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सोनौरा पंप नहर के ब्रिक लाइनिंग की नहीं हुई मरम्मत
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बदलापुर। क्षेत्र के बक्खोपुर गांव स्थित सोनौरा पंप कैनाल के ब्रिक लाइनिंग का कई साल से मरम्मत नहीं कराया गया है। जिसके कारण एक दर्जन से अधिक गांवों के पांच सौ से अधिक किसानों की 1200 हेक्टेयर भूमि पर अच्छी खेती नहीं हो पा रही है। बावजूद इसके विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। किसान प्रशासनिक लापरवाही के चलते खेती समय से नहीं कर पा रहे हैं। सिंचाई का कोई साधन नहीं नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। जिसे लेकर क्षेत्र के किसान परेशान हैं।
किसानों की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 1969 में बक्खोपुर गांव के बगल से गुजर रही गोमती नदी में सोनौरा पम्प कैनाल स्टेज द्वितीय की स्थापना की गई थी। असिंचित क्षेत्र बक्खोपुर, चंवरी, सलामतपुर, छंगापुर, लेदुका, कटहरी, बेलावां, पूरासांवल,बरबसपुर, नरेन्द्रपुर, खालिसपुर आदि गांव के किसान पंप कैनाल की स्थापना होने के बाद काफी खुश थे। काफी दिनों तक किसानों को सिंचाई में काफी राहत मिली। लेकिन विगत 15 वर्षों से मशीन में जंग लग रहा है। नई मोटर लगाने के बाद मशीन तो चलती है लेकिन नहर जर्जर होने के कारण बीच में टूट जाती है। जिससे पानी टेल तक नहीं पाता है। छह किलोमीटर लंबी इस नहर के रखरखाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। न तो चौकीदार है और न ही मशीन चलाने के लिए संचालक तैनात किया गया है।
जिसके कारण किसानों के सामने सिंचाई को लेकर समस्या गहरा गई है। 1200 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई फिर से राम भरोसे हो गई है। दुर्दशा का सब से बड़ा कारण पंप कैनाल को चलाने के लिए लगी डेढ़ सौ व 75 एचपी की मोटर आए दिन खराब रहती है। मोटर सही हो भी जाती है तो नहर में साफ सफाई न होने से लीकेज बना हुआ है। जिससे पंप चालू होते ही हेड के पास ही नहर टूट जाती है। पानी आगे नही बढ़ पाता है। किसान राजेश तिवारी, राजा सिंह, माताचरन, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह नाटे, नन्हूं तिवारी, रामफेर निषाद, मेंहीलाल प्रजापति, पिन्टू सिंह, प्रदीप तिवारी आदि ने विभागीय शिथिलता पर आक्रोश जताया। आरोप है कि समय पर नहर की सफाई हुई होती तो नहर में लीकेज नहीं होता। किसानों ने दर्जनों बार तहसील दिवस पर नहर के जीर्णोद्धार के लिए प्रार्थना पत्र दिया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बजट के अभाव में पम्प कैनाल की स्थित दयनीय हो गई है। एडीओ लघुडाल सीडी पाठक का कहना है कि बजट मिलने पर नहर की ब्रिकलाइनिंग का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। सर्वेयर से रिपोर्ट तैयार कर बजट के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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किसानों की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 1969 में बक्खोपुर गांव के बगल से गुजर रही गोमती नदी में सोनौरा पम्प कैनाल स्टेज द्वितीय की स्थापना की गई थी। असिंचित क्षेत्र बक्खोपुर, चंवरी, सलामतपुर, छंगापुर, लेदुका, कटहरी, बेलावां, पूरासांवल,बरबसपुर, नरेन्द्रपुर, खालिसपुर आदि गांव के किसान पंप कैनाल की स्थापना होने के बाद काफी खुश थे। काफी दिनों तक किसानों को सिंचाई में काफी राहत मिली। लेकिन विगत 15 वर्षों से मशीन में जंग लग रहा है। नई मोटर लगाने के बाद मशीन तो चलती है लेकिन नहर जर्जर होने के कारण बीच में टूट जाती है। जिससे पानी टेल तक नहीं पाता है। छह किलोमीटर लंबी इस नहर के रखरखाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। न तो चौकीदार है और न ही मशीन चलाने के लिए संचालक तैनात किया गया है।
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जिसके कारण किसानों के सामने सिंचाई को लेकर समस्या गहरा गई है। 1200 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई फिर से राम भरोसे हो गई है। दुर्दशा का सब से बड़ा कारण पंप कैनाल को चलाने के लिए लगी डेढ़ सौ व 75 एचपी की मोटर आए दिन खराब रहती है। मोटर सही हो भी जाती है तो नहर में साफ सफाई न होने से लीकेज बना हुआ है। जिससे पंप चालू होते ही हेड के पास ही नहर टूट जाती है। पानी आगे नही बढ़ पाता है। किसान राजेश तिवारी, राजा सिंह, माताचरन, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह नाटे, नन्हूं तिवारी, रामफेर निषाद, मेंहीलाल प्रजापति, पिन्टू सिंह, प्रदीप तिवारी आदि ने विभागीय शिथिलता पर आक्रोश जताया। आरोप है कि समय पर नहर की सफाई हुई होती तो नहर में लीकेज नहीं होता। किसानों ने दर्जनों बार तहसील दिवस पर नहर के जीर्णोद्धार के लिए प्रार्थना पत्र दिया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बजट के अभाव में पम्प कैनाल की स्थित दयनीय हो गई है। एडीओ लघुडाल सीडी पाठक का कहना है कि बजट मिलने पर नहर की ब्रिकलाइनिंग का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। सर्वेयर से रिपोर्ट तैयार कर बजट के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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