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जमीन खोजने में लगे दो साल, सात साल बाद भी नहीं पूरा हुआ काम
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जौनपुर। आसरा आवास योजना मडि़याहूं में जमीन खोजने में पहले दो साल लग गया। इसके बाद किसी तरह काम शुरू हुआ तो सात साल से धनाभाव में लटक गया। इससे फ्री में छत पाने की आस लगाए गरीबों को तगड़ा झटका लगा है।
शहरी गरीबों, मजलूमों को छत मुहैया कराने के लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा सूडा विभाग से आसरा योजना संचालित किया था। इसके तहत, जनपद के सभी नगरीय इलाके में जमीन मुहैया कराने को कहा गया था। साल 2013 में लागू इस योजना के लिए मडि़याहूं को छोड़कर कहीं भी जिला प्रशासन जमीन नहीं मुहैया करा पाया था। इससे मडि़याहूं में 144 आवास बनाने का लक्ष्य तैयार किया गया। इसके लिए, पांच करोड़ 93 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ। इसे कार्यदायी संस्था सीएनडीएस और जल निगम वाराणसी को उपलब्ध भी करा दिया गया। 2015 में काम भी शुरू हुआ, जिम्मेदारों ने 72 आवास बना दिया गया। निर्माण राशि बढ़ता देख 24 आवास की कटौती कर दी गई, जिससे 120 आवास के लिए पांच करोड़ 69 लाख रुपये कर दी गई। बजट भी उपलब्ध करा दिया गया। इतना ही नहीं, इनमें 44 आवासों में पात्रों को आवास भी उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन, मौके पर जाकर देखने पर महज 70 प्रतिशत ही काम हुआ पाया जाता है।
अब तक 16 बार शासन को कराया जा चुका अवगत
जौनपुर। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कार्य में देरी के कारण निर्माण की लागत बढ़ गई। वहीं, निर्माण पूर्ण कराने के लिए ठेकेदार स्तर से डूडा से 23.83 लाख और जीएसटी का 20.63 लाख और मांग की जाने लगी। इसके संबंध में 24 जून 2020 से मई तक 16 बार शासन को अनुस्मारक पत्रक भेजा जा चुका है। लेकिन योजना में धन न होने के कारण कार्य बाधित कर दिया गया है।
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कांशीराम आवासीय योजना की तर्ज पर किया गया था लागू
जौनपुर। साल 2009 में बसपा सरकार ने प्रदेश कांशीराम आवासीय योजना लागू किया था। योजना के तहत भी गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए जगह-जगह भूमि की तलाश की गई थी, किंतु कुछ ही जगह योजना के तहत जमीन मिली। सिद्दीकपुर में भी आवास बनकर तैयार हुआ। सत्ता परिवर्तन होने पर योजना का नाम बदल दिया गया। साथ ही योजना की गाइड लाइन में भी संशोधन किया गया था। जिस पर अब ग्रहण लगता दिख रहा है, क्योंकि भाजपा की सरकार में भी योजना को दूसरे रूप में लागू की जा रही है।
आवास किसी को अलॉट, रह रहा कोई और
मडियाहूं। आसरा योजना के तहत ग्राम काजीपुर में एक वर्ष पूर्व लगभग 70 लोगों को आवास आवंटित हुआ था मगर पता लगाने पर यह जानकारी हुई कि 5-7 परिवार ही रह रहे हैं। मौके पर मौजूद तारा मौर्या ने बताया कि एक वर्ष हुआ मेरे पति सूर्यबली के नाम आवास अलॉट हुआ था। जो आवास अलाट हुआ था, वह तैयार नहीं है। इस कारण हमलोग राजकुमार जायसवाल के आवास में रह रहे रहे हैं। राजकुमार नहीं रहते हैं और वे हमलोगों से किराया भी नहीं लेते। वहीं, सरोजा देवी कहती हैं कि मैं अपने आवंटित किए गए आवास में रह रही हूं। बिजली पानी की व्यवस्था है। मगर चोरी का डर बना रहता है। जबकि दिलीप श्रीवास्तव के एलाट आवास में बिन्नी देवी रह रही हैं तो वहीं कल्पना शिल्पकार के आवंटित आवास में रेखा देवी रह रही है। मगर सबका कहना है कि कोई भी हमलोगों से किराया नहीं लेता।
कार्यदायी संस्था के स्तर से लापरवाही की जा रही है। इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। यदि काम पूरा नहीं हुआ तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी
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शहरी गरीबों, मजलूमों को छत मुहैया कराने के लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा सूडा विभाग से आसरा योजना संचालित किया था। इसके तहत, जनपद के सभी नगरीय इलाके में जमीन मुहैया कराने को कहा गया था। साल 2013 में लागू इस योजना के लिए मडि़याहूं को छोड़कर कहीं भी जिला प्रशासन जमीन नहीं मुहैया करा पाया था। इससे मडि़याहूं में 144 आवास बनाने का लक्ष्य तैयार किया गया। इसके लिए, पांच करोड़ 93 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ। इसे कार्यदायी संस्था सीएनडीएस और जल निगम वाराणसी को उपलब्ध भी करा दिया गया। 2015 में काम भी शुरू हुआ, जिम्मेदारों ने 72 आवास बना दिया गया। निर्माण राशि बढ़ता देख 24 आवास की कटौती कर दी गई, जिससे 120 आवास के लिए पांच करोड़ 69 लाख रुपये कर दी गई। बजट भी उपलब्ध करा दिया गया। इतना ही नहीं, इनमें 44 आवासों में पात्रों को आवास भी उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन, मौके पर जाकर देखने पर महज 70 प्रतिशत ही काम हुआ पाया जाता है।
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अब तक 16 बार शासन को कराया जा चुका अवगत
जौनपुर। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कार्य में देरी के कारण निर्माण की लागत बढ़ गई। वहीं, निर्माण पूर्ण कराने के लिए ठेकेदार स्तर से डूडा से 23.83 लाख और जीएसटी का 20.63 लाख और मांग की जाने लगी। इसके संबंध में 24 जून 2020 से मई तक 16 बार शासन को अनुस्मारक पत्रक भेजा जा चुका है। लेकिन योजना में धन न होने के कारण कार्य बाधित कर दिया गया है।
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कांशीराम आवासीय योजना की तर्ज पर किया गया था लागू
जौनपुर। साल 2009 में बसपा सरकार ने प्रदेश कांशीराम आवासीय योजना लागू किया था। योजना के तहत भी गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए जगह-जगह भूमि की तलाश की गई थी, किंतु कुछ ही जगह योजना के तहत जमीन मिली। सिद्दीकपुर में भी आवास बनकर तैयार हुआ। सत्ता परिवर्तन होने पर योजना का नाम बदल दिया गया। साथ ही योजना की गाइड लाइन में भी संशोधन किया गया था। जिस पर अब ग्रहण लगता दिख रहा है, क्योंकि भाजपा की सरकार में भी योजना को दूसरे रूप में लागू की जा रही है।
आवास किसी को अलॉट, रह रहा कोई और
मडियाहूं। आसरा योजना के तहत ग्राम काजीपुर में एक वर्ष पूर्व लगभग 70 लोगों को आवास आवंटित हुआ था मगर पता लगाने पर यह जानकारी हुई कि 5-7 परिवार ही रह रहे हैं। मौके पर मौजूद तारा मौर्या ने बताया कि एक वर्ष हुआ मेरे पति सूर्यबली के नाम आवास अलॉट हुआ था। जो आवास अलाट हुआ था, वह तैयार नहीं है। इस कारण हमलोग राजकुमार जायसवाल के आवास में रह रहे रहे हैं। राजकुमार नहीं रहते हैं और वे हमलोगों से किराया भी नहीं लेते। वहीं, सरोजा देवी कहती हैं कि मैं अपने आवंटित किए गए आवास में रह रही हूं। बिजली पानी की व्यवस्था है। मगर चोरी का डर बना रहता है। जबकि दिलीप श्रीवास्तव के एलाट आवास में बिन्नी देवी रह रही हैं तो वहीं कल्पना शिल्पकार के आवंटित आवास में रेखा देवी रह रही है। मगर सबका कहना है कि कोई भी हमलोगों से किराया नहीं लेता।
कार्यदायी संस्था के स्तर से लापरवाही की जा रही है। इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। यदि काम पूरा नहीं हुआ तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी