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एलआईयू रिपोर्ट में भी नहीं उठाई गई दुर्गा पर उंगली

Tue, 06 Aug 2013 11:41 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो/एजेंसी
लखनऊ/ब्यूरो/एजेंसी Updated Tue, 06 Aug 2013 11:41 AM IST
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liu report says sdm(sadar) durga shakti nagpal not present at demolition spot

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एलआईयू की जिस रिपोर्ट के आधार पर गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम सदर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को बार-बार जायज ठहरा रहे हैं, उस रिपोर्ट के मुताबिक तो दुर्गा कादलपुर गांव में गई ही नहीं थीं। बल्कि एसडीएम (जेवर) और सीओ मौके पर गए थे।

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अब इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद सरकार ने चुप्पी साध ली है। इस बीच, दुर्गा के निलंबन पर सियासी तूफान भी तेज हो गया है।

इस मुद्दे को लेकर जहां सोमवार को तमाम दलों ने सपा पर हमला बोला तो सपा ने भी कह दिया है कि दुर्गा का निलंबन हरगिज वापस नहीं होगा।

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अखिलेश ने दुर्गा शक्ति के निलंबन के फैसले को सही ठहराते हुए एलआईयू की रिपोर्ट का ही हवाला दिया था। लेकिन रिपोर्ट से उनके इस बयान पर ही सवाल उठ गए हैं।
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रिपोर्ट कहती है कि ग्राम कादलपुर थाना रघुपुरा में एक नई मस्जिद का निर्माण कराया जा रहा था जिसकी दस फीट की तीन तरफ दीवार खड़ी कर दी गई थी।

मस्जिद के निर्माण की सूचना पर एसडीएम (जेवर), सीओ और रघुपुरा के एसएचओ की टीम कादलपुर गांव में 27 जुलाई को करीब एक बजे पहुंची थी। उसके बाद यहां बनाई गई दीवार गिरवा दी गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मस्जिद के निर्माण के लिए तीन माह पहले नरेंद्र भाटी (घोषित सपा प्रत्याशी) ने 51 हजार रुपये नकद देकर इसका उद्घाटन किया था।

एलआईयू ने 27 जुलाई को शाम करीब 5:10 बजे यह रिपोर्ट डीआईजी, खुफिया, डीजीपी और गृह विभाग को भेजी। उसी दिन नागपाल को अखिलेश सरकार ने यह आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया कि धार्मिक स्थल की दीवार गिराने का आदेश देने में उन्होंने दूरदर्शिता का परिचय नहीं दिया।

उनके आदेश से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता था। हालांकि एलआईयू की इस रिपोर्ट में किसी अधिकारी का नाम नहीं लिखा गया है।

मालूम हो कि नागपाल एसडीएम (सदर) पद पर तैनात थीं। एसडीएम (सदर) और एसडीएम (जेवर) दोनों ही गौतमबुद्ध नगर जिले के तहत आते हैं। जिले के डीएम भी अपनी रिपोर्ट में कह चुके हैं कि नागपाल ने दीवार गिराने का कोई आदेश नहीं दिया था।

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वहीं, एसडीएम (जेवर) बच्चू सिंह ने कहा कि कादलपुर गांव तो उनके क्षेत्र में ही नहीं आता है। पता नहीं रिपोर्ट में एसडीएम (जेवर) कैसे लिख दिया गया।

एलआईयू की इस रिपोर्ट से इन आरोपों को भी बल मिला है कि दुर्गा के निलंबन के पीछे कहीं खनन माफिया का हाथ तो नहीं है। हालांकि निलंबन पर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भारी बवाल के बावजूद सपा सरकार अपने रुख पर अड़ी है।


किस आधार पर दुर्गा को दी चार्जशीट?
दुर्गा शक्ति नागपाल को आखिर किस रिपोर्ट के आधार पर चार्जशीट दी गई? अब यह सवाल भी उठने लगे हैं।

रविवार को राज्य सरकार ने केंद्र को जवाब देने के साथ ही नागपाल को चार्जशीट दी। लेकिन चार्जशीट किस आरोप पर दी, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

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सरकार ने दुर्गा के निलंबन के वही कारण बताए हैं, जो वह पहले से ही गिना रही है। सरकार का कहना है कि कादलपुर गांव में गिराई गई दीवार के बाद उपजे हालात को काबू करने के लिए नागपाल को निलंबित किया गया।

लेकिन सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है कि इस दीवार गिराने में नागपाल की भूमिका की जांच किसने की?
डीएम ने शासन को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें नागपाल को क्लीन चिट दी गई थी।

इसके अलावा कोई और रिपोर्ट सरकार के पास आई? इस बारे में वह खामोश है।

सपा को मिला जदयू का साथ
इधर, दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मुद्दे पर छिड़ी जुबानी जंग के बीच सपा को जदयू का साथ मिल गया है।

जदयू ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब को गलत ठहराते हुए केंद्र सरकार के इस कदम को संघीय ढांचे के खिलाफ बताया है।

पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने इस मामले में केंद्र के राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब करने के कदम को खतरनाक करार दिया। त्यागी ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है, ऐसे में केंद्र का यह कदम राज्य के कानून व्यवस्था में हस्तक्षेप है।

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