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UP: कुर्सी पर बैठे-बैठे मौत...भतीजा समझ रहा था सो रहे हैं ताऊ, ऐसे चली गई जान
Thu, 11 Sep 2025 12:02 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:02 PM IST
सार
कोर्ट में तारीख पर भतीजे के साथ आए ताऊ की मौत हो गई। बताया गया है कि ताऊ को उसने कुर्सी पर बैठा दिया था। कोर्ट रूम से आवाज लगाई गई, तो वो ताऊ के पास पहुंचा। ताऊ को उठाया, तब पता चला कि उनकी तो मौत हो गई।
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death demo
- फोटो : iStock
विस्तार
कासगंज में जमीन के विवाद की बहस की तारीख करने कोर्ट आए वादी की अधिवक्ता चैंबर में अचानक मौत हो गई। परिजन उनके शव को घर ले गए। घटना उस समय हुई जब कोर्ट रूम में वादी का नाम पुकारा जा रहा था। जब वह नहीं पहुंचे तो उनका भतीजा बुलाने पहुंचा, उसने देखा कि ताऊ की मौत हो गई। यह घटना कोर्ट परिसर में चर्चा का विषय रही।
वादी रामदास (78) निवासी गांव मिलकिनिया थाना क्षेत्र सोरोंजी का वर्ष 2006 से वासुदेव से चबूतरे का विवाद कोर्ट में चल रहा था। इसमें बुधवार को बहस की तारीख लगी थी। वह अपने अधिवक्ता के चैंबर में कुर्सी पर बैठे हुए थे। अचानक साइलेंट अटैक से उनकी मौत हो गई। लोगों ने समझा वह सो रहे हैं। भतीजा अमर सिंह कोर्ट में आवाज सुनने के लिए खड़ा था। कोर्ट से जैसे ही आवाज लगी वह अपने ताऊ को बुलाने के लिए उनके पास आया।
अमर सिंह ने ताऊ को आवाज दी, लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो उनको हिलाकर देखा। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। जब लोगों को उनकी मौत की जानकारी हुई तो वे चकित रह गए। भतीजे अमर सिंह ने बताया कि चबूतरे का विवाद गांव के ही वासुदेव से चल रहा था। बहस की तारीख के चलते कोर्ट आए थे।
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वादी रामदास (78) निवासी गांव मिलकिनिया थाना क्षेत्र सोरोंजी का वर्ष 2006 से वासुदेव से चबूतरे का विवाद कोर्ट में चल रहा था। इसमें बुधवार को बहस की तारीख लगी थी। वह अपने अधिवक्ता के चैंबर में कुर्सी पर बैठे हुए थे। अचानक साइलेंट अटैक से उनकी मौत हो गई। लोगों ने समझा वह सो रहे हैं। भतीजा अमर सिंह कोर्ट में आवाज सुनने के लिए खड़ा था। कोर्ट से जैसे ही आवाज लगी वह अपने ताऊ को बुलाने के लिए उनके पास आया।
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अमर सिंह ने ताऊ को आवाज दी, लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो उनको हिलाकर देखा। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। जब लोगों को उनकी मौत की जानकारी हुई तो वे चकित रह गए। भतीजे अमर सिंह ने बताया कि चबूतरे का विवाद गांव के ही वासुदेव से चल रहा था। बहस की तारीख के चलते कोर्ट आए थे।
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