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तेजी से नीचे खिसक रहा गोमती नदी का जलस्तर

Mon, 18 Jun 2018 12:03 AM IST
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:03 AM IST
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तेजी से नीचे खिसक रहा गोमती नदी का जलस्तर
जौनपुर। लोगों को मुक्ति देने वाली गोमती नदी को अब मुक्तिदाता की दरकार है। इस नदी का स्रोत भूजल है। भूजल तेजी से नीचे खिसक रहा है। नदी में नालों की सिल्ट जमा होने के कारण उसकी तली गहरी नहीं रह गई है। इसका असर गर्मी पड़ते ही दिखने लगा है। नदी में जगह-जगह बालू के टीले उभर गए हैं। पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि उससे दुर्गंध निकल रही है। लगभग तीस वर्षों से न तो नदी की खुदाई हुई और न ही इसकी साफ सफाई की ही व्यवस्था नगर पालिका और नगर पंचायतों द्वारा की गई। गोमती नदी अस्वस्थ्य हो चुकी है। प्रदूषण से कराह रही है। मान्यता के अनुसार गोमती नदी अवध को परमेश्वर से वरदान के रूप में मिली हुई नदी है। शिव पुराण में नदी को आदेश दिया गया था कि वह माता के रूप में मानव का लालन पालन करें। भगवान शिव ने गोमती और नर्मदा को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया था। यहां मान्यता है कि एकादशी के दिन स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जात हैं। लेकिन गोमती का पानी स्नान करना तो दूर कोई हाथ से छूता भी नहीं है। जो मां पूरे समाज का लालन पालन कर रही है। उसी मां का अस्तित्व नदी के रूप में संकट में है। जौनपुर शहर गोमती नदी के दोनों तरफ फैला हुआ है। इस शहर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक ने अपने चचेरे भाई सुल्तान मुहम्मद की याद में किया था। सुल्तान मुहम्मद का वास्तविक नाम जौना खां था। इसी कारण इस शहर का नाम जौनपुर रखा गया। गोमती उत्तर भारत में बहने वाली नदी है जिसका उदगम पीलीभीत जिले में माधोटांडा के पास होता है। इसका बहाव यूूपी में 900 किमी तक है। जौनपुर शहर के पास गोमती नदी की सुंदरता देखते ही बनती है जो प्रदूषण के करण समाप्त होती जा रही है। गोमती नदी में मछलियों की प्रजातियां गायब हो गई। प्रदूषित जल की वजह से गर्मी में मछलियां मर जा रही है। पहले इसी नदी में रोहू, भाकूर, नयन, पहिना, टेंगर, बलगेगरा, चेलवां, गोच, सधरी, बैकड़ आदि मछलियां पैदा होती थी। इस कुछ सालों से नदी की स्थिति काफी खराब हो गई है। आदि गंगा कही जाने वाली यह नदी कराह रही है। गंदे जल सीधे नदी में बह रहे हैं। न तो प्रशासन इस तरफ ध्यान दे रहा है और न ही सामाजिक संस्थाएं ही इस दिशा में कोई पहल कर रही है।
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