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साल भर में दो प्रतिशत पात्रों को भी नहीं मिला आयुष्मान का लाभ

Sun, 22 Sep 2019 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 11:57 PM IST
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Two percent of the characters did not even get the benefit of Ayushman
अयोध्या। बीते वर्ष काफी शोर शराबे के साथ शुरू हुई भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत जिले में तेजी से परवान नहीं चढ़ रही है।
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मोदी केयर के नाम से शुरू हुई इस योजना का 23 सितंबर को प्रथम वर्षगांठ है, लेकिन योजना के प्रति विभाग की सुस्ती का असर है कि अभी तक कुल पात्रों में से दो प्रतिशत लोग भी योजना का लाभ नहीं ले सके हैं। वहीं, गोल्डेन कार्ड बनाने की रफ्तार भी सुस्त है, जिससे तमाम जरूरतमंदों को समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धनाभाव के कारण समय पर इलाज न मिलने से किसी भी गरीब की मौत न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते वर्ष 23 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर स्वस्थ भारत सशक्त भारत के नारे के साथ शुरू हुई इस योजना में गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को शामिल किया गया। पात्रता के तय किए मापदंडों के अनुसार जिले में कुल 173360 लाभार्थी योजना के तहत पात्र मिले। इनमें 152809 लाभार्थी ग्रामीण व 20551 लाभार्थी नगरीय क्षेत्र के हैं।
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योजना के तहत लाभ दने के लिए 11 निजी व पांच सरकारी अस्पतालों का चयन किया गया था। योजना में 1350 प्रकार के मेडिकल पैकेजों/बीमारियों के इलाज की सुविधा जिसमें सर्जरी, डे-केयर, दवाइयों का खर्च, जांच का खर्च आदि शामिल होगा।
इसमें समस्त पुरानी एवं नई गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों का इलाज भी संभव होगा। योजना लांच होने के बाद इसका व्यापक प्रचार-प्रसार न होना व इसके क्रियान्वयन में विभाग की सुस्ती की वजह से शासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।
मौजूदा समय में जिले में चयनित कुल 173360 पात्रों में सिर्फ 43 हजार का गोल्डेन कार्ड ही बनाया गया, जो कुल संख्या का करीब 25 प्रतिशत है। वहीं, इनमें से मात्र 2200 लोगों का आपरेशन विभिन्न अस्पतालों में हुआ है, जो कुल संख्या का महज 1.5 प्रतिशत ही है।
आयुष्मान का लाभ देने में सबसे अव्वल निजी अस्पताल हैं, जहां करीब 2008 मरीजों को इलाज हुआ है। जबकि सरकारी अस्पताल में कुल 189 मरीजों का ही इलाज हुआ है। निजी अस्पतालों में सबसे आगे निर्मला हॉस्पिटल हैं, जहां सर्वाधिक 899 मरीजों का इलाज हुआ है। दूसरे नंबर पर चिरंजीव हॉस्पिटल व तीसरे नंबर पर अयोध्या आई हॉस्पिटल है। सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज कराने में मेडिकल कॉलेज सबसे पीछे है।

सूची में नाम नहीं तो अभी करें इंतजार
सीएमओ डॉ हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक चयनित 173360 पात्रों का गोल्डेन कार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा जिन लोगों का सूची में नाम नहीं हैं, उन्हें अभी इंतजार करना पड़ेगा। शासन से अग्रिम निर्देश प्राप्त होने पर आवेदन मांगा जाएगा। तदुपरांत उन्हें भी योजना का लाभ मिल सकेगा।
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