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सरयू में कटान तेज, पानी में समाया मकान
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:42 PM IST
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सरयू में समाया मकान।
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से उफनाई सरयू में शुक्रवार से जलस्तर में शुरू हुई गिरावट शनिवार को भी जारी रही। 24 घंटे में नदी लगभग 23 सेंटीमीटर घट तो गई है, मगर वह अभी भी लाल निशान 92.730 मीटर से नौ सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। घट रहे जलस्तर से कछार के क्षेत्रों में कटान भी तेज हो गई है।
कटान से सोहावल के ढेमवाघाट, मांझा कला और घरुकनपुरवा गांवों का अस्तित्व खतरे में आ गया है। बीती रात ढेमवा में एक पक्का मकान कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। तराई के कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेती की जमीन नदी में कटकर जा चुकी है।
पानी से घिरे गांवों के लोग गृहस्थी समेट रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ गई है। लेखपाल क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं। सरयू में आई बाढ़ का असर शहरी क्षेत्र के गुप्तारघाट, निर्मली कुंड के साथ ही सदर तहसील के पूरा व मया, रुदौली व सोहावल तहसील के तटीय इलाकों में दिखने लगा है।
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हालांकि नदी के खतरे का निशान पार करने के बाद तेजी से बढ़ते रहने से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के संभावित संकट से बेचैनी बढ़ गई थी लेकिन शुक्रवार से नदी में ठहराव के बाद तेजी से शुरू हुई गिरावट से कछारीय इलाकों में अब कटान का खतरा गंभीर हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 92.820 मीटर दर्ज किया गया।
जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रहा है। पूरा बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक, नदी के जलस्तर में गिरावट से क्षेत्र के मूड़ाडीहा, पूरेचेतन, पिपरी संग्राम, सलेमपुर, शिवलाल का पुरवा, साधू का पुरवा, बाबा का पुरवा, धनी का पुरवा, बलुइया, मड़ना, उरदहवा, रामपुरपुआरी माझा, काजीपुर माझा आदि के ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ा दी है।
हालांकि पानी से घिरने के बाद गांवों में लोग गृहस्थी को सहेजने लगे हैं। सोहावल प्रतिनिधि के मुताबिक, सरयू के जलस्तर में शुरू हुई गिरावट से तटीय गांवों से जुड़े मकानों और खेत खलिहानों में कटान तेज हो गई है। कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेती की जमीन नदी में कटकर जा चुकी है।
ढेमवाघाट, घरुकनपुरवा और मांझा कला का अस्तित्व खतरे में है। मांझा कला के सैकड़ों परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। बीती रात ढेमवा निवासी विश्वनाथ गुप्त का पक्का मकान कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। गत वर्षों में इस पुरवे से 12 परिवार बेघर हुए थे।
इन्हें पुनर्वासित करने के लिए आवासीय पट्टे दिए गए लेकिन पीड़ितों को कब्जा आज तक नहीं मिला। कई अन्य घरों पर खतरा मंडरा रहा है। मांझा कला के दो सौ से ज्यादा परिवार बाढ़ की गिरफ्त में है। भोजन पानी और पशुओं के चारे की समस्या से लोग जूझ रहे हैं।
इब्राहिमपुर दिवली मंगलसी तहसीनपुर सनाहा रौनाही इस्माइल नगर सिहोरा रामनगर धौरहरा सीबार आदि कई गांवों की कृषि योग्य भूमि कटान की चपेट में है। ढेमवा घाट पुल के कई पिलर पानी में डूब चुके हैं, निर्माण कार्य ठप है।
तहसीलदार कंचनराम ने बताया कि मांझा कला गांव के करीब 200 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है। ढेमवा घाट पर कटान की सूचना मिली है। कृषि योग्य कट रही भूमि का आंकलन कराया जाएगा।
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कटान से सोहावल के ढेमवाघाट, मांझा कला और घरुकनपुरवा गांवों का अस्तित्व खतरे में आ गया है। बीती रात ढेमवा में एक पक्का मकान कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। तराई के कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेती की जमीन नदी में कटकर जा चुकी है।
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पानी से घिरे गांवों के लोग गृहस्थी समेट रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ गई है। लेखपाल क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं। सरयू में आई बाढ़ का असर शहरी क्षेत्र के गुप्तारघाट, निर्मली कुंड के साथ ही सदर तहसील के पूरा व मया, रुदौली व सोहावल तहसील के तटीय इलाकों में दिखने लगा है।
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हालांकि नदी के खतरे का निशान पार करने के बाद तेजी से बढ़ते रहने से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के संभावित संकट से बेचैनी बढ़ गई थी लेकिन शुक्रवार से नदी में ठहराव के बाद तेजी से शुरू हुई गिरावट से कछारीय इलाकों में अब कटान का खतरा गंभीर हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 92.820 मीटर दर्ज किया गया।
जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रहा है। पूरा बाजार प्रतिनिधि के मुताबिक, नदी के जलस्तर में गिरावट से क्षेत्र के मूड़ाडीहा, पूरेचेतन, पिपरी संग्राम, सलेमपुर, शिवलाल का पुरवा, साधू का पुरवा, बाबा का पुरवा, धनी का पुरवा, बलुइया, मड़ना, उरदहवा, रामपुरपुआरी माझा, काजीपुर माझा आदि के ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ा दी है।
हालांकि पानी से घिरने के बाद गांवों में लोग गृहस्थी को सहेजने लगे हैं। सोहावल प्रतिनिधि के मुताबिक, सरयू के जलस्तर में शुरू हुई गिरावट से तटीय गांवों से जुड़े मकानों और खेत खलिहानों में कटान तेज हो गई है। कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेती की जमीन नदी में कटकर जा चुकी है।
ढेमवाघाट, घरुकनपुरवा और मांझा कला का अस्तित्व खतरे में है। मांझा कला के सैकड़ों परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। बीती रात ढेमवा निवासी विश्वनाथ गुप्त का पक्का मकान कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। गत वर्षों में इस पुरवे से 12 परिवार बेघर हुए थे।
इन्हें पुनर्वासित करने के लिए आवासीय पट्टे दिए गए लेकिन पीड़ितों को कब्जा आज तक नहीं मिला। कई अन्य घरों पर खतरा मंडरा रहा है। मांझा कला के दो सौ से ज्यादा परिवार बाढ़ की गिरफ्त में है। भोजन पानी और पशुओं के चारे की समस्या से लोग जूझ रहे हैं।
इब्राहिमपुर दिवली मंगलसी तहसीनपुर सनाहा रौनाही इस्माइल नगर सिहोरा रामनगर धौरहरा सीबार आदि कई गांवों की कृषि योग्य भूमि कटान की चपेट में है। ढेमवा घाट पुल के कई पिलर पानी में डूब चुके हैं, निर्माण कार्य ठप है।
तहसीलदार कंचनराम ने बताया कि मांझा कला गांव के करीब 200 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। इनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है। ढेमवा घाट पर कटान की सूचना मिली है। कृषि योग्य कट रही भूमि का आंकलन कराया जाएगा।