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नई महायोजना में बनेंगे नए औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्र
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जौनपुर। आबादी के साथ तेजी से बढ़ते शहर को सुनियोजित रूप देने के लिए महायोजना-2031 पर काम शुरू हो गया है। नई महायोजना में शहर को भीड़ से बचाने और जाम से निजात दिलाने पर विशेष जोर है। इसके लिए शहर की ऐतिहासिकता को ध्यान में रखते हुए नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने पर काम हो रहा है। इन इलाकों में सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता और आवागमन की सहूलियत पर ध्यान रहेगा। सरकारी कार्यालयों को भी नए इलाके में शिफ्ट करने पर विचार चल रहा है, जिससे एक खास इलाके में बना यातायात का दबाव कम हो सके।
शहर को सुव्यवस्थित तरीके बसाने के लिए वर्ष 2007 में महायोजना-2021 तैयार की गई थी। तब 2021 तक ढाई लाख की आबादी को आधार मानते हुए विकास का खाका खींचा गया था। पिछले कुछ वर्षों में शहर की आबादी तेजी से बढ़ी है। सीमा विस्तार के बाद आसपास के 24 गांव शहर में शामिल हो गए हैं। अब आबादी साढ़े तीन लाख के करीब पहुंच गई है। पुराने शहर में जनसंख्या का दबाव तो बढ़ ही रहा है, नए इलाके भी विकसित हो रहे हैं। इनकी बसावट मनमाने ढंग से हैं। न तो सड़क, पानी, नाली और बिजली की सुविधाओं का ध्यान है और न ही आवागमन की सहूलियत का। ऐसे में यहां बसने वाले परेशानी से जूझ रहे हैं।
सीहीपुर रेलवे क्रॉसिंग से जगदीशपुर रेलवे क्रॉसिंग के बीच ही नए इलाकों का दायरा सीमित रहने से इस क्षेत्र में सर्वाधिक समस्याएं हैं। यहां ट्रैफिक का दबाव है तो प्रदूषण का खतरा भी इसी क्षेत्र में है। आगामी दिनों में यह संकट और बढ़ने की आशंका है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने अगले दस वर्षों के लिए नई महायोजना तैयार कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसे मई तक तैयार करने को कहा गया है, जिससे उसका अध्ययन कर उसे शीघ्र लागू किया जा सके।
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नई महायोजना में यह होगा खास :कार्यालयों का विकेंद्रीकरण
वर्तमान में कलेक्ट्रेट, कचहरी, विकास भवन, जेल, पुलिस ऑफिस, सदर तहसील, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड, एसबीआई का क्षेत्रीय कार्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय सहित तमाम सरकारी कार्यालय मियांपुर तिराहे से आंबेडकर तिराहे के मध्य ही स्थित हैं। इसके चलते इस इलाके में हर वक्त जाम की समस्या रहती है। जिन लोगों को इन कार्यालयों में नहीं जाना होता, उन्हें भी बेवजह जाम से जूझना पड़ता है। नई महायोजना में कार्यालयों के विकेंद्रीकरण पर जोर है। कई कार्यालयों को शहर के दूसरे क्षेत्रों में भी शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वहां का दबाव इस इलाके से कम हो।
नए इलाके बसाने पर जोर: सीहीपुर रेलवे क्रॉसिंग से जगदीशपुर रेलवे क्रॉसिंग के बीच शहर बेतरतीब हो चुका है। हाईवे से जुड़ा होने के कारण लोग इसी क्षेत्र में बसने को प्राथमिकता देते हैं। नई महायोजना में आवासीय इलाके को नए क्षेत्र में बसाने पर जोर रहेगा। निर्माणाधीन फोरलेन से सटे और नई नवसृजित नगर पंचायत कजगांव मार्ग और जफराबाद की ओर भी इसके लिए नई संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इन इलाकों से कनेक्टिविटी सुधारी जाएगी, जिससे लोगों को वहां बसने में दिक्कत न हो।
कृषि भूमि पर निर्माण में नहीं होगी दिक्कत
नगर पालिका क्षेत्र से बाहर निर्माण कराने पर कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक में बदलने की बाध्यता रहती है। महायोजना-2031 में आसपास के गांवों को नगरीय क्षेत्र में शामिल किया जाएगा, जिससे भूमि का स्वरूप बदलवाने में होने वाली दिक्कतें दूर होंगी।
महायोजना-2031 के लिए डाटा एकत्र कर लिए गए हैं। कंसल्टेंट को नई महायोजना बनाने का जिम्मा सौंपा जा चुका है। पुरानी महायोजना में जो कमियां रह गई, उसे दूूर किया जाएगा। इस महायोजनाओं में शहर में नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने, जाम से निजात दिलाने, सरकारी कार्यालयों केे विकेंद्रीकरण सहित अन्य बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भविष्य का शहर सुनियोजित और सुंदर हो सके।
-रोहन यादव, जेई, मास्टर प्लान
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शहर को सुव्यवस्थित तरीके बसाने के लिए वर्ष 2007 में महायोजना-2021 तैयार की गई थी। तब 2021 तक ढाई लाख की आबादी को आधार मानते हुए विकास का खाका खींचा गया था। पिछले कुछ वर्षों में शहर की आबादी तेजी से बढ़ी है। सीमा विस्तार के बाद आसपास के 24 गांव शहर में शामिल हो गए हैं। अब आबादी साढ़े तीन लाख के करीब पहुंच गई है। पुराने शहर में जनसंख्या का दबाव तो बढ़ ही रहा है, नए इलाके भी विकसित हो रहे हैं। इनकी बसावट मनमाने ढंग से हैं। न तो सड़क, पानी, नाली और बिजली की सुविधाओं का ध्यान है और न ही आवागमन की सहूलियत का। ऐसे में यहां बसने वाले परेशानी से जूझ रहे हैं।
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सीहीपुर रेलवे क्रॉसिंग से जगदीशपुर रेलवे क्रॉसिंग के बीच ही नए इलाकों का दायरा सीमित रहने से इस क्षेत्र में सर्वाधिक समस्याएं हैं। यहां ट्रैफिक का दबाव है तो प्रदूषण का खतरा भी इसी क्षेत्र में है। आगामी दिनों में यह संकट और बढ़ने की आशंका है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने अगले दस वर्षों के लिए नई महायोजना तैयार कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसे मई तक तैयार करने को कहा गया है, जिससे उसका अध्ययन कर उसे शीघ्र लागू किया जा सके।
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नई महायोजना में यह होगा खास :कार्यालयों का विकेंद्रीकरण
वर्तमान में कलेक्ट्रेट, कचहरी, विकास भवन, जेल, पुलिस ऑफिस, सदर तहसील, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड, एसबीआई का क्षेत्रीय कार्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय सहित तमाम सरकारी कार्यालय मियांपुर तिराहे से आंबेडकर तिराहे के मध्य ही स्थित हैं। इसके चलते इस इलाके में हर वक्त जाम की समस्या रहती है। जिन लोगों को इन कार्यालयों में नहीं जाना होता, उन्हें भी बेवजह जाम से जूझना पड़ता है। नई महायोजना में कार्यालयों के विकेंद्रीकरण पर जोर है। कई कार्यालयों को शहर के दूसरे क्षेत्रों में भी शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वहां का दबाव इस इलाके से कम हो।
नए इलाके बसाने पर जोर: सीहीपुर रेलवे क्रॉसिंग से जगदीशपुर रेलवे क्रॉसिंग के बीच शहर बेतरतीब हो चुका है। हाईवे से जुड़ा होने के कारण लोग इसी क्षेत्र में बसने को प्राथमिकता देते हैं। नई महायोजना में आवासीय इलाके को नए क्षेत्र में बसाने पर जोर रहेगा। निर्माणाधीन फोरलेन से सटे और नई नवसृजित नगर पंचायत कजगांव मार्ग और जफराबाद की ओर भी इसके लिए नई संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इन इलाकों से कनेक्टिविटी सुधारी जाएगी, जिससे लोगों को वहां बसने में दिक्कत न हो।
कृषि भूमि पर निर्माण में नहीं होगी दिक्कत
नगर पालिका क्षेत्र से बाहर निर्माण कराने पर कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक में बदलने की बाध्यता रहती है। महायोजना-2031 में आसपास के गांवों को नगरीय क्षेत्र में शामिल किया जाएगा, जिससे भूमि का स्वरूप बदलवाने में होने वाली दिक्कतें दूर होंगी।
महायोजना-2031 के लिए डाटा एकत्र कर लिए गए हैं। कंसल्टेंट को नई महायोजना बनाने का जिम्मा सौंपा जा चुका है। पुरानी महायोजना में जो कमियां रह गई, उसे दूूर किया जाएगा। इस महायोजनाओं में शहर में नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित करने, जाम से निजात दिलाने, सरकारी कार्यालयों केे विकेंद्रीकरण सहित अन्य बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भविष्य का शहर सुनियोजित और सुंदर हो सके।
-रोहन यादव, जेई, मास्टर प्लान