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संगीन धाराएं हटीं, उपद्रवियों की जमानत हुई आसान
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अग्निपथ योजना के विरोध में सेना में भर्ती को लेकर हुई आगजनी, तोड़फोड़, डकैती, लूटपाट और हत्या के प्रयास जैसे संगीन धाराओं में विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज हुई प्राथमिकी के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट से आरोपियों की जमानत निरस्त हो गई। लेकिन, कई गंभीर धाराओं में कोर्ट ने रिमांड नहीं स्वीकृत किया, जिसकी वजह से अब सेशन कोर्ट से आरोपितों के जमानत की राह आसान हो गई है।
लाइन बाजार थाना में उपद्रवियों के खिलाफ धारा 147,148,330,342,307, 336,427,353,283,435,186 आईपीसी तथा 7 सी एल ए की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई आरोपी पर उग्र होकर पथराव करने,पुलिस बल को जान से मारने की नीयत से हमला करने, सरकारी वाहन को आग लगाने,सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया गया, लेकिन मजिस्ट्रेट ने केवल धारा 148,332, 336, 342,353,504,506 आईपीसी धारा 3 प्राथमिक संपत्ति निवारण अधिनियम एवं धारा 7 सी एल ए में रिमांड स्वीकार किया। हत्या के प्रयास,आगजनी जैसी गंभीर धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दिया गया। इसी प्रकार सिकरारा थाने में उपद्रवियों के खिलाफ छह प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जिसमें से तीन प्राथमिकी गंभीर धाराओं में थी, जिसमें डकैती,लूट,संपत्ति को क्षति इत्यादि धाराएं लगी थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया तथा एक प्राथमिकी अज्ञात में थी। जिन दो प्राथमिकी को स्वीकृत किया, उसमें प्राथमिकी में धारा 307, 147, 283, 183, 186, 188 आईपीसी की धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दिया। शेष धाराएं स्वीकार किया। सिकरारा की जिन तीन प्राथमिकी को मजिस्ट्रेट ने सिरे से अस्वीकार कर दयि़ा उस पर राज्य ऊपरी अदालत में रिवीजन फाइल करेगा। इसी प्रकार बदलापुर थाने की प्राथमिकी में संगीन धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दी गई।
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लाइन बाजार थाना में उपद्रवियों के खिलाफ धारा 147,148,330,342,307, 336,427,353,283,435,186 आईपीसी तथा 7 सी एल ए की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई आरोपी पर उग्र होकर पथराव करने,पुलिस बल को जान से मारने की नीयत से हमला करने, सरकारी वाहन को आग लगाने,सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया गया, लेकिन मजिस्ट्रेट ने केवल धारा 148,332, 336, 342,353,504,506 आईपीसी धारा 3 प्राथमिक संपत्ति निवारण अधिनियम एवं धारा 7 सी एल ए में रिमांड स्वीकार किया। हत्या के प्रयास,आगजनी जैसी गंभीर धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दिया गया। इसी प्रकार सिकरारा थाने में उपद्रवियों के खिलाफ छह प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जिसमें से तीन प्राथमिकी गंभीर धाराओं में थी, जिसमें डकैती,लूट,संपत्ति को क्षति इत्यादि धाराएं लगी थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया तथा एक प्राथमिकी अज्ञात में थी। जिन दो प्राथमिकी को स्वीकृत किया, उसमें प्राथमिकी में धारा 307, 147, 283, 183, 186, 188 आईपीसी की धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दिया। शेष धाराएं स्वीकार किया। सिकरारा की जिन तीन प्राथमिकी को मजिस्ट्रेट ने सिरे से अस्वीकार कर दयि़ा उस पर राज्य ऊपरी अदालत में रिवीजन फाइल करेगा। इसी प्रकार बदलापुर थाने की प्राथमिकी में संगीन धाराओं में रिमांड अस्वीकृत कर दी गई।
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