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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kasganj News ›   Crop residue will become a source of income for the farm, not a burden.

Kasganj News: खेत के लिए बोझ नहीं, कमाई का जरिया बनेगी पराली

Tue, 06 Oct 2026 11:47 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:47 PM IST
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कासगंज। धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को आग लगाने की पुरानी परंपरा अब खेत की सेहत सुधारने के एक नए विकल्प में बदल सकती है। फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को बचाने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने के साथ आधुनिक प्रबंधन के तरीके अपनाने पर जोर दिया है।
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इसके तहत गांवों में विशेष अभियान, प्रचार वाहन और होर्डिंग्स के माध्यम से लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। मोहनपुरा कृषि विज्ञान केंद्र के पादप संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. रीतेश ने बताया कि सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, मल्चर और रोटावेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से पराली को खेत में ही आसानी से मिलाया और प्रबंधित किया जा सकता है। इससे न केवल पराली जलाने की जरूरत खत्म होती है, बल्कि खेत में प्राकृतिक जैविक पदार्थों की मात्रा भी बनी रहती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, पराली को जलाने के बजाय पशु चारे, कम्पोस्ट खाद और बायोमास के रूप में भी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार किसानों को इन कृषि यंत्रों पर अनुदान देकर प्रोत्साहित कर रही है, ताकि जिस पराली को किसान अब तक खेत के लिए बोझ मानते थे, उसे एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सके।
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इतना जुर्माना लगेगा
2 एकड़ से कम - 5,000 रुपये
2 से 5 एकड़ तक - 10,000 रुपये
5 एकड़ से अधिक - 30,000 रुपये

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वर्जन
इन-सीटू योजना के तहत किसानों, सहकारी समितियों और एफपीओ को फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान दिया जाता है। उद्देश्य है कि किसान पराली में आग लगाने के बजाय तकनीक के जरिए उसका प्रबंधन करें। - डाॅ. आकाश, कृषि प्रसार अधिकारी, मोहनपुरा कृषि विज्ञान केंद्र
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