसर पर मंदिर के छत पर जहां एक ओर मुंडन संस्कार कराने वालों का तांता लगा रहा, वहीं जगह जगह आसन पर बैठकर साधक वैदिक मंत्रोच्चार बीच साधना करने में तल्लीन दिखाई दिए। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्त अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी देवी के पावन दरबार में जाकर दर्शन-पूजन किया।
विंध्यधाम में उमड़ी श्रद्धालुआें की भारी भीड़ के चलते प्रमुख मार्गों पर घंटो जाम की स्थिति बनी रही, जिससे भक्तों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ा। भक्तजनों की भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।