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Kasganj News: बच्चों की हड्डियों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
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विश्व बाल अस्थि एवं जोड़ दिवस
कासगंज। बच्चों का शारीरिक विकास उनकी मजबूत हड्डियों और जोड़ों पर निर्भर करता है। बचपन में होने वाली अस्थि संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है।
जिला अस्पताल में हर माह 25 से 30 बच्चे हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जो अभिभावकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि अस्पताल आने वाले बच्चों की गहन जांच के बाद उनकी स्थिति के अनुसार समुचित उपचार किया जाता है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के चलने-फिरने के तरीकों और उनकी शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखें। यदि कोई बच्चा लगातार लंगड़ाकर चलता है, पैरों में असामान्य टेढ़ापन है अथवा जोड़ों में लगातार दर्द व सूजन बनी रहती है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
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इसके अलावा, चोट लगने के बाद यदि बच्चा उस अंग पर वजन नहीं डाल पा रहा है या दर्द के साथ बुखार की शिकायत है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। बच्चों की हड्डियों के स्वस्थ विकास के लिए संतुलित आहार बहुत महत्वपूर्ण है।
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ये हैं संकेत
-पैरों का असामान्य टेढ़ापन या लंगड़ाकर चलना।
-हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द और सूजन।
-चलने या अंग पर वजन डालने में परेशानी।
-चोट के बाद अंग हिलाने में कठिनाई।
-चलते या दौड़ते समय बार-बार गिरना
- पैरों/जोड़ों में दर्द की शिकायत होना।
-उम्र के हिसाब से हड्डियों और कद का सही विकास न होना।
-मामूली चोट पर भी बार-बार फ्रैक्चर होना
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ऐसे करें बचाव
-बच्चों को रोजाना कम से कम 20-30 मिनट सुबह की हल्की धूप में खेलने दें
-दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और रागी जैसे कैल्शियम व प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल करें।
-बच्चों को मोबाइल-टीवी से दूर रखकर मैदान में खेलने, दौड़ने और साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करें।
-असामान्य लक्षण दिखने पर समय से जांच कराएं।
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कासगंज। बच्चों का शारीरिक विकास उनकी मजबूत हड्डियों और जोड़ों पर निर्भर करता है। बचपन में होने वाली अस्थि संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है।
जिला अस्पताल में हर माह 25 से 30 बच्चे हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जो अभिभावकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि अस्पताल आने वाले बच्चों की गहन जांच के बाद उनकी स्थिति के अनुसार समुचित उपचार किया जाता है।
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उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के चलने-फिरने के तरीकों और उनकी शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखें। यदि कोई बच्चा लगातार लंगड़ाकर चलता है, पैरों में असामान्य टेढ़ापन है अथवा जोड़ों में लगातार दर्द व सूजन बनी रहती है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
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इसके अलावा, चोट लगने के बाद यदि बच्चा उस अंग पर वजन नहीं डाल पा रहा है या दर्द के साथ बुखार की शिकायत है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। बच्चों की हड्डियों के स्वस्थ विकास के लिए संतुलित आहार बहुत महत्वपूर्ण है।
ये हैं संकेत
-पैरों का असामान्य टेढ़ापन या लंगड़ाकर चलना।
-हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द और सूजन।
-चलने या अंग पर वजन डालने में परेशानी।
-चोट के बाद अंग हिलाने में कठिनाई।
-चलते या दौड़ते समय बार-बार गिरना
- पैरों/जोड़ों में दर्द की शिकायत होना।
-उम्र के हिसाब से हड्डियों और कद का सही विकास न होना।
-मामूली चोट पर भी बार-बार फ्रैक्चर होना
ऐसे करें बचाव
-बच्चों को रोजाना कम से कम 20-30 मिनट सुबह की हल्की धूप में खेलने दें
-दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और रागी जैसे कैल्शियम व प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल करें।
-बच्चों को मोबाइल-टीवी से दूर रखकर मैदान में खेलने, दौड़ने और साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करें।
-असामान्य लक्षण दिखने पर समय से जांच कराएं।