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केंद्रीय एजेंसी कर रही बाघों की हत्या की जांच
कुशीनगर
Updated Wed, 09 Mar 2016 11:40 PM IST
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tiger
- फोटो : daily mail
खड्डा। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघों की हत्या कर उनके अंगों की तस्करी मामले की जांच के लिए वन प्रशासन और पुलिस के साथ केंद्रीय वन अपराध नियंत्रण ब्यूरो (एफसीसीबी) कर रहा है। इनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हरि गुरो के अंतर्राष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश हो सका है।
एफसीसीबी के सदस्यों ने बाघ के खाल और हड्डियों के खरीदार बनकर 19 जनवरी को हरि गुरो के साथियों को गिरफ्तार किया था। जांच दल इस मामले में शामिल लोगों को पकड़ने में जुटा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघों की हत्या कर उनके अंगों की तस्करी की जानकारी होने पर वन प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय वन अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने जांच शुरू किया था।
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एजेंसी के सदस्यों ने बाघ के खाल एवं हड्डियों के खरीददार बनकर तस्करों से मुलाकात की थी। जिसकी वजह से यह बड़ी सफलता हाथ लगी। बाघ की हत्या मामले में एक वनकर्मी जितेंद्र उरांव भी पकड़ा गया है, जो अपराधियों को बाघों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देता था। जांच दल अब वनकर्मियों की संलिप्तता के बारे में भी पता लगा रहा है।
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देश में संगठित वन्य जीव अपराध की जांच एवं गिरफ्तारी करने वाली इस एजेंसी के रडार पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, नेपाल और बिहार के वन अपराधी भी आ चुके हैं। इस संबंध में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक सह वन संरक्षक आरबी सिंह का कहना है कि मामले की जांच तेजी से हो रही है।
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एफसीसीबी के सदस्यों ने बाघ के खाल और हड्डियों के खरीदार बनकर 19 जनवरी को हरि गुरो के साथियों को गिरफ्तार किया था। जांच दल इस मामले में शामिल लोगों को पकड़ने में जुटा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघों की हत्या कर उनके अंगों की तस्करी की जानकारी होने पर वन प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय वन अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने जांच शुरू किया था।
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केंद्रीय पर्यावरण एवं वन्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एजेंसी के सदस्यों ने बाघ के खाल एवं हड्डियों के खरीददार बनकर तस्करों से मुलाकात की थी। जिसकी वजह से यह बड़ी सफलता हाथ लगी। बाघ की हत्या मामले में एक वनकर्मी जितेंद्र उरांव भी पकड़ा गया है, जो अपराधियों को बाघों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देता था। जांच दल अब वनकर्मियों की संलिप्तता के बारे में भी पता लगा रहा है।
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देश में संगठित वन्य जीव अपराध की जांच एवं गिरफ्तारी करने वाली इस एजेंसी के रडार पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, नेपाल और बिहार के वन अपराधी भी आ चुके हैं। इस संबंध में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक सह वन संरक्षक आरबी सिंह का कहना है कि मामले की जांच तेजी से हो रही है।