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साल भर बिना छुट्टी लिए निभा रहीं कोविड टीकाकरण की जिम्मेदारी
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जौनपुर। करंजाकला ब्लॉक के जंगीपुरकला में एएनएम के पद पर तैनात शकुंतला पाठक एक साल से बिना छुट्टी लिए ही कोविड टीकाकरण की जिम्मेदारी निभा रही है। उन्हें बहाउद्दीनपुर का भी अतिरिक्त कार्य भार मिला है। मां की बीमारी के बाद भी वह नियमित रूप से ड्यूटी कर रही हैं। उनकी मां लगभग 10 महीने से अस्वस्थ हैं। फिर भी वह उन्हें दवा देकर ड्यूटी पर पहुंचती हैं। दोपहर में फोन कर मां का हालचाल लेती रहती हैं।
इन्हीं स्थितियों में ही उन्होंने जनवरी 2021 से अभी तक लगातार ड्यूटी की और रविवार को भी बिना अवकाश लिए काम कर रही हैं। 16 जनवरी 2021 में टीकाकरण की शुरूआत हुई। एक दिन में करीब 300 से 400 लोगों का टीकाकरण लग रहा था। बाद में शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने के लिए वह गांव-गांव जाने लगीं। इसका नतीजा यह रहा कि वह क्षेत्र के लगभग 10,000 लोगों का टीकाकरण करवा चुकीं हैं। हालांकि कई लोगों ने टीका लगवाने से मना किया तब ऐसे लोगों को समझाने का भरपूर प्रयास किया। ग्राम प्रधान को लेकर भी लोगों के बीच गईं तब जाकर लोग टीकाकरण को तैयार हुए। रूटीन टीकाकरण के लिए आने वालों को भी उन्होंने कोविड टीकाकरण की खूबियां बताईं। इसके चलते आज उनके क्षेत्र में 10,000 के करीब लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
चलने में असमर्थ लोगों को घर जाकर लगाया टीका
जौनपुर। शकुंतला पाठन ने इस दौरान कई असहाय लोगों की भी मदद की। बहाउद्दीनपुर की 77 साल की एक महिला जो चलने-फिरने में असमर्थ थीं। जब उनके बेटे ने फोन कर स्थिति बताई तो उनके घर जाकर टीका लगाया। इसी गांव में प्रजापति परिवार में 70 वर्षीय महिला का पैर टूटा हुआ था। वह स्वास्थ्य केंद्र पर आने में असमर्थ थीं। उनके बेटे ने फोन किया तो उन्हें भी घर जाकर टीका लगाया। ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने मानवता की मिसाल कायम की। कोविड के नोडल अधिकारी डा. जियाउल हक कहते हैं कि शंकुतला को जो भी जिम्मेदारी दी जाती है उस पर पूरी जिम्मेदारी के साथ लग जाती हैं।
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इन्हीं स्थितियों में ही उन्होंने जनवरी 2021 से अभी तक लगातार ड्यूटी की और रविवार को भी बिना अवकाश लिए काम कर रही हैं। 16 जनवरी 2021 में टीकाकरण की शुरूआत हुई। एक दिन में करीब 300 से 400 लोगों का टीकाकरण लग रहा था। बाद में शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने के लिए वह गांव-गांव जाने लगीं। इसका नतीजा यह रहा कि वह क्षेत्र के लगभग 10,000 लोगों का टीकाकरण करवा चुकीं हैं। हालांकि कई लोगों ने टीका लगवाने से मना किया तब ऐसे लोगों को समझाने का भरपूर प्रयास किया। ग्राम प्रधान को लेकर भी लोगों के बीच गईं तब जाकर लोग टीकाकरण को तैयार हुए। रूटीन टीकाकरण के लिए आने वालों को भी उन्होंने कोविड टीकाकरण की खूबियां बताईं। इसके चलते आज उनके क्षेत्र में 10,000 के करीब लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
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चलने में असमर्थ लोगों को घर जाकर लगाया टीका
जौनपुर। शकुंतला पाठन ने इस दौरान कई असहाय लोगों की भी मदद की। बहाउद्दीनपुर की 77 साल की एक महिला जो चलने-फिरने में असमर्थ थीं। जब उनके बेटे ने फोन कर स्थिति बताई तो उनके घर जाकर टीका लगाया। इसी गांव में प्रजापति परिवार में 70 वर्षीय महिला का पैर टूटा हुआ था। वह स्वास्थ्य केंद्र पर आने में असमर्थ थीं। उनके बेटे ने फोन किया तो उन्हें भी घर जाकर टीका लगाया। ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने मानवता की मिसाल कायम की। कोविड के नोडल अधिकारी डा. जियाउल हक कहते हैं कि शंकुतला को जो भी जिम्मेदारी दी जाती है उस पर पूरी जिम्मेदारी के साथ लग जाती हैं।
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