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ट्रेन हादसे की जांच की मुड़ी दिशा
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:27 AM IST
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रेल
- फोटो : पिर्पिपि
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दून एक्सप्रेस डिरेलमेंट में स्थानीय अधिकारियों की जांच रिपोर्ट खारिज हो गई है। इसमें जिन केबिनमैन, लीवरमैन और इंडोर ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर को बलि का बकरा बनाने की तैयारी की गई थी, उस पर पानी फिर गया है। लखनऊ से जांच करने पहुंची अफसरों की टीम ने पॉइंट व लॉकबार में खराबी को लेकर जांच की दिशा मोड़ दी है। इससे जिम्मेदारों में हलचल मच गई है।
रेलवे के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता कौस्तुभमणि पांडेय, वरिष्ठ मंडल अभियंता सिग्नल एंड टेलीकॉम एके सिंह, वरिष्ठ मंडल अभियंता-पंचम हरीश कुमार, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी एके यादव, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (सामान्य) वाईपी त्रिपाठी ने यहां से पॉइंट रिपोर्ट भेजने वाले अधिकारियों के साथ स्टेशन से दुर्घटनास्थल तक जांच की।
गाड़ी गुजरने के दौरान लॉक बार हटाया गया? लॉक बार लगा ही नहीं? अथवा केबिन में बैठे व्यक्ति को सिग्नल मिल गया? इन सभी बिंदुआें पर बारीकी से जांच हुई। सूत्रों के अनुसार दुर्घटना के दौरान 13010 डाउन दून का इंजन जहां खड़ा था, वहां से एडवांस सिग्नल तक नापजोख हुई।
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डिब्बों के गिरने के स्थान प्वाइंट 76 लॉक 73 पर पहले इंजन को खड़ाकर केबिन से लॉक बार हटाने को कहा गया। ऐसा एक-दो और तीन कर्मी मिलकर भी नहीं कर सके। इसके बाद इंजन और लॉक बार हटाकर उस स्थान पर बोगी खड़ी की गयी। अब लॉक बार लगाने को कहा गया तो लॉक बार नहीं लगाया जा सका।
अधिकारी आश्वस्त हुए कि गाड़ी गुजरने के दौरान लॉकबार नहीं हटाया जा सकता। अधिकारी समझ गये कि दुर्घटना के समय लॉक बार नहीं लगने के कुछ और ही कारण थे। इसके लिए देर शाम को अप 13238 पटना-मथुरा ट्रेन को एडवांस से डिरेलमेंट स्थल से गुजारे जाने की तैयारी थी।
सूत्र का कहना था कि फैजाबाद से भेजी ज्वाइंट रिपोर्ट में अधिकारियों ने डिरेलमेंट का ठीकरा केबिन में ड्यूटी कर रहे कर्मियों और इंडोर स्टेशन मास्टर के सिर फोड़ने का प्रयास किया था। लखनऊ की टीम के साथ यहां के टीआई दिवाकर उपाध्याय, चीफ एलआई उपेंद्र कुमार, चीफ पीवे नंदन सिंह, सीडीओ बीपी मिश्र आदि जांच में भागदौड़ और नाप-जोख करते नजर आये।
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रेलवे के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता कौस्तुभमणि पांडेय, वरिष्ठ मंडल अभियंता सिग्नल एंड टेलीकॉम एके सिंह, वरिष्ठ मंडल अभियंता-पंचम हरीश कुमार, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी एके यादव, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (सामान्य) वाईपी त्रिपाठी ने यहां से पॉइंट रिपोर्ट भेजने वाले अधिकारियों के साथ स्टेशन से दुर्घटनास्थल तक जांच की।
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गाड़ी गुजरने के दौरान लॉक बार हटाया गया? लॉक बार लगा ही नहीं? अथवा केबिन में बैठे व्यक्ति को सिग्नल मिल गया? इन सभी बिंदुआें पर बारीकी से जांच हुई। सूत्रों के अनुसार दुर्घटना के दौरान 13010 डाउन दून का इंजन जहां खड़ा था, वहां से एडवांस सिग्नल तक नापजोख हुई।
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डिब्बों के गिरने के स्थान प्वाइंट 76 लॉक 73 पर पहले इंजन को खड़ाकर केबिन से लॉक बार हटाने को कहा गया। ऐसा एक-दो और तीन कर्मी मिलकर भी नहीं कर सके। इसके बाद इंजन और लॉक बार हटाकर उस स्थान पर बोगी खड़ी की गयी। अब लॉक बार लगाने को कहा गया तो लॉक बार नहीं लगाया जा सका।
अधिकारी आश्वस्त हुए कि गाड़ी गुजरने के दौरान लॉकबार नहीं हटाया जा सकता। अधिकारी समझ गये कि दुर्घटना के समय लॉक बार नहीं लगने के कुछ और ही कारण थे। इसके लिए देर शाम को अप 13238 पटना-मथुरा ट्रेन को एडवांस से डिरेलमेंट स्थल से गुजारे जाने की तैयारी थी।
सूत्र का कहना था कि फैजाबाद से भेजी ज्वाइंट रिपोर्ट में अधिकारियों ने डिरेलमेंट का ठीकरा केबिन में ड्यूटी कर रहे कर्मियों और इंडोर स्टेशन मास्टर के सिर फोड़ने का प्रयास किया था। लखनऊ की टीम के साथ यहां के टीआई दिवाकर उपाध्याय, चीफ एलआई उपेंद्र कुमार, चीफ पीवे नंदन सिंह, सीडीओ बीपी मिश्र आदि जांच में भागदौड़ और नाप-जोख करते नजर आये।