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कुंडाः यहां राजा का दरबार ही सबसे बड़ी अदालत है

Thu, 07 Mar 2013 12:17 PM IST
कुंडा/इंटरनेट डेस्क/ब्यूरो।
कुंडा/इंटरनेट डेस्क/ब्यूरो। Updated Thu, 07 Mar 2013 12:17 PM IST
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kunda: raja bhaiya court, the highest court

कुंडा और आसपास के इलाके के लोगों के लिए रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का ‘दरबार’ ही सबसे बड़ी अदालत है। यहां बाकायदा सुनवाई की जाती है। दोनों पक्षों में जिरह होती है और अंत में राजा भैया का फैसला ‘अंतिम’ फैसला माना जाता है। किसी की क्या जुर्रत जो राजा के फैसले पर नाराजगी जता दे। राजा के फैसले के बाद और कहीं अपील की इजाजत नहीं होती है। इसे राजा का खौफ कहें या फिर सम्मान। फिलहाल तो कुंडा की सच्चाई यही है।

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राजा भैया अगर कुंडा में हैं तो उनका दरबार हर रोज लगता है। राजा के सिपहसालारों को पहले से पूरे मामले की जानकारी होती है। दरबार में राजा को समझाया जाता है कि मामला क्या है और पीड़ित क्या चाहता है। बहुत बार इन मामलों को राजा समर्थित ग्राम प्रधानों, ब्लाक प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्यों के पास जांच के लिए भेजा जाता है। उनसे पूछा जाता है कि प्रार्थनापत्र या आरोपों में क्या सच्चाई है। इसके बाद दूसरे पक्ष को भी बुलाया जाता है। फिर होता है राजा का फैसला।
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जाहिर है फैसला दो पक्षों में से किसी एक के विरोध में होता है लेकिन इसे सभी को मानना ही पड़ता है। राजा भैया अगर सत्ता में हैं तो पुलिस, प्रशासनिक और तमाम विभागों के अफसर वहां हाजिरी लगाते दिखाई देते हैं। अगर वे सत्ता में नहीं हैं तो भी दरबार उसी ठसक से लगता है। इतना जरूर है कि फिर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी वहां नहीं दिखते। कई बार दरबार में आना लोगों की मजबूरी होती है, क्योंकि दूसरा पक्ष वहां पहुंच जाता है। ऐसे में दरबार का फैसला मानने के अलावा किसी के पास और कोई चारा नहीं होता।
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‘राजा’ न प्रजा, सिपहसालार थे डीएसपी से नाराज
बलीपुर में डीएसपी समेत तीन हत्याओं की खूनी इबारत लिखी गई तो ‘कुंडा के गुंडाराज’ की परतें भी खंगाली जाने लगीं। डीएसपी की हत्या से पूरे प्रदेश में खलबली मची है। इस मामले में राजा भैया के खिलाफ मुकदमे ने माहौल गरमा दिया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ क्षेत्र के मानिंद लोगों का कहना है कि मामला इतना सीधा नहीं, जितना दिख रहा है। सीओ की हत्या मामले में कई पुराने रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं जिसमें कई नई बातें सामने आने लगीं जो कुंडा में पिछले दिनों हुई थीं।

सीओ कुंडा रहे जियाउल हक से वहां की प्रजा को कोई शिकवा नहीं था। न ही राजा भैया से सीधे डीएसपी का कोई विवाद था। कुंडा में जो रहेगा, उसे राजा की सुननी पड़ेगी, यह डीएसपी को भी पता था। न राजा को शिकायत थी और न ही डीएसपी को। अफसरों और स्थानीय मानिंद लोगों की माने तो कहानी में पेच राजा के सिपहसालारों को लेकर है।

कुंडा का हर शख्स राजा को अपना खास बताता है। ऐसे में सभी पक्षों को संतुष्ट करना आसान नहीं। कहा जा रहा है कि बात यहीं से बिगड़ी। फरवरी में सीओ जियाउल हक ने मानिकपुर थाना क्षेत्र के गोतनी गांव में कई ठेकेदारों के खिलाफ एक्शन लिया था। इसमें तीन ट्रक बालू, आठ ट्रैक्टर और एक जेसीबी को सीज कर दिया गया था। जिन ठेकेदारों की गाड़ियां सीज हुईं थी वह भी राजा के करीबी कहलाते थे। बालू खनन के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर सीओ का विरोध हुआ था।

एक और बात सामने आई है। कुंडा विधानसभा से राजा भैया के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर राजा के विरोधी अमरेश सिंह चुनाव लड़े थे। बेंती में रहने वाले अमरेश सिंह का राजा से विवाद जगजाहिर है। तीन महीना पहले हथिगवां इलाके में एक दलित किशोरी से गैंगरेप हुआ था। मामले में अमरेश सिंह के चार नौकरों पर कार्रवाई हुई। आरोप लगा कि अमरेश सिंह के कहने पर उनके करीबियों ने बंधक बनाकर बलात्कार किया। मामले में अमरेश सिंह भी फंसे। राजा पर दबाव डालकर कार्रवाई कराने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच भी सीओ जियाउल हक के पास थी।

सीओ आफिस के स्टाफ का कहना है कि मामले को लेकर राजा के करीबी अक्सर सीओ से मिलने आते थे। यह चक्कर चल ही रहा था तभी शासन के आदेश पर मामला सीबीसीआईडी में चला गया। इससे सीओ से राजा के कुछ करीबी नाराज हुए थे। इसके अलावा कुंडा के अस्थान गांव में आगजनी के मामले की जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्थान में किशोरी की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीओ कुंडा खलीकुज्मा ने की थी। बाद में उनका तबादला हो गया।


कहा जा रहा है कि उनकी जगह पहुंचे जियाउल हक आगजनी को लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहे थे। इसके अलावा भी कई पुराने विवाद सामने लाए जा रहे हैं, भले ही उनका नाता हत्या से न जुड़ा हो। इन सब विवादों से कई ऐसे लोग जुड़े हैं जिनका नाम राजा से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि जांच टीम इन बिन्दुओं पर भी ध्यान दे रही है।

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