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डबल मर्डर से सनसनी: जौनपुर में पत्नी संग चचेरे भाई ने की दो बहनों की हत्या, शौचालय निर्माण को लेकर फावड़े से बोला हमला

Thu, 18 Nov 2021 03:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 18 Nov 2021 03:57 PM IST
सार

पुलिस ने बताया कि दो परिवारों में बीच लंबे समय से भूमि विवाद चल रहा है। जहां गुरुवार को एक परिवार उस जमीन पर शौचालय बना रहा था, जिसका दूसरे परिवार ने विरोध किया।

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double murder in jaunpur: uncle and aunt killed two real sisters by shovels for construction of toilet in Jaunpur
घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में दोहरे हत्याकांड की घटना सामने आई है। सिकरारा थाना क्षेत्र के हरखपुर कुकरिहांव गांव में विवादित जमीन पर शौचालय बनाने को लेकर बृहस्पतिवार को चचेरे भाई-भाभी ने दो सगी बहनों की धारदार हथियार से हत्या कर दी जबकि छोटा भाई बुरी तरह घायल हो गया। उसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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सुरक्षा के दृष्टि से गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है। एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मृतका के भाई जतिन पांडेय की तहरीर पर आशीष और उसकी पत्नी ममता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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लंबे समय से चल रहा था भूमि विवाद
शिवशंकर पांडेय और रमाशंकर पांडेय के बीच भूमि विवाद लंबे समय से चल रहा है। शुक्रवार को दिन में 11 बजे घर से करीब 50 मीटर दूर रमाशंकर पांडेय का बेटा आशीष शौचालय का निर्माण करा रहा था। शिवशंकर की बेटी पूर्णिमा (24), अंतिमा (19) और बेटा जतिन उर्फ बंटी (21) ने इसका विरोध किया। इस पर दोनों परिवार के लोग उलझ गए।
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पति आशीष के साथ उसकी पत्नी ममता भी मारपीट करने लगी। आरोप है कि आशीष ने पहले से अपने पास रखे बांका से दोनों सगी बहनों पर कई वार किए, इससे उनकी मौके पर मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आशीष ने दोनों बहनों की हत्या के बाद उसने जतिन पर भी बांके से वार किया। हालांकि वह किसी तरह जान बचा कर भाग निकला।

वारदात के बाद भागना चाहते थे आरोपी

दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी दंपती भागना चाहते थे। लेकिन, ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें घर के बगल से गिरफ्तार कर लिया, साथ ही उनकी निशानदेही पर बांका भी बरामद कर लिया। थानाध्यक्ष सिकरारा सैयद हुसेन मुंतजर, सीओ सदर रणविजय सिंह ने घायल जतिन को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं, दोपहर ढाई बजे पहुंचे एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार, एडीएम राम प्रकाश ने घटना के बारे में जानकारी हासिल की।  

जिससे लिया था रक्षा का वादा उसी ने ले ली जान

चचेरे भाई-भाभी द्वारा दिनदहाड़े सगी बहनों की हत्या की वारदात के बाद गांव में  सन्नाटा पसरा है। बहनों की हत्या की सूचना पर अपनी ससुराल अलईया(सुजानगंज) से पति प्रतीक उपाध्याय के साथ रोते बिलखते मायके पहुंची पुष्पा को अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी प्यारी बहनें इस दुनिया में नहीं हैं। उसने कहा कि जिसकी कलाई में राखी बांधकर कर दोनों बहनों ने अपनी सुरक्षा का वचन लिया था उसी ने खून कर दिया।  

कहा कि ताऊ और पिता जी में भले ही जमीन के विवाद को लेकर मनमुटाव था लेकिन हम बहनों में ऐसी कोई भावना नहीं थी। आशीष को भी हम भाई ही जानते थे। लेकिन वह तो बहनों का हत्यारा निकला। ताऊ के बेटे पर इस तरह का खून सवार हुआ कि दोनों बहनों की जिंदगी ही छीन ली। भगवान ने ही बचा लिया वर्ना शायद इकलौते भाई की भी जान नहीं बचती। उसने आशंका जताई कि आशीष के जेल से बाहर आने पर उसके भाई को जान का खतरा है। 

हत्यारोपी और मृत बहनों के माता-पिता रहते हैं मुम्बई

जमीन के विवाद को लेकर दो बहनों की हत्या से हर कोई सकते में है। उस खूनी मंजर को जिसने भी देखा रूह कांप जा रही है। रमाशंकर पांडेय, शिव शंकर, विजय शंकर, संतोष व दिव्यांग पवन पांच सगे भाई हैं। सभी पुराने पुश्तैनी मकान के अलग सुविधानुसार घर बनवाकर रहते हैं। पवन अपनी माता सुभद्रा के साथ पुराने घर पर ही रहता है।

जमीन का बंटवारा आपसी सहमति से करके सभी खेती करते है। घर के पास स्थित एक बीघे जमीन को चार बराबर हिस्से में बाटा गया था। रमाशंकर के हिस्से की जमीन में उसके बेटे आशीष ने बृहस्पतिवार की सुबह शौचालय बनवाना शुरू किया तो पक्की नाप के बाद ही नया निर्माण करवाने की बात कहते हुए पूर्णिमा, अंतिमा व जतिन विरोध करने लगे। इसी बात को लेकर आशीष व उसकी पत्नी ने दोनों बहनों की हत्या कर दी।

अभियुक्त आशीष व जतिन के माता-पिता घटना के समय मुंबई  में थे। आशीष और जतिन दोनों अपने मां-बाप के इकलौते बेटे हैं। शिव शंकर मुंबई टूर एंड ट्रेवेल कंपनी में कार चला कर परिवार चलाते हैं । बेटियों की हत्या की खबर पाकर वे घर रवाना हो गए हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि यदि परिवार के मुखिया घर पर होते तो शायद घटना टल सकती थी।

 

बेटियों के हाथ पीले करने का सपना रह गया अधूरा

जिन बेटियों के हाथ पीले करने की ख्वाहिश में शिवशंकर दिन-रात एक कर मुंबई की सड़कों पर कार दौड़ाते थे उसे अपने ही भतीजे ने एक पल में चूर कर दिया। शिवशंकर पांडेय की पांच बेटियां पूनम, पूजा, पुष्पा, पूर्णिमा, अंतिमा थी। इनमें सबसे बड़ी पूनम का शादी के बाद निधन हो गया था। पूजा व पुष्पा की शादी हो चुकी है।

जबकि बाद की दोनों बेटियों की शादी करनी थी। उनकी मंझली बेटी पुष्पा ने बताया कि पापा हमेशा दोनों छोटी बेटियों की शादी की चर्चा किया करते थे। वे इसी उद्देश्य से कभी लंबी छुट्टी नहीं लेते थे। अंतिमा से उसका भाई जतिन बड़ा है। उनका कहना था कि पहले बेटियों के हाथ पीले करके फिर बेटे के लिए बहू घर लाएंगे। लेकिन सारे सपने बिखर गए। 
 
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