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मोहम्मद साहब ने पूरी दुनियां को दिया अमन का पैगाम
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:39 AM IST
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कोतवाली चौराहे के पास आयोजित जलसे में शामिल प्रबुद्ध वर्ग के लोग
जौनपुर। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर शनिवार को शहर में भव्य सजावट की गई थी। शहर की प्रमुख गलियों, चौराहों, शाही पुल, अटाला मस्जिद समेत अन्य ऐतिहासिक स्थलों को रंगबिरंगे विद्युत झालरों से सजाया गया था। नगर के कोतवाली चौराहे पर कौमी एकजहती जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में मौजूद सभी धर्मों के प्रबुद्धजनों ने नूरानी तकरीरों और अपने कलाम के माध्यम से पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) की पैदाइश के मौके पर खुशी का इजहार किया।
कौमी एकजहती जलसे की शुरुआत तेलावते कलाम पाक से हुई। जलसे में तकरीर करते हुए मौलाना वसीम अहमद शेरवानी मोहम्मद साहब की सीरत बयान किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अमल का पैरोकर बनकर आए मोहम्मद साहब ने आपसी भाई चारगी को कायम रखने का संदेश दिया था। पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने कहा कि इस शहर के आपसी प्रेम सौहार्द को देश दुनियां में जाना जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर सौहार्द की जो तस्वीर बनती है उसमें जौनपुर शहर के सभी धर्म, मजहब के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब (स.अ.व.) की पैदाइश की खुशी का इजहार किया। पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद, प्रो. एसपी सिंह, डा. पीसी विश्वकर्मा, असलम शेर खां, शायर आकिल जौनपुरी, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, साजिद हमीद, मसूद मेहदी ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए बड़ा ऐतिहासिक है। नसीम जौनपुर ने नबी की शान में शेर पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर सभासद इरशाद मंसूरी, मरकदी सीरत कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अनवर खां, शकील मंसूरी, शाहमोहम्मद तारिक, नेयाज ताहिर शेखू, अनवारुल हक गुड्डू, डा. तुफैल आदि मौजूद थे। संचालन आरिफ एडवोकेट ने किया। जलसे के बाद मरकजी सीरत कमेटी की ओर से असर की नमाज के बाद शाही ईदगाह से जुलूस निकाल गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए अटाला मस्जिद पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में शामिल विभिन्न अखाड़ों के फन सिपहगिरी के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। जुलूस का सिलसिला पूरी रात चलता रहा।
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कौमी एकजहती जलसे की शुरुआत तेलावते कलाम पाक से हुई। जलसे में तकरीर करते हुए मौलाना वसीम अहमद शेरवानी मोहम्मद साहब की सीरत बयान किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अमल का पैरोकर बनकर आए मोहम्मद साहब ने आपसी भाई चारगी को कायम रखने का संदेश दिया था। पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने कहा कि इस शहर के आपसी प्रेम सौहार्द को देश दुनियां में जाना जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर सौहार्द की जो तस्वीर बनती है उसमें जौनपुर शहर के सभी धर्म, मजहब के लोग शामिल होते हैं। उन्होंने पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब (स.अ.व.) की पैदाइश की खुशी का इजहार किया। पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद, प्रो. एसपी सिंह, डा. पीसी विश्वकर्मा, असलम शेर खां, शायर आकिल जौनपुरी, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, साजिद हमीद, मसूद मेहदी ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए बड़ा ऐतिहासिक है। नसीम जौनपुर ने नबी की शान में शेर पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर सभासद इरशाद मंसूरी, मरकदी सीरत कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अनवर खां, शकील मंसूरी, शाहमोहम्मद तारिक, नेयाज ताहिर शेखू, अनवारुल हक गुड्डू, डा. तुफैल आदि मौजूद थे। संचालन आरिफ एडवोकेट ने किया। जलसे के बाद मरकजी सीरत कमेटी की ओर से असर की नमाज के बाद शाही ईदगाह से जुलूस निकाल गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए अटाला मस्जिद पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में शामिल विभिन्न अखाड़ों के फन सिपहगिरी के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। जुलूस का सिलसिला पूरी रात चलता रहा।
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