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उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ के लिए 'भस्मासुर' साबित हो रही यूपी पुलिस, लखीमपुर खीरी से गोरखपुर तक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

Mon, 04 Oct 2021 05:38 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 04 Oct 2021 05:38 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि लखीपुर खीरी की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके जांच के लिए तत्काल आदेश दे दिये हैं। इस घटना के सभी अपराधियों को जल्द से जल्द सामने लाया जाएगा और कोई अपराधी कितना भी बड़ा रसूखदार व्यक्ति हो, उसके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी...

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Lakhimpur Kheri Violence: UP Police working style create problems for Yogi Adityanath
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि एक सख्त प्रशासक की रही है। उन्होंने जब से उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली है, प्रदेश के अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की है। दर्जनों बड़े अपराधियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया तो सैकड़ों अपराधी इस समय जेल की हवा खा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ की इस छवि का जनता में खुलेदिल से स्वागत किया जा रहा था और उनकी लोकप्रियता बढ़-चढ़कर बोल रही थी। माना जा रहा था कि योगी आदित्यनाथ की इस सख्त छवि का फायदा भाजपा को विधानसभा चुनाव में भी मिल सकता है। लेकिन चुनाव के ठीक पहले अचानक ही यूपी पुलिस सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई है।

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गोरखपुर में व्यापारी मनीष गुप्ता के मारे जाने और एक अन्य हत्याकांड के बाद अब लखीमपुर खीरी की घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री के पुलिस को खुली छूट देने से वह नियंत्रण से बाहर हो गई है और स्थिति को नहीं संभाल पा रही है। कहा जा रहा है कि इन घटनाओं से योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासक की छवि को भारी चोट पहुंची है। तो क्या यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली अब मुख्यमंत्री की साख को चोट पहुंचा रही है? भाजपा को लखीपुरखीरी की घटना के पीछे 'सुनियोजित साजिश' दिखाई पड़ रही है।

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पुलिस राज से नहीं चलता लोकतंत्र

वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने अमर उजाला से कहा कि लखीमपुर खीरी में पुलिस की सीधी लापरवाही उजागर हो रही है। कोई विरोध प्रदर्शन हो या सामान्य कार्यक्रम, भीड़भाड़ होने की स्थिति में स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त कार्यबल होना चाहिए। इस घटना में पुलिस के पास पहले से पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा की पर्याप्त तैयारी नहीं की गई जिससे आठ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अनेक घटनाओं को देखकर यही लग रहा है कि यहां पुलिस को सरकार की ओर से बहुत ज्यादा छूट मिल गई है, जिसके कारण वह अपनी मनमर्जी करने पर उतारू हो गई है। पुलिस को मिली इसी छूट का परिणाम गोरखपुर और लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। सरकार को इस स्थिति पर नियंत्रण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों के विरोध करने के अधिकार को पुलिस बलों के दम पर झुकाया नहीं जाना चाहिए। किसी विरोध प्रदर्शन के होने पर पुलिस प्रशासन को उनसे बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।

साजिश क्यों नहीं भांप पाई पुलिस

एक अन्य पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस के पास पर्याप्त जासूसी नेटवर्क एलआईयू के रूप में होता है। पुलिस अधिकारियों के पास मुखबिरों का भी अपना नेटवर्क होता है। यदि यह मान लिया जाए कि लखीमपुर खीरी में हिंसा की साजिश रची गई तो भी पुलिस इस साजिश को भांप पाने में नाकाम रही। यह उसकी बड़ी असफलता है।

छवि खराब करने की कोशिश- भाजपा

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि लखीपुर खीरी की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके जांच के लिए तत्काल आदेश दे दिये हैं। इस घटना के सभी अपराधियों को जल्द से जल्द सामने लाया जाएगा और कोई अपराधी कितना भी बड़ा रसूखदार व्यक्ति हो, उसके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा नेता ने कहा कि लखीमपुरखीरी की घटना के कुछ वीडियो सामने आए हैं जिससे यह साफ लग रहा है कि किसानों के बीच घुसकर कुछ लोगों ने माहौल को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की है। घटनास्थल से बहुत दूर-दूर तक के लोगों को बुलाया गया था। इनमें वे लोग भी शामिल थे जो किसी भी तरह किसान नहीं थे। उनकी भूमिका की जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पूरे शासनकाल में कानून-व्यवस्था को बेहद गंभीरता के साथ लिया है। अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के कारण अपराधी प्रदेश में कोई भी वारदात करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं। लेकिन पूरी साजिश के अंतर्गत इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर प्रदेश की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों को जनता का समर्थन समाप्त हो गया है, यही कारण है कि अब वे किसानों के पीछे छिपकर अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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