राम जन्मभूमि से ग्राउंड रिपोर्ट: मंदिर निर्माण स्थल पर पहुंचा अमर उजाला, जानें कब से कर सकेंगे रामलला के दर्शन?
राम जन्मभूमि तीर्थ के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र ने अमर उजाला को बताया कि गर्भगृह के ऊपर मंदिर का निर्माण कार्य होगा। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए 20 फीट का प्लिंथ बनाया जा रहा है, जिसके ऊपर मंदिर के खंबे लगाए जाएंगे। 15 जनवरी के बाद मंदिर के दूसरे चरण का काम शुरू होगा...
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2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अमर उजाला पहुंचा अयोध्या, जहां हमने राम मंदिर निर्माण कार्य का जायजा लिया। तेजी से हो रहे निर्माण कार्य को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर निर्माण का काम 2024 से काफी पहले ही पूरा हो जाएगा। जिस गति से मंदिर निर्माण का कार्य आकार ले रहा है, उसे देख कर कहा जा सकता है कि बहुत जल्द ही भक्त राम लला के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर निर्माण का पहले चरण का काम लगभग पूरा होने को तैयार है।
15 जनवरी के बाद मंदिर के दूसरे चरण का काम शुरू
राम मंदिर निर्माण स्थल पर पहुंचने वाला अमर उजाला पहला ऐसा मीडिया चैनल है। राम मंदिर निर्माण स्थल के सबसे अहम निर्माण की फाउंडेशन पूरी हो चुकी है। यानी कि राम मंदिर निर्माण की नींव बनकर लगभग तैयार है। राम जन्मभूमि तीर्थ के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र ने अमर उजाला को बताया कि गर्भगृह के ऊपर मंदिर का निर्माण कार्य होगा। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए 20 फीट का प्लिंथ बनाया जा रहा है, जिसके ऊपर मंदिर के खंबे लगाए जाएंगे। 15 जनवरी के बाद मंदिर के दूसरे चरण का काम शुरू होगा।
50 फुट नीचे खुदाई
डॉक्टर अनिल मिश्र ने बताया कि उन्होंने बताया कि पत्थरों की तराशी काम चल रहा है। उनका आकलन है अगस्त 2023 तक पत्थरों को लगा दिया जाएगा। मंदिर के प्रथम तल का काम दिसंबर 2023 का पूरा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि बलुई मिट्टी होने के कारण निर्माण में थोड़ी दिक्कतें आई हैं। इसके लिए आईआईटी दिल्ली, चैन्नई और गुवाहटी के इंजीनियरों ने 50 फुट नीचे खुदाई करके चरणबद्ध तरीके से भराई की है और इसकी 48 परतें तैयार की हैं। वह कहते हैं कि एक विशेष प्रकार के इंजीनियर फिलर के साथ मंदिर की नींव एक नेचुरल चट्टान के तौर पर तैयार की गई है। जो न कभी दरकेगी और न ही उसमें कोई परिवर्तन आएगा। वह कहते हैं कि यह चट्टान 48 परतों की है। ऐसी विशेष चट्टानों पर तैयार की गई इमारतें हजारों हजार साल तक चलती है।
कभी इस तरफ बहती थी सरयू की एक धारा
डॉक्टर अनिल मिश्र कहते हैं की निर्माण के वक्त इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि सरयू नदी की धारा कभी इस ओर ना मुड़े। वो कहते हैं कि सर्वे के दौरान इस बात का पता चला था कि कभी सरयू नदी का एक ड्राई चैनल इस मंदिर की ओर मुड़ा हुआ था। इसलिए वह चैनल कभी सक्रिय ना हो इसका ध्यान रखते हुए एक जमीन से 40 फीट नीचे तक एक दीवार का निर्माण किया गया है। जिसके चलते कभी सरयू नदी का रुख मंदिर की तरफ नहीं हो सकेगा। सर्वे में जानकारी सामने आई थी कि कभी सरयू नदी की एक धारा इस ओर भी थी।
70 फ़ीसदी हिस्से पर कोई निर्माण नहीं
लोग कहते हैं कि मंदिर निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखा गया है। वो कहते हैं पूरे परिसर में सिर्फ 30 फीसदी का ही निर्माण होगा जबकि 70 फ़ीसदी मंदिर खुला और ग्रीन होगा। उनके मुताबिक पहले प्रथम तल के निर्माण के बाद अन्य तलों पर कार्य शुरू किया जाएगा। मंदिर में सभी लोगों के आने का विधिवत बंदोबस्त किया जा रहा है। जिसमें विकलांगों से लेकर बुजुर्गों के भी आने का बंदोबस्त होगा। विकलांगों के लिए जहां अलग से व्हीलचेयर कॉरिडोर होगा, वहीं वरिष्ठ नागरिकों या चलने में असमर्थ लोगों के लिए कार्ट का भी इंतजाम किया जा रहा है।