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शिवसेना के कार्यकर्ताओं को तिरंगा फहराने से रोका, पुलिस ने की गिरफ्तारी
Sat, 26 Jan 2019 10:19 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: राजेश सैनी
Updated Sat, 26 Jan 2019 10:19 PM IST
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वाराणसी में पुलिस ने शिवसेना के कार्यकर्ताओं को तिरंगा फहराने से रोका। शिवसेना के कार्यकर्ता पंचगंगा घाट स्थित माधव राज धरहरा पर तिरंगा झंडा फहराने जा रहे थे, जिसके बाद पुलिस और शिवसेना के कार्यकर्ताओं में नोकझोंक हुई और पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
वाराणसी के अस्सी घाट से 70 वें गणतंत्र दिवस खुशियों में तिरंगा यात्रा लेकर निकले शिवसैनिकों को तिरंगा फहराने से जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में रोककर हिरासत में ले लिया। शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरुण पाठक ने कहा कि जब पहली बार 1995 में माधव राज धराहरा पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था, उसके बाद उन्हें गिरफ्तार करते हुए एक हफ्ते के लिए जेल भेज दिया गया। उसके बाद सन 1997 में भी पुलिस ने तिरंगा फहराने से रोकते हुए उन्हें 23 दिनों के लिए जेल भेज दिया था। अरुण पाठक ने कहा कि तब से हर वर्ष तिरंगा यात्रा निकाल उस स्थल पर तिरंगा फहराने का प्रयास करते हैं और जिला प्रशासन की तरफ से भारी भरकम पुलिस फोर्स लगाकर उन्हें रास्ते से ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।
अरुण पाठक ने कहा कि यह हमारी गिरफ्तारी नहीं तिरंगे की भी गिरफ्तारी है। अरुण पाठक ने मांग की है कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी आम जनता कोई भी वहां तिरंगा फहराए क्योंकि हमारा राष्ट्रीय पर्व और हम अपने ही देश में अपने राष्ट्रीय ध्वज को नहीं फहरा सकते तो कोई बात नहीं। कोई भी जाकर वहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराए क्योंकि आजाद देश में हम अपना ही तिरंगा अपने भारतवर्ष में नहीं फहराएंगे तो हमारी आन, बान और शान की गौरव गाथा समेटे अपने तिरंगे को कहां फहराने जाएंगे। जिस जगह पर शिवसेना कार्यकर्ताओं को तिरंगा फहराने से रोका जाता है वह विंदु माधव का मंदिर है जिसे औरंगजेब ने पुरवा की मस्जिद बनवा दिया है।
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वाराणसी के अस्सी घाट से 70 वें गणतंत्र दिवस खुशियों में तिरंगा यात्रा लेकर निकले शिवसैनिकों को तिरंगा फहराने से जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में रोककर हिरासत में ले लिया। शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरुण पाठक ने कहा कि जब पहली बार 1995 में माधव राज धराहरा पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था, उसके बाद उन्हें गिरफ्तार करते हुए एक हफ्ते के लिए जेल भेज दिया गया। उसके बाद सन 1997 में भी पुलिस ने तिरंगा फहराने से रोकते हुए उन्हें 23 दिनों के लिए जेल भेज दिया था। अरुण पाठक ने कहा कि तब से हर वर्ष तिरंगा यात्रा निकाल उस स्थल पर तिरंगा फहराने का प्रयास करते हैं और जिला प्रशासन की तरफ से भारी भरकम पुलिस फोर्स लगाकर उन्हें रास्ते से ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।
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अरुण पाठक ने कहा कि यह हमारी गिरफ्तारी नहीं तिरंगे की भी गिरफ्तारी है। अरुण पाठक ने मांग की है कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी आम जनता कोई भी वहां तिरंगा फहराए क्योंकि हमारा राष्ट्रीय पर्व और हम अपने ही देश में अपने राष्ट्रीय ध्वज को नहीं फहरा सकते तो कोई बात नहीं। कोई भी जाकर वहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराए क्योंकि आजाद देश में हम अपना ही तिरंगा अपने भारतवर्ष में नहीं फहराएंगे तो हमारी आन, बान और शान की गौरव गाथा समेटे अपने तिरंगे को कहां फहराने जाएंगे। जिस जगह पर शिवसेना कार्यकर्ताओं को तिरंगा फहराने से रोका जाता है वह विंदु माधव का मंदिर है जिसे औरंगजेब ने पुरवा की मस्जिद बनवा दिया है।
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