दैवी आपदा से अन्नदाता के सपने चकनाचूर
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जिले में सोमवार की रात बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने किसानों की फसलों को एक झटके में बर्बाद कर दिया। प्रकृति की इस मार से किसानों की हाड़तोड़ मेहनत से तैयार फसलें मिट्टी में मिल गईं। सुबह जब उजाले में उन्होंने अपनी बर्बाद फसलें देखीं तो मुंह से आह निकल गई। पिछली ओलावृष्टि के बाद सूखा और फिर ओलावृष्टि ने भुखमरी की कगार पर ला खड़ा किया है। अब तक पिछली ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने से गुस्साए किसानों ने बांदा-सागर रोड पर कई जगह जाम लगाकर अपनी पीड़ा दर्शाई। जिला प्रशासन और पुलिस ने किसी तरह समझाकर यातायात चालू कराया। करीब चार घंटे बाद लोग माने और जाम हटाया।
हरीभरी फसल को देखकर कल तक तरह-तरह के सपने संजोने वाले अन्नदाता मौसम के कहर से एक झटके में दोराहे पर खड़े हो गए हैं। किसी को बिटिया की शादी करनी है, तो किसी को बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाना है।
कई ने तो पिछली दैवी आपदा से उबरने के लिए कर्ज तक ले रखा है। कभी सूखा तो कभी ओलावृष्टि-बेमौसम बारिश की मार से जूझ रहे किसानों को एक बार फिर बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि ने बर्बाद कर दिया। अन्नदाता की हाड़तोड़ मेहनत से तैयार गेहूं, चना, राई और सरसों की फसल तहस-नहस हो गई
लगातार दैवीय आपदा से जूझ रहे अन्नदाता की परिवारिक जिंदगी में अंधेरा छा गया है। जहां आंधी से गेहूं, राई की फसलें लुढ़क गई हैं वहीं ओलावृष्टि से बर्बादी का मंजर यमुना तिरहार इलाकों में साफ दिख रहा है।