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रामपुर सकरा गांव की निषाद बस्ती राख
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:31 AM IST
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बरईपार के रामपुर सकरा गांव में शनिवार को लगी आग से घर गृहस्थी के सामान भी हो गए नष्ट।
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मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के रामपुर सकरा गांव की निषाद बस्ती में शनिवार की दोपहर बाद चूल्हे से निकली चिंगारी ने ऐसी तबाही मचाई की पूरी बस्ती जलकर राख हो गई। 24 परिवारों के 42 छप्पर और आधा दर्जन खपरैल जल गए। घरों में रखा गृहस्थी का सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया।
ग्रामीणों ने आग बुझाने की पूरी कोशिश की लेकिन इस बस्ती का एक भी घर सुरक्षित नहीं बचा। घरों के पास मौजूद आम, नीम, कटहल आदि के दर्जन भर हरे पेड़ भी जल गए। सूचना पर दमकल करीब दो घंटे बाद पहुंचा जरूर, लेकिन तब तक सबकुछ जल चुका था।
बस्ती के लोगों के तन पर मौजूद कपड़े के अलावा उनके पास कुछ भी नहीं बचा है। शाम को पहुंचे तहसीलदार और ग्राम प्रधान ने लोगों के खाने का इंतजाम कराया। रामपुर सकरा गांव की निषाद बस्ती के लोग मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। दोपहर में गेहूं काटकर लौटी रामदेव निषाद के घर की महिलाएं छप्पर में खाना बना रही थीं।
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किसी तरह आग छप्पर में लग गई। लोग आग बुझाने की कोशिश में लग गए। हवा के चलते आग तेजी से फैलने लगी। पास में मौजूद एक पंपिंग सेट चलाकर लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि आग तक पानी पहुंचाने में लोग लाचार दिखे।
एक के बाद एक कर के सुरेश, विनोद, रामलवट, राम आसरे, राधेश्याम, राजमणि, नन्हेलाल, रामदेव, रतीराम, गतिराम, भगी राम, अजय कुमार, रामपलट, रामकुमार, घनश्याम, सुबेदार, राजू, रामआसरे, माताफेर, रामसूरत, सभाजीत, सभापति, रमेश और कमलेश के 42 छप्पर और आधा दर्जन खपरैल राख हो गए।
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ग्रामीणों ने आग बुझाने की पूरी कोशिश की लेकिन इस बस्ती का एक भी घर सुरक्षित नहीं बचा। घरों के पास मौजूद आम, नीम, कटहल आदि के दर्जन भर हरे पेड़ भी जल गए। सूचना पर दमकल करीब दो घंटे बाद पहुंचा जरूर, लेकिन तब तक सबकुछ जल चुका था।
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बस्ती के लोगों के तन पर मौजूद कपड़े के अलावा उनके पास कुछ भी नहीं बचा है। शाम को पहुंचे तहसीलदार और ग्राम प्रधान ने लोगों के खाने का इंतजाम कराया। रामपुर सकरा गांव की निषाद बस्ती के लोग मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। दोपहर में गेहूं काटकर लौटी रामदेव निषाद के घर की महिलाएं छप्पर में खाना बना रही थीं।
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किसी तरह आग छप्पर में लग गई। लोग आग बुझाने की कोशिश में लग गए। हवा के चलते आग तेजी से फैलने लगी। पास में मौजूद एक पंपिंग सेट चलाकर लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि आग तक पानी पहुंचाने में लोग लाचार दिखे।
एक के बाद एक कर के सुरेश, विनोद, रामलवट, राम आसरे, राधेश्याम, राजमणि, नन्हेलाल, रामदेव, रतीराम, गतिराम, भगी राम, अजय कुमार, रामपलट, रामकुमार, घनश्याम, सुबेदार, राजू, रामआसरे, माताफेर, रामसूरत, सभाजीत, सभापति, रमेश और कमलेश के 42 छप्पर और आधा दर्जन खपरैल राख हो गए।