पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्यों ने बिगाड़ा माहौल, दो गिरफ्तार और 78 की निगरानी
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शहर का माहौल बिगाड़ने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों की अहम भूमिका रही। हाल के दिनों में चेतगंज पुलिस द्वारा जेल भेजे गए लोगों से दो लोग पीएफआई के सदस्य के तौर पर चिह्नित हुए तो यह बात सामने आई।
इनके अलावा शहर में रह रहे पीएफआई के 78 सदस्यों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। जौनपुर, आजमगढ़ और सुल्तानपुर निवासी पीएफआई से जुड़े तीन अन्य लोगों की गतिविधियां भी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नजर में है।
शहर के बेनिया, मदनपुरा, नदेसर और बजरडीहा में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे। बजरडीहा में भीड़ अराजक हुई और पथराव शुरू किया तो स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान भगदड़ में एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस की तफ्तीश से इतर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की तो सामने आया कि शहर का माहौल बिगाड़ने में पीएफआई के सदस्यों की अहम भूमिका रही।
11 दिसंबर को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित हुआ, तभी से पीएफआई के सदस्य इसके विरोध को लेकर शहर में सक्रिय हो गए थे। तैयारी थी कि विरोध को हिंसक रूप देकर इसे शहर भर में फैलाए जाए। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से माहौल को समय रहते शांत कर लिया गया।
प्रदेश स्तरीय सुरक्षा एजेंसी के एक अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में ‘अमर उजाला’ को बताया कि चेतगंज थाने की पुलिस द्वारा जो लोग गिरफ्तार कर जेल भेज गए थे, उनमें से दो लोग पीएफआई से जुड़े हुए हैं। दोनों लखनऊ में होने वाली पीएफआई की बैठकों में भी शामिल होते रहे हैं। पीएफआई के अन्य 78 सदस्यों की गतिविधियों की निगरानी कर उनके संबंध में रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी।
क्या है पीएफआई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधित संगठन सिमी पर सख्ती के बाद उसके कई पदाधिकारी और सदस्य पीएफआई में शामिल हो गए। पीएफआई की स्थापना 2006 में हुई थी। केरल से शुरू हुआ यह संगठन मौजूदा समय में देश के 23 राज्यों में सक्रिय है।
इस संगठन की स्थापना का उद्देश्य दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदाय पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना बताया गया था। हालांकि, खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के जो इनपुट हैं उनके अनुसार, मौजूदा समय में पीएफआई के सदस्य और पदाधिकारी सिमी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने बढ़ाते हुए प्रदेश और देश में अस्थिरता फैलाने का काम कर रहे हैं।
चिकित्सक ने बांग्लादेश भेजा कूरियर, पुलिस ने शुरू की जांच
दुर्गाकुंड क्षेत्र के कबीर नगर स्थित एक नर्सिंगहोम के डॉक्टर द्वारा बांग्लादेश के ढाका भेजा गया कूरियर सवालों के घेरे में आ गया है। मामला लंका पुलिस की जानकारी में आया तो डॉक्टर से पूछताछ के बाद जांच शुरू कर दी गई है। लंका पुलिस ने चिकित्सक से पूछा है कि उन्होंने कूरियर ढाका के किस व्यक्ति को क्या और क्यों भेजा है।
प्रारंभिक पूछताछ में डॉक्टर ने बताया कि सोशल मीडिया से संबंधित एक एप पर ढाका के व्यक्ति से बातचीत के बाद दोस्ती हुई तो उपहार स्वरूप उसे कपड़े भेजे हैं। इस संबंध में लंका इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी ने बताया कि सूचना के आधार पर जांच की जा रही है। सामने आए तथ्यों के आधार पर उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जाएगी।