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खुलासाः 40 हजार रुपये में मिलते हैं एक लाख के जाली नोट
Mon, 21 Oct 2019 01:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 21 Oct 2019 01:39 AM IST
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जाली नोट
- फोटो : अमर उजाला
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एटीएस की टीम द्वारा गिरफ्तार दीपक साहनी ने बताया कि जाली नोटों की तस्करी के आरोप में वह पश्चिम बंगाल, पंजाब और बिहार में तीन बार जेल जा चुका है। लगभग तीन माह पहले वह बिहार की बेतिया जेल से जमानत पर छूटा है।
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पुराने संपर्कों को खंगाल कर उसने फिर से जाली नोटों की तस्करी की योजना बनाई। पंचकूला जाने पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के बीच जाली नोटों को खपाने की योजना थी।
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पूछताछ में दीपक ने एटीएस को बताया कि 40 हजार रुपये देने पर बांग्लादेश निर्मित एक लाख रुपये के जाली नोट मिलते हैं। बांग्लादेश निर्मित जाली नोटों की छपाई पाकिस्तान के जाली नोटों की तरह साफ और स्पष्ट नहीं होती है।
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इसलिए बांग्लादेश निर्मित जाली नोट देहात क्षेत्रों के बाजारों में अनपढ़ लोगों के बीच खपाई जाती हैं। नोटबंदी के बाद नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान से जाली नोट आना इस समय बंद है। इसी तरह से पश्चिम बंगाल से पटना, बनारस होते हुए पुणे जाली नोटों की तस्करी का एक मुख्य मार्ग था, लेकिन एटीएस सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती की वजह से अवैध धंधा मंदा पड़ गया है।
विधानसभा चुनाव के लिए तो नहीं ले जाए जा रहे थे जाली नोट
तस्करी के आरोपी दीपक की गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आई कि जाली नोटों की खेप हरियाणा के विधानसभा चुनाव में खपाने के उद्देश्य से तो नहीं ले जाई जा रही थी।
इस सवाल पर एटीएस के इंस्पेक्टर ने बताया कि हमारी तफ्तीश जारी है। दीपक के संबंध में जानकारी के लिए बिहार पुलिस के साथ ही वहां की एटीएस से भी संपर्क किया गया है। सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एटीएस इंस्पेक्टर शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि दीपक की गिरफ्तारी में उनकी टीम के एसआई रितेश सिंह, आलोक सिंह, रणविजय तिवारी, प्रभात द्विवेदी और अभिषेक सिंह के अलावा इंस्पेक्टर कैंट अश्वनी चतुर्वेदी व उनकी टीम के पुलिसकर्मी शामिल रहे।