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Kasganj News: पहाड़ों की बारिश से फिर उफनी गंगा नदी
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फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद
कासगंज। पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखने लगा है। पहाड़ों पर उफान पर चल रही अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का पानी गंगा में मिलने से जिले में एक बार फिर गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है।
बृहस्पतिवार दोपहर के वक्त हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराजों से पानी का दबाव बढ़ने के बाद प्रवाह में और इजाफा कर दिया गया है। इससे जिला प्रशासन और तटीय इलाकों के लोगों की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र अग्रवाल ने सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार शत-प्रतिशत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
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कम हुई राहत, दोबारा लौटा बाढ़ का खतरा
पटियाली तहसील के निचले इलाकों में पिछले कई दिनों से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। राहत की बात यह थी कि पानी का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा था और स्थिति मीडियम फ्लड से घटकर लो फ्लड पर आ गई थी। हालांकि यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई और बृहस्पतिवार को गंगा के तेवर फिर तल्ख हो गए।
बिजनौर बैराज से सुबह 8 बजे 1.33 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह था जो दोपहर 3 बजे तक बढ़कर 1.97 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। इसी तरह नरौरा बैराज से सुबह 99 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था, जो शाम को बढ़कर 1.14 लाख क्यूसेक हो गया।
इसके अलावा कछला ब्रिज पर भी सुबह गंगा का जलस्तर 162.10 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जलस्तर में अभी और अधिक वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
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नाव का घंटों करना पड़ता है इंतजार
पटियाली के कई गांव पहले से बाढ़ से प्रभावित हैं। मूंजखेड़ा और उसके आसपास के गांवों के लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी भर जाने के कारण आवागमन के लिए केवल नाव ही एकमात्र सहारा बची है। ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान और दूध जैसी खाद्य सामग्री नाव के जरिए ही ला रहे हैं। पशुपालक अपनी आजीविका बचाने के लिए नाव के सहारे ही डेयरी सेंटरों तक दूध की आपूर्ति करने को मजबूर हैं। ग्रामीण घंटों नाव के आने का इंतजार करते हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 148569 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 197539 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 114828 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.15 मीटर के निशान पर
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वर्जन-
पहाड़ों पर लगातार बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी नदी में जलस्तर खतरे के निशान पर आ गया है। इससे गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। अभी जलस्तर में वृद्धि की आशंका बनी हुई है। सिंचाई विभाग ने अलर्ट जारी किया है। पूरी निगरानी की जा रही है। - शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता, सिंचाई
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स्वास्थ्य टीम को भेजना चाहिए
हमारे गांव में कई महिलाएं गर्भवती हैं। गांव के चारों ओर पानी भरा है। आवागमन के लिए नाव का ही सहारा है। पटियाली व गंजडुंडवारा में 20 किमी दूर सरकारी अस्पताल है। ऐसे में गांव में स्वास्थ्य टीमें पहुंचनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिलाओं को जांच एवं उपचार की अन्य सुविधाएं मुहैया हो सके। -रुकुम सिंह, मूझखेड़ा
गांव में इन दिनों वायरल का प्रकोप फैला है। अधिकांश लोग बुखार-खांसी समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजा जाना चाहिए। -पेशकार सिंह, मूझखेड़ा
गांव में पशु बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कई पशुपालक के मवेशी बीमार है। उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम को मौके पर आना चाहिए। ताकि पशुओं का उपचार मिल सके। -काशीराम, मूझखेड़ा
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बांटी जाए राहत सामग्री
गांव में करीब 10 दिन से बाढ़ का प्रभाव है। मगर अब तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री नहीं बांटी गई है। गांव के बाहर बाढ़ का पानी भरा है। नाव से आना-जाना पड़ रहा है। इससे बाजार से सामान लाने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन को राहत सामग्री का वितरण कराना चाहिए। -मुकेश, मूझखेड़ा
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बृहस्पतिवार दोपहर के वक्त हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराजों से पानी का दबाव बढ़ने के बाद प्रवाह में और इजाफा कर दिया गया है। इससे जिला प्रशासन और तटीय इलाकों के लोगों की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र अग्रवाल ने सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार शत-प्रतिशत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
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कम हुई राहत, दोबारा लौटा बाढ़ का खतरा
पटियाली तहसील के निचले इलाकों में पिछले कई दिनों से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। राहत की बात यह थी कि पानी का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा था और स्थिति मीडियम फ्लड से घटकर लो फ्लड पर आ गई थी। हालांकि यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई और बृहस्पतिवार को गंगा के तेवर फिर तल्ख हो गए।
बिजनौर बैराज से सुबह 8 बजे 1.33 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह था जो दोपहर 3 बजे तक बढ़कर 1.97 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। इसी तरह नरौरा बैराज से सुबह 99 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज था, जो शाम को बढ़कर 1.14 लाख क्यूसेक हो गया।
इसके अलावा कछला ब्रिज पर भी सुबह गंगा का जलस्तर 162.10 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जलस्तर में अभी और अधिक वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
नाव का घंटों करना पड़ता है इंतजार
पटियाली के कई गांव पहले से बाढ़ से प्रभावित हैं। मूंजखेड़ा और उसके आसपास के गांवों के लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी भर जाने के कारण आवागमन के लिए केवल नाव ही एकमात्र सहारा बची है। ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान और दूध जैसी खाद्य सामग्री नाव के जरिए ही ला रहे हैं। पशुपालक अपनी आजीविका बचाने के लिए नाव के सहारे ही डेयरी सेंटरों तक दूध की आपूर्ति करने को मजबूर हैं। ग्रामीण घंटों नाव के आने का इंतजार करते हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 148569 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 197539 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 114828 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.15 मीटर के निशान पर
वर्जन-
पहाड़ों पर लगातार बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी नदी में जलस्तर खतरे के निशान पर आ गया है। इससे गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई है। अभी जलस्तर में वृद्धि की आशंका बनी हुई है। सिंचाई विभाग ने अलर्ट जारी किया है। पूरी निगरानी की जा रही है। - शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता, सिंचाई
स्वास्थ्य टीम को भेजना चाहिए
हमारे गांव में कई महिलाएं गर्भवती हैं। गांव के चारों ओर पानी भरा है। आवागमन के लिए नाव का ही सहारा है। पटियाली व गंजडुंडवारा में 20 किमी दूर सरकारी अस्पताल है। ऐसे में गांव में स्वास्थ्य टीमें पहुंचनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिलाओं को जांच एवं उपचार की अन्य सुविधाएं मुहैया हो सके। -रुकुम सिंह, मूझखेड़ा
गांव में इन दिनों वायरल का प्रकोप फैला है। अधिकांश लोग बुखार-खांसी समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजा जाना चाहिए। -पेशकार सिंह, मूझखेड़ा
गांव में पशु बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कई पशुपालक के मवेशी बीमार है। उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम को मौके पर आना चाहिए। ताकि पशुओं का उपचार मिल सके। -काशीराम, मूझखेड़ा
बांटी जाए राहत सामग्री
गांव में करीब 10 दिन से बाढ़ का प्रभाव है। मगर अब तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री नहीं बांटी गई है। गांव के बाहर बाढ़ का पानी भरा है। नाव से आना-जाना पड़ रहा है। इससे बाजार से सामान लाने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन को राहत सामग्री का वितरण कराना चाहिए। -मुकेश, मूझखेड़ा

फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद

फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद

फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद

फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद

फोटो 27- कछला में उफनती गंगा की धारा ।स्रोत संवाद