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पूविवि: दो महीने बाद भी दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर पाई दाखिले की संख्या

Sat, 21 Jun 2025 12:50 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jun 2025 12:50 AM IST
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PU: Even after two months, the number of admissions could not cross the double digit
करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के स्ववित्तपोषित और अनुदानित डिग्री कॉलेजों में दाखिले की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक अधिकांश कॉलेजों में दाखिले की संख्या दहाई का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाई है। दर्जनों कॉलेज तो ऐसे हैं जहां एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है। इससे निजी महाविद्यालयों के प्रबंधकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जौनपुर और गाजीपुर जिले के लगभग 590 महाविद्यालय संबद्ध हैं। अप्रैल में इंटरमीडिएट का परिणाम आने के बाद विवि प्रशासन ने दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। दो महीने बाद भी कॉलेजों में दाखिलों का आंकड़ा बेहद कम है। प्रबंधक महासंघ के अध्यक्ष दिनेश तिवारी के अनुसार, दोनों जनपदों के करीब 350 कॉलेजों में किसी भी विभाग की एक भी सीट नहीं भर पाई है। अनुदानित डिग्री कॉलेजों में भी दाखिले की गति बेहद धीमी है। वहीं, जिन निजी कॉलेजों में पिछले साल अच्छी संख्या में दाखिले हुए थे, वहां भी इस बार शून्यता बनी हुई है। प्रबंधकों का कहना है कि हालात ऐसे ही रहे तो कॉलेजों को संचालित करना कठिन हो जाएगा।
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ये हैं गिरते दाखिलों के प्रमुख कारण
अब छात्र बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों के बजाय प्रोफेशनल कोर्स में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।

विवि में दो सेमेस्टर और दो सम सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली से ग्रामीण क्षेत्र के छात्र पढ़ाई की कठोरता से बचने के लिए ऑनलाइन या अन्य विकल्पों की ओर जा रहे हैं।
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विवि स्तर से भी कई नये प्रोफेशनल कोर्स और बीए, बीएससी जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं, इससे छात्रों का रुझान महाविद्यालयों से हट रहा है।

पंजीकरण से लेकर दो बार परीक्षा शुल्क, अनिवार्य विषय शुल्क, सुधार शुल्क आदि ने छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। इससे भी छात्र दाखिले से बच रहे हैं।

सभी कॉलेजों को समर्थ पोर्टल के माध्यम से प्रवेश कराने को निर्देश दिया गया है। साथ ही आसपास के इंटर कॉलेजों से संपर्क कर छात्रों की संख्या बढ़ाने को भी कहा गया है। विश्वविद्यालय लगातार इसकी निगरानी कर रहा है। - डाॅ. विनोद कुमार सिंह, कुलसचिव
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