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रात में गुमनामी बाबा से मिलने आते थे तत्कालीन डीआईजी

Tue, 31 Jan 2017 10:25 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Tue, 31 Jan 2017 10:25 PM IST
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Three of the testimony given before the Commission Justice Vishnu Sahai
फैजाबाद में मंगलवार को जस्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष गवाही देते राम प्रकाश त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला
गुमनामी बाबा उर्फ भगवनजी की पहचान के लिए गठित एक सदस्यीय जस्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष सोमवार को तीन गवाहों ने बयान दर्ज कराए। बयान दर्ज कराने वालों में गुमनामी बाबा के मकान मालिक के बेटे, पत्रकार के साथ बाबा की मरहम-पट्टी करने और दूध पहुंचाने वाले शामिल थे। कहा कि रात के अंधेरे में बाबा से मिलने तत्कालीन डीआईजी भी आते थे। 
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मंगलवार को आयोग के कैंप कार्यालय में आयोग के समक्ष गवाही देने वाले वरिष्ठ पत्रकार राम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि वह गुमनामी बाबा के निकटतम शिष्य कृष्ण गोपाल श्रीवास्वत के छात्र थे। वह उनके साकेत कला केंद्र में आईजीडी बांबे के छात्र थे।
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उनसे मिले संकेतों और परिस्थिति जन्य साक्ष्यों का आज तक उन्होंने जो अध्ययन किया है, उससे यह प्रतीत होता है कि गुमनामी बाबा उर्फ  भगवनजी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ही थे। त्रिपाठी ने न्यायमूर्ति सहाय के सवालों के जवाब में कहा कि वह इस तथ्य को लेकर एक स्मारिका का प्रकाशन कर चुके हैं।
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दूसरे गवाह गुमनामी बाबा के निजी चिकित्सक डॉ. आरपी मिश्र के नर्सिग होम में कंपाउंडर रहे राम प्रताप यादव थे। उन्होंने आयोग के समक्ष बयान में कहा कि वह न केवल गुमनामी बाबा के पैर के घाव की पट्टी करने के लिए जाते थे, बल्कि उनके यहां दूध भी पहुंचाते थे।

बाबा को लखनऊ व अयोध्या से राम भवन लाने में वह भी डॉ. आरपी मिश्र के साथ रहेे। उन्होंने ही उनके बक्से ढोए थे। बताया कि बक्सों की संख्या लगभग 50 से 60 थी। बाबा उनको सीलन खाए कारतूस सुखाने के लिए दिया करते थे।

इन कारतूसों का वजन तकरीबन पांच से छह किलोग्राम हुआ करता था। बयान दर्ज कराने वाले तीसरे गवाह मंजीत सिंह अयोध्या स्थित उनके आवास मालिक के पुत्र थे। उन्होने आयोग के समक्ष बताया कि बाबा की गतिविधियां उनके पिता को संदिग्ध लगती थी।


इसी वजह से उन लोगों ने उन्हें अपने आवास से हटाने की कोशिश की। जब उनको हटाने का प्रयास किया जा रहा था। उल्टे पुलिस ने उनको परेशान किया। बताया कि बाबा से मिलने आने वालो में तत्कालीन डीआईजी भी शामिल थे। वह रात में बाबा से मिलने आते थे। उन्होंने उनकी कार रात में बाबा के पास आते देखी थी। बताया कि उनके पास कोलकाता से लोग 23 जनवरी को मिलने आते थे और उनका जन्मदिन मनाया करते थे।
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