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आसमान में बादलों ने बढ़ाई चिंता, बारिश की आशंका से सहमे किसान

Fri, 12 Mar 2021 11:22 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 11:22 PM IST
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Clouds in the sky increase concern, farmers fearing rain
जलालपुर में बादल छाने के बाद चिंतित किसान अपनी फसल के पास खड़े होकर आसमान की तरफ देखता हुआ। संवाद - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। मौसम के रुख में अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पकने को तैयार गेहूं की फसल पर मौसम की मार किसी भी हाल में नुकसान पहुंचाने वाली होगी। सरसों, चना, अरहर के लिए भी इस वक्त यह मौसम अनुकूल नहीं माना जा रहा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नमी से इससे दलहनी फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ेगा, जिससे फसल बुरी तरह चौपट होने का खतरा है।
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मार्च के दूसरे सप्ताह में अमूमन मौसम में बदलाव देखा जाता है। पिछले वर्षों में तेज हवा, आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से फसलों को काफी क्षति पहुंची थी। इस बार भी ठीक ऐसे ही वक्त मौसम के मिजाज में बदलाव होने लगा है। शुक्रवार की सुबह से ही आसमान में हल्के बादल छाए रहे। दिन भर बादलों की लुकाछिपी होती रही। बादलों को देख किसान फिर से मौसम की मार को लेकर चिंतित बने हुए हैं। उनका कहना है कि पूर्व के वर्षों जैसी स्थिति हुई तो इस बार काफी क्षति उठानी पड़ेगी। हालांकि मौसम विभाग अभी छिटपुट बूंदाबांदी की ही संभावना जता रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल का कहना है कि 13 मार्च तक हल्की वर्षा या छिटपुट बूंदाबादी के आसार हैं। बादल छाए रहेंगे। तापमान में भी गिरावट आएगी। आर्द्रता 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस दौरान 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। किसान रमेश चंद्र यादव, राम आसरे ने बताया कि इस समय तैयार फसलों की कटाई और दवाई का कार्य किया जा रहा है। इस समय मौसम का प्रभाव पड़ने से फसल नम हो जाएगी, जिससे मड़ाई का कार्य प्रभावित हो जाता है। बरसात से दाने फूल जाएंगे। वह जल्दी फसल को निपटाने में लग गए हैं। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि गेहूं की जो फसल पक रही है या पकने को तैयार है, बारिश से उसे ज्यादा नुकसान पहुंचेगा। जो फसल अभी हरी है, उसे हल्की बूंदाबादी से फायदा ही होगा। खेत से काटकर खलिहान में रखी गई सरसों की फसल के भी बारिश में भींगने से उत्पादन गिरेगा। मौसम में नमी का सबसे ज्यादा प्रभाव अरहर, चना जैसी दलहनों पर होगा। फसलों में फलीछेदक कीट का प्रकोप बढ़ेगा। ऐसे हाल में किसान इंडाक्साकार्ब की एक एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाकर डालें।
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