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मंदिर की नींव होगी और मजबूत
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर बन रहा मंदिर सदियों तक अक्षुण्ण रहे, इसे लेकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गंभीर है। ट्रस्ट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर की मजबूती के लिए ट्रस्ट हमेशा कुछ नया करने को तैयार रहता है।
इसी के तहत एक बार फिर से नींव की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। नींव अब 44 के बजाए 48 लेयर पर टिकेगी। यही नहीं राफ्ट की डिजाइन भी बदली गई है ताकि समय की बचत हो।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लक्ष्य है कि अयोध्या में बन रहा राममंदिर एक हजार साल तक सुरक्षित रहे। इसकी भव्यता व मजबूती को लेकर ट्रस्ट ने देश की नामी एजेंसियों को अपने साथ जोड़ा है। आठ नामी एजेंसियां ट्रस्ट के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि राममंदिर न सिर्फ दुनिया में अलौकिक हो बल्कि तकनीक व मजबूती के मामले में भी एक मिसाल हो।
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इसी के तहत ट्रस्ट ने सबसे पहले श्रीरामजन्मभूमि परिसर की मिट्टी की टेस्टिंग कराई। रडार तरंगों के जरिए मिट्टी की क्षमता मापी गई। फिर तय हुआ कि राममंदिर की नींव 1200 पिलर पर ढाली जाएगी। इस पर नवंबर 2020 में काम भी शुरू हुआ, चार-चार पिलर के तीन सेट तैयार किए गए।
फिर आईआईटी चेन्नई व मुंबई के सुझाव के अनुसार इन पिलरों पर जब भूकंप के झटके देकर इनकी क्षमता मापी गई तो पिलर दरक गए। ऐसे में ट्रस्ट ने तत्काल नींव की इस डिजाइन को खारिज कर दिया।
इसके बाद देश के नामी तकनीकी विशेषज्ञों का एक पैनल बनाकर राममंदिर की नींव की मजबूती के लिए सुझाव मांगा गया। इस दौरान एक बार फिर से आईआईटी हैदराबाद के इंजीनियरों ने श्रीरामजन्मभूमि परिसर का सर्वे किया तो पाया कि जहां गर्भगृह निर्मित होना है, वहां से समुद्रतल की ऊंचाई 105 मीटर है। कई महीने के मंथन के बाद आरसीसी प्रणाली से नींव निर्माण तय हुआ।
निर्णय हुआ कि राममंदिर की नींव के लिए कुल 44 लेयर ढाली जाएगी। लेयर ढालने के लिए कौन सी सामग्री प्रयुक्त की जाए, इसे लेकर भी ट्रस्ट ने तकनीकी विशेषज्ञों की राय ली। फिर मार्च 2021 में इंजीनियरिंग प्रणाली से नींव की लेयर ढालने का काम शुरू हुआ। अब जबकि नींव निर्माण का काम लगभग पूरा होने को है तो इसी बीच ट्रस्ट ने एक बार फिर से नींव की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन करते हुए चार लेयर और बढ़ा दी है।
मंदिर की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन करने से मंदिर की मजबूती बढ़ेेगी। इसलिए मंदिर की नींव अब 44 के बजाय 48 लेयर पर टिकेगी ताकि सदियों तक मंदिर अक्षुण्ण रह सके। अब तक नींव की 42 लेयर ढाली जा चुकी है। 20 सितंबर तक लेयर निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा।
ट्रस्ट इससे पहले राममंदिर के मॉडल में भी परिवर्तन कर चुका है। लाखों रामभक्तों सहित रामनगरी के संतों की ओर से मांग हुई थी कि मंदिर का आकार बढ़ाया जाए। ट्रस्ट ने भक्तों एवं संतों की भावना का ध्यान रखते हुए इसे लेकर भी राममंदिर के आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा के साथ महीनों तक मंथन किया। तमाम तकनीकी मंथन के बाद आखिरकार मंदिर के आकार में वृद्धि कर दी गई।
विहिप के मंदिर मॉडल की ऊंचाई 128 फीट थी जो अब बढ़कर 161 फीट हो चुकी है। विहिप के मंदिर मॉडल में तीन गुंबद थे, नए मॉडल में मंदिर के पांच गुंबद होंगे। इस तरह रामभक्तों की मांग पर ट्रस्ट ने राममंदिर की ऊंचाई में 33 फीट की वृद्धि कर दी। राममंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र होगा बल्कि मंदिर परिसर में भक्तों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित करने को लेकर ट्रस्ट ने काम शुरू कर दिया है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। अब इसकी नींव 44 के बजाय 48 लेयर पर टिकेगी। ऐसा करने से मंदिर की नींव और मजबूत होगी।
राफ्ट की डिजाइन में भी थोड़ा परिवर्तन किया गया है। 20 सितंबर तक लेयर ढालने का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद राफ्ट फिर प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। राममंदिर हर मौसम में सुरक्षित रहे, इसे लेकर काम हो रहा है। ट्रस्ट मंदिर की भव्यता व मजबूती के लिए प्रतिबद्ध है।
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इसी के तहत एक बार फिर से नींव की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। नींव अब 44 के बजाए 48 लेयर पर टिकेगी। यही नहीं राफ्ट की डिजाइन भी बदली गई है ताकि समय की बचत हो।
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लक्ष्य है कि अयोध्या में बन रहा राममंदिर एक हजार साल तक सुरक्षित रहे। इसकी भव्यता व मजबूती को लेकर ट्रस्ट ने देश की नामी एजेंसियों को अपने साथ जोड़ा है। आठ नामी एजेंसियां ट्रस्ट के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि राममंदिर न सिर्फ दुनिया में अलौकिक हो बल्कि तकनीक व मजबूती के मामले में भी एक मिसाल हो।
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इसी के तहत ट्रस्ट ने सबसे पहले श्रीरामजन्मभूमि परिसर की मिट्टी की टेस्टिंग कराई। रडार तरंगों के जरिए मिट्टी की क्षमता मापी गई। फिर तय हुआ कि राममंदिर की नींव 1200 पिलर पर ढाली जाएगी। इस पर नवंबर 2020 में काम भी शुरू हुआ, चार-चार पिलर के तीन सेट तैयार किए गए।
फिर आईआईटी चेन्नई व मुंबई के सुझाव के अनुसार इन पिलरों पर जब भूकंप के झटके देकर इनकी क्षमता मापी गई तो पिलर दरक गए। ऐसे में ट्रस्ट ने तत्काल नींव की इस डिजाइन को खारिज कर दिया।
इसके बाद देश के नामी तकनीकी विशेषज्ञों का एक पैनल बनाकर राममंदिर की नींव की मजबूती के लिए सुझाव मांगा गया। इस दौरान एक बार फिर से आईआईटी हैदराबाद के इंजीनियरों ने श्रीरामजन्मभूमि परिसर का सर्वे किया तो पाया कि जहां गर्भगृह निर्मित होना है, वहां से समुद्रतल की ऊंचाई 105 मीटर है। कई महीने के मंथन के बाद आरसीसी प्रणाली से नींव निर्माण तय हुआ।
निर्णय हुआ कि राममंदिर की नींव के लिए कुल 44 लेयर ढाली जाएगी। लेयर ढालने के लिए कौन सी सामग्री प्रयुक्त की जाए, इसे लेकर भी ट्रस्ट ने तकनीकी विशेषज्ञों की राय ली। फिर मार्च 2021 में इंजीनियरिंग प्रणाली से नींव की लेयर ढालने का काम शुरू हुआ। अब जबकि नींव निर्माण का काम लगभग पूरा होने को है तो इसी बीच ट्रस्ट ने एक बार फिर से नींव की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन करते हुए चार लेयर और बढ़ा दी है।
मंदिर की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन करने से मंदिर की मजबूती बढ़ेेगी। इसलिए मंदिर की नींव अब 44 के बजाय 48 लेयर पर टिकेगी ताकि सदियों तक मंदिर अक्षुण्ण रह सके। अब तक नींव की 42 लेयर ढाली जा चुकी है। 20 सितंबर तक लेयर निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा।
ट्रस्ट इससे पहले राममंदिर के मॉडल में भी परिवर्तन कर चुका है। लाखों रामभक्तों सहित रामनगरी के संतों की ओर से मांग हुई थी कि मंदिर का आकार बढ़ाया जाए। ट्रस्ट ने भक्तों एवं संतों की भावना का ध्यान रखते हुए इसे लेकर भी राममंदिर के आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा के साथ महीनों तक मंथन किया। तमाम तकनीकी मंथन के बाद आखिरकार मंदिर के आकार में वृद्धि कर दी गई।
विहिप के मंदिर मॉडल की ऊंचाई 128 फीट थी जो अब बढ़कर 161 फीट हो चुकी है। विहिप के मंदिर मॉडल में तीन गुंबद थे, नए मॉडल में मंदिर के पांच गुंबद होंगे। इस तरह रामभक्तों की मांग पर ट्रस्ट ने राममंदिर की ऊंचाई में 33 फीट की वृद्धि कर दी। राममंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र होगा बल्कि मंदिर परिसर में भक्तों के लिए आधुनिक सुविधाएं भी विकसित करने को लेकर ट्रस्ट ने काम शुरू कर दिया है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की डिजाइन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। अब इसकी नींव 44 के बजाय 48 लेयर पर टिकेगी। ऐसा करने से मंदिर की नींव और मजबूत होगी।
राफ्ट की डिजाइन में भी थोड़ा परिवर्तन किया गया है। 20 सितंबर तक लेयर ढालने का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद राफ्ट फिर प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। राममंदिर हर मौसम में सुरक्षित रहे, इसे लेकर काम हो रहा है। ट्रस्ट मंदिर की भव्यता व मजबूती के लिए प्रतिबद्ध है।