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Kasganj News: बच्चों में सुस्ती और विकास में देरी को न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार
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कासगंज। बच्चे के जन्म के बाद न रोना, शरीर में असामान्य ढीलापन या अकड़न और उम्र के साथ शारीरिक व मानसिक विकास में देरी को कभी भी सामान्य मानकर टालना भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती जीवन के ये संकेत सेरेब्रल पाल्सी जैसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार की पहचान हो सकते हैं।
चूंकि जन्म के समय कई बार यह बीमारी स्पष्ट नहीं होती, इसलिए बच्चों के विकास के अगले पड़ावों पर पैनी नजर रखना और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क के विकास में बाधा या क्षति के कारण होती है। इससे मांसपेशियों की गतिविधि, संतुलन और शरीर के अंगों के समन्वय पर बुरा असर पड़ता है।
तीन माह तक गर्दन न संभाल पाना, आठ माह तक बिना सहारे न बैठना, खड़े होने या चलने में लगातार देरी होना, मांसपेशियों का बहुत ढीला या कठोर होना तथा हाथ-पैर में असामान्य हरकतें इसके संभावित लक्षण हैं। इसके अलावा, बोलने, देखने या सीखने में अपेक्षित प्रगति न होना भी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना का कहना है कि महीने में 30 से 40 बच्चे समस्या से पीड़ित आते हैं लेकिन कई बार संसाधनों के अभाव में उन्हें उच्च केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। ऐसे लक्षण दिखते ही अभिभावकों को तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन, गंभीर संक्रमण, मस्तिष्क में रक्तस्राव या चोट और ऑक्सीजन की कमी जैसी स्थितियां इसके मुख्य जोखिम कारक हैं।
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इन संकेतों पर दें ध्यान
-जन्म के समय न रोना या सांस लेने में परेशानी
-तीन माह में गर्दन न संभालना
-आठ माह में बिना सहारे न बैठना
-खड़े होने या चलने में लगातार देरी
-मांसपेशियों में अत्यधिक ढीलापन या अकड़न
-हाथ-पैर में असामान्य ऐंठन या हरकत
-संतुलन, बोलने या देखने में परेशानी
-विकासात्मक गतिविधियों में अपेक्षित प्रगति न होना
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चूंकि जन्म के समय कई बार यह बीमारी स्पष्ट नहीं होती, इसलिए बच्चों के विकास के अगले पड़ावों पर पैनी नजर रखना और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क के विकास में बाधा या क्षति के कारण होती है। इससे मांसपेशियों की गतिविधि, संतुलन और शरीर के अंगों के समन्वय पर बुरा असर पड़ता है।
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तीन माह तक गर्दन न संभाल पाना, आठ माह तक बिना सहारे न बैठना, खड़े होने या चलने में लगातार देरी होना, मांसपेशियों का बहुत ढीला या कठोर होना तथा हाथ-पैर में असामान्य हरकतें इसके संभावित लक्षण हैं। इसके अलावा, बोलने, देखने या सीखने में अपेक्षित प्रगति न होना भी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना का कहना है कि महीने में 30 से 40 बच्चे समस्या से पीड़ित आते हैं लेकिन कई बार संसाधनों के अभाव में उन्हें उच्च केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। ऐसे लक्षण दिखते ही अभिभावकों को तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन, गंभीर संक्रमण, मस्तिष्क में रक्तस्राव या चोट और ऑक्सीजन की कमी जैसी स्थितियां इसके मुख्य जोखिम कारक हैं।
इन संकेतों पर दें ध्यान
-जन्म के समय न रोना या सांस लेने में परेशानी
-तीन माह में गर्दन न संभालना
-आठ माह में बिना सहारे न बैठना
-खड़े होने या चलने में लगातार देरी
-मांसपेशियों में अत्यधिक ढीलापन या अकड़न
-हाथ-पैर में असामान्य ऐंठन या हरकत
-संतुलन, बोलने या देखने में परेशानी
-विकासात्मक गतिविधियों में अपेक्षित प्रगति न होना