{"_id":"6acd2109f67703b1aa0966ce","slug":"accusation-of-fabricating-medical-documents-in-a-land-dispute-kasganj-news-c-175-1-kas1003-155446-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kasganj News: जमीन के विवाद में फर्जी मेडिकल दस्तावेज बनाने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kasganj News: जमीन के विवाद में फर्जी मेडिकल दस्तावेज बनाने का आरोप
विज्ञापन
कासगंज। जमीन विवाद से जुड़े मामले में अदालत को गुमराह करने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करने के आरोप में छह लोगों पर गाज गिरी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश पर थाना सहावर में यह प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मामला सहावर के मोहल्ला कटरा नई बस्ती निवासी नूरुल इस्लाम और प्रतिवादियों के बीच गांव गुनार स्थित एक बाग के स्वामित्व का है। नूरुल इस्लाम ने डॉ. शशिप्रभा व वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में वाद दाखिल किया था, जो 25 फरवरी 2026 को उनके पक्ष में डिक्री हो गया। आरोप है कि इसके बावजूद आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर अदालत को गुमराह करने की नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
मुख्य आरोपी वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ ने खुद को गंभीर बीमार बताते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहावर के नाम से 22 जनवरी से मार्च 2026 के बीच के फर्जी पंजीकरण नंबर और 15 दिन के बेड रेस्ट के कूटरचित पर्चे बनवाए। इन्हें सिविल न्यायालय में प्रार्थना पत्र के साथ पेश किया गया।
विज्ञापन
जब पीड़ित ने आरटीआई के तहत जांच कराई, तो 10 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि ये सभी पर्चियां और पंजीकरण पूरी तरह फर्जी हैं। अस्पताल में ऐसा कोई इलाज नहीं हुआ था और न ही डॉक्टरों के हस्ताक्षर थे। आरोपियों ने फर्जी मुहर बनाकर यह जालसाजी की थी।
सीओ दुर्गेश कुमार मिश्र के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ, डॉ. शशिप्रभा सिद्धार्थ, सिद्धार्थ, पूरन सिंह, विशुनदयाल और श्रीपाल निवासी नरसैना, थाना उझानी, बदायूं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
विज्ञापन
मामला सहावर के मोहल्ला कटरा नई बस्ती निवासी नूरुल इस्लाम और प्रतिवादियों के बीच गांव गुनार स्थित एक बाग के स्वामित्व का है। नूरुल इस्लाम ने डॉ. शशिप्रभा व वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ के खिलाफ सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में वाद दाखिल किया था, जो 25 फरवरी 2026 को उनके पक्ष में डिक्री हो गया। आरोप है कि इसके बावजूद आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर अदालत को गुमराह करने की नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
विज्ञापन
मुख्य आरोपी वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ ने खुद को गंभीर बीमार बताते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहावर के नाम से 22 जनवरी से मार्च 2026 के बीच के फर्जी पंजीकरण नंबर और 15 दिन के बेड रेस्ट के कूटरचित पर्चे बनवाए। इन्हें सिविल न्यायालय में प्रार्थना पत्र के साथ पेश किया गया।
विज्ञापन
जब पीड़ित ने आरटीआई के तहत जांच कराई, तो 10 अप्रैल 2026 को स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि ये सभी पर्चियां और पंजीकरण पूरी तरह फर्जी हैं। अस्पताल में ऐसा कोई इलाज नहीं हुआ था और न ही डॉक्टरों के हस्ताक्षर थे। आरोपियों ने फर्जी मुहर बनाकर यह जालसाजी की थी।
सीओ दुर्गेश कुमार मिश्र के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर वीरेंद्र प्रकाश सिद्धार्थ, डॉ. शशिप्रभा सिद्धार्थ, सिद्धार्थ, पूरन सिंह, विशुनदयाल और श्रीपाल निवासी नरसैना, थाना उझानी, बदायूं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।